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Woman farmer Sangeeta Pingley, Grapes farming

उन्होंने कहा महिलाओं के बस की नहीं खेती; संगीता ने 30 लाख/वर्ष कमाकर किया गलत साबित

यह कहानी है नासिक की एक साहसिक महिला किसान की, जिसने अपने पति और बच्चे की मौत के बाद खुद को खड़ा किया और खेती को अपनी ताकत बना लिया।

“मुझसे कहा जाता था कि एक अकेली महिला खेत नहीं संभाल सकती है, इसलिए मैं कभी सफल नहीं हो पाऊंगी। लेकिन मैं ऐसी बातें कहने वालों को गलत साबित करना चाहती थी।” यह कहना है नासिक के मटोरी गांव में अंगूर की खेती (Grapes farming) करने वाली महिला किसान संगीता पिंगले का। 

जिंदगी ने कदम-कदम पर संगीता का कड़ा इम्तिहान लिया है। पहले उन्होंने अपने बच्चे को खोया और फिर पति की भी मौत हो गई। कुछ साल बाद ससुर भी नहीं रहे, लेकिन संगीता ने हार नहीं मानी। अपने दो बच्चों की परवरिश के लिए उन्होंने खेत की पगडंडियों की तरफ अपने कदम बढ़ा लिए। लोगों ने उन्हें कमजोर करने की कोशिश की। पर उनका इरादा पक्का था। आज वह ट्रैक्टर चलाती हैं, मार्केट का भी काम संभालती हैं और अपने अंगूर की खेती (Grapes farming) से लाखों रुपये भी कमा रही हैं।

संगीता ने द बेटर इंडिया को बताया, “साल 2004 में मैंने अपने दूसरे बच्चे को खो दिया था। अभी उस सदमे से उबरी भी नहीं थी कि 2007 में एक सड़क दुर्घटना में मेरे पति की मौत हो गई। उस समय मैं नौ महीने की गर्भवती थी। सब कुछ बर्बाद हो गया था।”

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“मैं अकेली थी और जीने की इच्छा भी जैसे खत्म हो गई”

संगीता 10 साल तक तो अपने सास-ससुर और रिश्तेदारों के साथ संयुक्त परिवार में रहती रहीं। लेकिन 2017 में पारिवारिक झगड़ों के चलते वह अपने सास-ससुर के साथ अलग हो गईं। 

बदकिस्मती ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। दो महीने बाद ही उनके ससुर की भी बीमारी से मौत हो गई। 39 साल की संगीता उन दिनों को याद करते हुए बताती हैं, “जिन लोगों ने जीवन में हमेशा मेरा साथ दिया, उनको मैंने खो दिया था। अब मैं अकेली थी और जीने की इच्छा भी जैसे खत्म हो गई।”

grapes farming by nasik woman farmer
Sangita inspecting plants at her farm

इस पारिवारिक त्रासदी का मतलब यह भी था कि संगीता को अब अपने ससुर द्वारा छोड़े गए 13 एकड़ के खेत को भी अकेले ही संभालना था।

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उन्होंने कहा, “खेती हमारी आमदनी का एकमात्र जरिया था। कुछ महीने पहले जिन रिश्तेदारों से हम अलग हुए थे, उन्होंने दावा किया कि मैं अकेले खेत और घर नहीं संभाल पाऊंगी। उनके अनुसार खेती करना महिलाओं का काम नहीं है।”

लेकिन संगीता ने उन सभी को गलत साबित कर दिया। आज वह अपनी 13 एकड़ की जमीन पर अंगूर और टमाटर की खेती (Grapes farming) करती हैं। टनों की उपज है और उससे लाखों की कमाई होती है।

समस्याएं खत्म होने का नाम ही नहीं लेती

अपनी कहानी बताते हुए संगीता कहती हैं, “खेती करने के लिए अपने गहनों को गिरवी रखकर कर्ज लिया। चचेरे भाइयों से भी पैसे उधार लिए। मेरे भाइयों ने खेती करने में मेरी काफी मदद की। उन्होंने मुझे अंगूर की खेती (Grapes farming) के हर पहलू से रू-ब-रू कराया। कौन से रसायन का कब इस्तेमाल करना है, पैदावर बढ़ाने के लिए क्या तकनीक अपनानी है और भी बहुत सी चीजें। विज्ञान की छात्रा होने की वजह से मुझे इन्हें सीखने में ज्यादा समय नहीं लगा।”

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अंगूर की खेती (Grapes farming) करते हुए संगीता को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया, “कभी पानी का पंप खराब हो जाता, तो कभी बेमौसम बारिश से नुकसान। कभी फसल में लगे कीड़ों से निपटना पड़ता, तो कभी मज़दूरों की समस्या खत्म होने का नाम नहीं लेती थी।”

वह आगे कहती हैं, “महिलाएं खेती तो संभाल लेती हैं, लेकिन दूसरे ऐसे बहुत से काम हैं, जिन्हें सिर्फ पुरुष ही करते आए हैं- जैसे ट्रैक्टर चलाना, मशीनों की मरम्मत करना, उपकरणों का इस्तेमाल और सामान खरीदने के लिए बाजार जाना। मेरा साथ देने वाला कोई नहीं था। दोनों जिम्मेदारी अब मुझे ही संभालनी थी। मैंने टू व्हीलर और ट्रैक्टर चलाना सीख लिया। कुछ दिन तो ऐसे भी थे, जब ट्रैक्टर ठीक कराने के लिए मुझे पूरा दिन वर्कशॉप में बिताना पड़ा था।”

खेती ने सिखाया लगन और धैर्य

Vineyard at Sangita’s farm.
Vineyard at Sangita’s farm

धीरे-धीरे ही सही लेकिन संगीता के खेत ने फल देने शुरू कर दिए थे। हर साल उनके खेत में 800 से 1000 टन अंगूरों की उपज (Grapes farming) होती है, जिससे वह 25 से 30 लाख रुपये सालाना कमा लेती हैं। उन्होंने बताया कि नुकसान की भरपाई के लिए वह छोटे स्तर पर टमाटर की खेती भी करती हैं।

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आज संगीता की बेटी ग्रेजुएशन कर रही है और बेटा प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है। संगीता ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए अंगूरों (Grapes farming) को निर्यात करने की योजना भी बनाई है। उन्होंने बताया, “इस बार बेमौसम बारिश और खराब मौसम ने मुझे अपना लक्ष्य हासिल करने से रोक दिया। लेकिन अगले सीज़न में ऐसा कर पाऊंगी, इसकी पूरी उम्मीद है।”

संगीता के अनुसार, खेती ने उन्हें लगन और धैर्य रखना सिखाया है। उन्हें गर्व है कि वह उन लोगों के सामने खुद को साबित कर पाईं जिन्हें उनकी काबिलियत पर शक था। वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि मैं अभी भी सीख रही हूं। मुझे बहुत दूर तक जाना है। लेकिन इस बात की खुशी है कि मैं सभी बाधाओं को पार करके सफलता हासिल कर पाई। यह मेरी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का ही नतीजा है।”

मूल लेख- हिमांशु नित्नावरे

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संपादनः जी एन झा

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