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एक आश्रम और 300 बुज़ुर्ग- प्यार की तलाश में भटकते इस शख़्स की कहानी आपके दिल को छू जाएगी

By प्रीति टौंक

अडूर (केरल) के रहने वाले राजेश थिरुवल्ला ने अपना बचपन ग़रीबी में, माता-पिता के प्यार के बिना ही गुज़ार दिया। लेकिन आज वह एक नहीं, 300 बुज़ुर्गों के बेटे हैं और सबकी ज़िम्मेदारी बड़े प्यार से उठा रहे हैं। पढ़ें, महात्मा जनसेवा केंद्रम के संस्थापक राजेश थिरुवल्ला की कहानी।

अक्टूबर का महीना इन सब्जियों को लगाने के लिए है सबसे अच्छा

By प्रीति टौंक

ठंड की इन पांच सब्जियों के बीज अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही बो दें, तभी तो ठंड आते ही मिलेंगी ताज़ा सब्जियां।

सबसे छोटा शेफ! 2 साल की उम्र से कुकिंग कर रहे हैं सभ्य, बनाना जानते हैं 20 से ज़्यादा डिशेस

By प्रीति टौंक

जयपुर के सात साल के सभ्य गुप्ता बचपन से ही खाना बनाने के शौक़ीन हैं। अपने इंस्टाग्राम पेज mymom_taughtmethis में वह अक्सर अपना कुकिंग टैलेंट दिखाते हैं। उनके मस्ती भरे अंदाज के एक लाख से ज़्यादा फॉलोवर्स हैं।

ब्रेन ट्यूमर और कैंसर होते हुए भी नहीं हारी हिम्मत, टिफ़िन सर्विस शुरू कर चला रहे परिवार

By प्रीति टौंक

कोरोनाकाल में नौकरी जाने और पिछले साल ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का पता चलने के बाद भी, अहमदाबाद के मिलिन वाढेर ने हिम्मत हारने के बजाय अपनी पत्नी के साथ एक नई शुरुआत की है। पढ़ें, उनके टिफिन सर्विस बिज़नेस के बारे में।

किन्नर संगठन की सराहनीय पहल! ज़रूरतमंदों को रु. 1 में नाश्ता व रु. 10 में खिला रहे खाना

By प्रीति टौंक

5,000 से अधिक किन्नरों के एक संगठन ने अपनी कमाई से एक हिस्सा निकालकर, महाराष्ट्र के कल्याण रेलवे स्टेशन के पास एक अनोखा किचन शुरू किया है। यहां वे हर दिन करीबन 500 लोगों को मात्र एक रुपये में नाश्ता और 10 रुपये में खाना खिला रहे हैं।

एक लेखक की 26 साल की मेहनत और 30 लाख पेड़ों से बना ‘भालो पहाड़’

By प्रीति टौंक

78 वर्षीय कमल चक्रवर्ती, पिछले 26 सालों से पुरुलिया( पश्चिम बंगाल) में ‘भालो पहाड़' नाम की एक सोसाइटी चला रहे हैं। जिसके तहत उन्होंने एक भव्य जंगल बनाया है और यहाँ रहते आदिवासियों तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधा पहुंचा रहे हैं।

भारतीयों से अच्छा आर्किटेक्ट कोई नहीं! सदियों तक टिकने वाली इन बॉउंड्री वॉल को ही देखें

By प्रीति टौंक

कंक्रीट या पत्थर से नहीं, मिट्टी या बांस से बनाई जाती हैं ये बॉउंड्री वॉल, फिर भी 100 साल तक टिकने की ताकत रखती हैं।

इंसाफ़ से कम कुछ मंज़ूर नहीं; 20 रुपये के लिए 22 साल लड़ा केस, आखिरकार जीत ली लड़ाई

मथुरा के रहने वाले तुंगनाथ चतुर्वेदी ने सिर्फ़ 20 रुपए के लिए 22 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें 20 रुपए वापस लेने थे, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें भ्रष्टाचार को हराकर इंसाफ़ चाहिए था।

पिता की एक डांट ने चिराग शेट्टी को बनाया था शटलर, देश के लिए जीता ऐतिहासिक मेडल

टोक्यो (जापान) में चल रही वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में भारत के स्टार शटलर चिराग शेट्टी और सात्विक साई राज की जोड़ी ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में पहुंचकर देश के लिए मेंस डबल्स इवेंट का पहला मेडल पक्का कर दिया है।

क्या रोड ट्रिप दिव्यांगजनों का काम नहीं? पढ़ें शिवम् ने कैसे पूरी की लद्दाख की बाइक ट्रीप

By प्रीति टौंक

घरवालों से लेकर दोस्तों तक, सबने कहा कि लद्दाख रोड ट्रिप उनके बस की बात नहीं। लेकिन शिवम् ने ठान लिया था कि पैर नहीं हैं तो क्या, मैं अपने जज्बे के दम पर अपने सभी शौक़ पूरे करूंगा।