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भावना श्रीवास्तव

सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली अर्थ हाउस ‘ब्रीथ', नीव से लेकर दीवारों तक सबकुछ है प्राकृतिक

बेंगलुरु के बाहरी इलाके कागलीपुरा में 8,000 sq.ft ज़मीन पर बने इस घर का नाम है- ‘Breathe’. जैसा नाम वैसा ही काम; यह सस्टेनेबल घर अपने अनोखे डिज़ाइन के कारण आम घरों के मुकाबले काफ़ी खुला, हवादार और सुकून भरा है।

भारत के टॉप 8 बोटैनिकल गार्डन

क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में 100 से ज़्यादा बोटैनिकल गार्डन्स हैं? इनमें से कुछ सबसे सुन्दर उद्यानों के बारे में आज हम आपको बता रहे हैं। अगर आप नेचर लवर हैं तो एक बार यहाँ जाना तो बनता है।

रमजान में ज़रूर रखें खान-पान का ध्यान, सेहरी में इन पावर पैक्ड डिशेज़ को करें शामिल

रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। ऐसे में खान-पान का ख़ास ध्यान रखने की ज़रूरत है, इसलिए सेहरी में अंडा, आटे की रोटी या पराठा, ताजे़ फल जूस के अलावा ये पावर पैक्ड डिशेज़ ज़रूर खाएं।

बीच से लेकर बर्ड सैंक्चुअरी तक, ये हैं घूमने के लिए पोरबंदर की सबसे बढ़िया जगहें

गुजरात का लगभग हर शहर खूबसूरती के मामले में किसी से कम नहीं है। खासकर समुद्री तट पर मौजूद पोरबंदर सुंदरता और अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए सिर्फ़ राज्य में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में जाना जाता है।

कभी राजाओं का 'दूसरा घर', कभी बना अस्पताल! ताज होटल की बेमिसाल विरासत व इतिहास की कहानी

मुंबई का ताजमहल होटल दुनिया के बेहतरीन होटलों में से एक है। यह लग्‍ज़री और 5 स्‍टार होटल आज भी भारत की भव्‍यता का प्रतीक बना हुआ है। यह होटल जितना लग्‍ज़री है, निर्माण की कहानी भी उतनी ही दिलचस्‍प है।

शहर से आकर बंजर ज़मीन पर बनाया मिट्टी का घर, उगा दिया फूड फॉरेस्ट

आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले में सालों से बंजर पड़ी 13,900 स्क्वायर फीट की ज़मीन को बेंगलुरु के पुष्पा और किशन कल्याणपुर ने अपने बच्चों के साथ मिलकर केवल 3 महीने की कड़ी मेहनत और कोशिशों से न केवल उपजाऊ बना दिया, बल्कि यहाँ बनाया है 'वृक्षावनम' नाम का एक विशाल और सुन्दर फ़ूड फॉरेस्ट भी, जो आज उनके सस्टेनेबल घर की पहचान बन चुका है।

खूबसूरत लोकेशन जो हैं बॉलीवुड फिल्मों की पसंद, आप भी ज़रूर करें एक्सप्लोर

आपको 'बाजीराव मस्तानी' का वह शानदार सेट याद है, 'खूबसूरत' फिल्म में फवाद खान का शाही पैलेस और 'वीर ज़ारा' में प्रीति जिंटा के पहले शॉट में दिखाई गई वह सुन्दर हवेली.. जानिए कहाँ हैं ये लोकेशन!

जिन चीज़ों को भारतीय समझकर आप अभी तक खा रहे थे, वे असल में हैं ही नहीं अपने

भारतीय थाली इतनी विविधता से भरी है कि यह बताना मुश्किल है कौनसी चीज़ कहां से आई। हमारे खाने की जड़ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हैं। आज तक हम जिन्हें इंडियन मानकर खा रहे थे, वे हमारी डिश हैं ही नहीं!

एक चम्मच इतिहास 'दही वड़ा' का!

मुगलों और उनकी लाइफस्टाइल ने हमारे खान-पान पर गहरा असर छोड़ा। ऐसा माना जाता है कि 18वीं शताब्दी में मुगल खानसामों ने पाचन में सुधार के लिए दही, जड़ी-बूटियों और मसालों का इस्तेमाल करके मुगल रसोई में दही वड़े को तैयार किया था। लेकिन कहानियां और भी हैं.. आइए जानते हैं इस चटपटे व्यंजन का खट्टा-मीठा इतिहास।