#SustainableTourism को बढ़ावा देते हुए काम करने वाला मनोज शर्मा का स्टार्टअप #NotOnMap, 200 साल पुराने पुश्तैनी घर को Sustainable Homestay में बदलकर भारत के गाँवों की संस्कृति को लोगों तक पहुंचा रहा है।
इन छुट्टियों में ट्रिप पर जाने का सोच रहे हैं लेकिन साथ जाने वाला कोई नहीं है? तो सोशल मीडिया पर मौजूद इन भरोसेमंद Groups और Pages के ज़रिए बना सकते हैं घूमने का प्लान!
सीजनल फल अपनी डाइट में शामिल करना बहुत अच्छा है क्योंकि उनसे हमें बहुत सारे प्रोटीन-मिनरल मिलते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे फल भी हैं जिनके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते।
हमारे देश में कई ऐसे स्थान थे जो एक समय पर फलते-फूलते थे और आज इनका नामों-निशान नहीं है। न जाने कितने ऐसे हैं जो मिट्टी में छुपे हुए हैं। इनमें से कुछ को ढूंढा जा चुका है और कुछ की तलाश अभी बाकी है।
सस्टेनेबिलिटी, पारम्परिक आर्किटेक्चर और लोकल कारीगरी का एक दुर्लभ नमूना है राजस्थान के अलवर शहर में बना यह मिट्टी का घर, जो Mud Kothi के नाम से मशहूर है। Sketch Design Studio की फाउंडर और युवा डिज़ाइनर शिप्रा सिंघानिया सांघी ने इसे बनाया है।
कोलकाता शहर में बसे ये प्राचीन बंगले छुट्टियां बिताने के लिए अनोखे होमस्टे तो हैं ही, साथ ही ये आपको बिलकुल पुराने ज़माने की फील देंगे। अगर आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं तो यहाँ ज़रूर ठहरें।
छुट्टी पर जाने से पहले अपने प्यारे पालतू जानवर को अलविदा कहना कितना मुश्किल है न? कितना अच्छा हो अगर अपने Pet को लेकर ही घूमने निकल जाएँ..! जानते हैं उन जगहों के बारे में जो पूरी तरह पेट-फ्रेंडली हैं!
बिहार के मशहूर गोलघर की खासियत है कि इसमें एक भी पिलर नहीं है। इसके शिखर पर लगभग तीन मीटर तक सिर्फ़ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। जितना अनोखा इसका आर्किटेक्चर है, उतनी ही दिलचस्प है इसकी कहानी भी!
शहरों में हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोग काफ़ी जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में कहीं खो चुके पारंपरिक भारतीय सामग्रियां भी फिर से प्रचलन में आ गईं हैं, जिनके एक-दो नहीं हज़ारों Health Benefits हैं।