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IISC की पूर्व छात्रा ने अपार्टमेंट में बनाया बगीचा, यूट्यूब पर हैं 6.5 लाख फैन!

इकोलॉजी में पीएचडी की डिग्री हासिल कर चुकी एकता कहती हैं, “रिसर्च वर्क अपने-आप में एक बेहद थका देने वाला काम होता है, पर दिन के अंत में मेरा बगीचा मुझे काफी सुकून देता था।”

किसी ने कहा है कि नियमित रूप से अपने बगीचे के पौधों की ऊपरी हिस्से की मिट्टी को ऊपर-नीचे करते रहना चाहिए। बागवानी से जुड़ा हर शख्स आपको यह सलाह जरूर देगा। यूट्यूबर डॉ. एकता चौधरी एक वीडियो में इसका कारण बताती हैं। वह कहती हैं, “यह जड़ों में हवा जाने की अनुमति देता है और जल अवशोषण क्षमता में सुधार करता है। ”

हवा को साफ करने वाले इनडोर पौधों के बारे में एक अन्य वीडियो में, एकता ने नासा के एक वैज्ञानिक द्वारा 1989 के दिलचस्प प्रयोग के बारे में बताया है जिसमें साबित किया गया था कि ये पौधे वायु को शुद्ध करते हैं।

आपको ऐसे कई ब्लॉग और वीडियो मिलेंगे जिसमें ऐसे पौधों के बारे में बताया गया है लेकिन एकता के वीडियो की खास बात यह है कि इसमें इसके पीछे के विज्ञान के बारे में भी बताया गया है। 

उनके वीडियो अलग हैं क्योंकि बागवानी में गहरी दिलचस्पी रखने वाली एकता के पास इकोलॉजी में पीएचडी की डिग्री है और अपने टिप्स के पीछे के विज्ञान के बारे में बता सकती हैं। 

एकता ने मुंबई में अपने 1000 वर्ग फुट के अपार्टमेंट से बागवानी करना शुरू किया। आमतौर पर बागवानी को रिटायर्ड लोगों का शौक माना जाता है। लेकिन एकता ने इसे  युवाओं के लिए दिलचस्प गतिविधि बनाने की पूरी कोशिश की है। ऑर्गेनिक गार्डन पर एक्सपर्ट टिप्स, सुंदर वीडियो और इंटरएक्टिव बातचीत एकता की खासियत है और इसी खासियत की वजह से यूट्यूब पर उनके 6.5 लाख सब्सक्राइबर हैं जबकि इंस्टाग्राम पर 113 हज़ार फॉलोअर्स हैं। 

पिछले दो वर्षों में अपने वीडियो की सफलता को देखकर एकता काफी उत्साहित हैं। एकता ने ‘गार्डन अप’ नामक ब्रांड के साथ एक उद्यम भी शुरू किया है, जहाँ वह सुंदर, टिकाऊ बगीचे के सजावट का समान बेचती है जिसे मुंबई और उपनगरों में महिला कारीगरों द्वारा दस्तकारी की जाती है।

द बेटर इंडिया के साथ बात करते हुए एकता ने खुद के एक समर्पित छात्रा से एक फुल टाइम उद्यमी बनने और पेड़-पौधों के प्रति अपने प्रेम के बारे में बताया है। 

पहाड़ों पर हुआ पौधों से प्यार

एकता हरियाणा की रहने वाली हैं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नोएडा, फरीदाबाद और एनसीआर के अन्य हिस्सों में बिताया। पौधों के साथ उसका संबंध बचपन की यादों से आया है। 

एकता बताती हैं, “मुझे याद है कि मेरे घर पर पूरे दिन 24 घंटे पानी नहीं आता था। दिन के एक विशेष समय पर ही पानी आता था और उस समय मुझे पौधों को पानी देने का काम सौंपा गया था। यह आदत मेरे साथ रही, इसलिए पौधों के बारे में पता चला। हालाँकि, मैं इसे एक अलग व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने के लिए कभी नहीं चाहती थी।”

उन्होंने दिल्ली से लाइफ साइंसेज में ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल की और फॉरेस्ट रिसर्च इन्स्टिटूट से एन्वायर्नमेंट साइंस में मास्टर्स करने वह देहरादून चली गईं। उत्तराखंड के अल्पाइन जंगलों में फील्डवर्क के दौरान उनकी पेड़-पौधों में गहरी दिलचस्पी जागने लगी। उन्होंने अपने हॉस्टल के कमरे में छोटे-छोटे गमलों में पौधे उगाने शुरू कर दिए। पेड़-पौधों का देखभाल करने में उन्हें बहुत शांति मिलती थी और यह उनके लिए ध्यान-चिंतन की तरह था। 

बागवानी और मानसिक स्वास्थ्य पर कई रिसर्च भी सामने आ रही थीं। मानव स्वास्थ्य पर बागवानी के प्रभावों पर किए गए एक मेटा-विश्लेषण में बागवानी से जुड़े सकारात्मक स्वास्थ्य परिणामों के बारे बताया गया। इसमें बताया गया कि बागवानी से अवसाद, चिंता और बॉडी इंडेक्स मास में कमी होती है और साथ ही जीवन में संतुष्टि, जीवन की गुणवत्ता और समुदाय की भावना में वृद्धि होती है। 

चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रखने वाली एकता कहती हैं, “जब पीएचडी के लिए मैं आईआईएससी बेंगलुरु गई तब मैंने बगीचे का विस्तार करना शुरू किया। तब मेरे हॉस्टल के कमरे में करीब 30 पौधे थे और साथ ही मेरे लैब में एक छोटा किचन गार्डन भी था। रिसर्च वर्क अपने-आप में एक बेहद थका देने वाला काम होता है। और एक थका देने वाले दिन के अंत में मेरा बगीचा मुझे काफी सुकून देता था।”

काफी अलग होता है एकता का वीडियो 

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2017 के आसपास, एकता ने शौकिया तौर पर बागवानी के यूट्यूब वीडियो बनाना शुरू किया। वीकेंड पर वह अपने वीडियो बनाती थी जिनमें वह बागवानी पर टिप्स और सुझाव साझा करती थी। उन्हें इस काम में इतना मज़ा आता था कि वह अक्सर सुबह 6 बजे उठा करती थीं ताकि लैब जाकर सही लाइट में पौधों की तस्वीर ले सकें। बागवानी के हर चरण में शामिल विज्ञान के संदर्भ ने उनके वीडियो को इंटरनेट में एक अलग जगह दी और वह काफी लोकप्रिय होने लगीं। 

“हम सभी अपने पौधों की ट्रिमिंग करते हैं, काटते हैं, खाद डालते हैं और कई सारे काम करते हैं। लेकिन हम शायद ही कभी इन सभी प्रक्रियाओं के पीछे के विज्ञान की सुंदरता के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। बागवानी के क्षेत्र में, मैंने इसी अंतर को सामने लाने की कोशिश की है।”

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2019 में इकोलॉजी में पीएचडी पूरी करने के बाद, एकता मुंबई में बस गईं, जहाँ उन्होंने पूरी तरह से गार्डन अप के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया और गार्डन अप को शहरी बागवानी प्रश्नों और आवश्यकताओं के लिए एक-स्टॉप समाधान बनाने की कोशिश की।

“जहां भी खाली जगह है, एक पौधा रखें”

वर्तमान में, एकता के पास लगभग 100 इनडोर पौधे हैं। उनके पास एक किचन गार्डन भी है जिनें करीब 40 किस्म की साग-सब्जियाँ हैं। वह केवल स्थानीय नर्सरियों से पौधे खरीदने की सलाह देती है, क्योंकि उनके पास हमेशा कम केमिकल वाले ताजे पौधे होते हैं। वह बताती हैं, “इसके अलावा, नर्सरी के लोगों को पौधों के बारे में जानकारी होती है।” पौधों के साथ उनके घर की शानदार सजावट भी उनके सभी वीडियो में काफी स्पष्ट रूप से दिखता है।

अपने घर के बगीचे के लिए कलात्मक सजावट की खोज करते हुए, एकता कई कारीगरों, विशेष रूप से महिलाओं के संपर्क में आई, जो चीनी मिट्टी के बर्तन, प्लांटर्स और सजावटी वस्तुओं को एक पेशे के रूप में डिजाइन करती हैं। एकता ने उनके लिए एक मंच प्रदान करने का फैसला किया ताकि वे अपनी रचनाओं को प्रदर्शित कर सकें और मासिक आय अर्जित कर सकें। इस प्रकार गार्डन अप शॉप का जन्म हुआ।

IISC SCIENTIST
पेड़ों के साथ रिश्ता बनाना बेहद ज़रूरी है।

एकता मानती हैं कि कोविड-19 के कारण उनके काम पर प्रभाव पड़ा है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि जून में वह अपने उत्पादों के ज़रिए नुकसान की भरपाई कर सकेंगी। वह सामग्री की गुणवत्ता और टिकाऊपन को लेकर काफी सचेत रहती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि उनकी पैकेजिंग में कम से कम प्लास्टिक का इस्तेमाल हो।

एकता के पास अब गार्डन अप के लिए पांच लोगों की एक ऑपरेटिंग टीम है। उनका लोकप्रिय यूट्यूब  वीडियो और व्यावसायिक उद्यम से उनका और उनकी टीम का पालन ठीक से हो जाता है। वह पूरे भारत में शहरी बागवानी पर ऑनलाइन और ऑफलाइन वर्कशॉप भी आयोजित करती है। बागवानी में गहरी दिलचस्पी रखने वाली एकता ने इन क्लास को इस विश्वास के साथ शुरू किया कि बागवानी के साथ सकारात्कता जुड़ी होती है। वह यह भी मानती हैं कि इससे लोगों को अपने स्वयं के घर बनाने में मदद मिल सकती है।

दरअसल, बहुत सारे मनोवैज्ञानिक अवसाद या चिंता विकार वाले रोगियों को बागवानी की सलाह देते हैं। कोलकाता के एक काउंसलर, डॉ. ए चक्रवर्ती कहते हैं, “गार्डन तनाव को दूर करने में मदद करता है और आपके मन में संतुष्टि की भावना पैदा करता है।”

IISC SCIENTIST

घर के बने खाद के साथ अपने पौधों का पोषण करें

एकता घर पर खाद बनाने की  सलाह देती हैं। वह कहती हैं, “एक टेराकोटा पॉट में, अपने रसोई घर से गीले कचरे को दही (स्वस्थ बैक्टीरिया के लिए) और कुछ मिट्टी के साथ मिलाएं। आपकी खाद कुछ ही हफ्तों में तैयार हो जाएगी। किसी भी गंध को दूर रखने के लिए कभी-कभी कुछ कोकोपिट या सूखे पत्ते मिलाएं।”

एकता मानती हैं कि आपके सभी कीट प्रबंधन के लिए नीम का तेल सबसे बढ़िया है। नीम के तेल के घोल के विवेकपूर्ण उपयोग ने उसे अब तक के सभी कीट संक्रमणों को रोकने में मदद की है!

शहरी बागवानी में शुरुआती लोगों के लिए, एकता सलाह देती है, “कम रख रखाव वाले इनडोर पौधों की एक जोड़ी के साथ शुरू करें। जब आप पौधों के बारे में एक सामान्य जानकारी विकसित करते हैं – जैसे कि पानी कब देना है, पौधे को कितनी धूप की जरूरत है या आपको कितनी बार खाद डालनी चाहिए – तो धीरे-धीरे बाहरी पौधों और किचन गार्डनिंग की ओर बढ़ें।”

पौधों की कटिंग से इंडोर पौधे लगा रहीं हैं।

जब हमने उनसे हमारे पाठकों के लिए अन्य सुझाव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा – “जहां भी खाली जगह है, एक पौधा रखें। मेरी शहरी बागवानी नीति बहुत सरल है। ”

मूल लेख- SAYANTANI NATH

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Written by पूजा दास

पूजा दास पिछले दस वर्षों से मीडिया से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य और फैशन से जुड़े मुद्दों पर नियमित तौर पर लिखती रही हैं। पूजा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर्स किया है और नेकवर्क 18 के हिंदी चैनल, आईबीएन7, प्रज्ञा टीवी, इंडियास्पेंड.कॉम में सक्रिय योगदान दिया है। लेखन के अलावा पूजा की दिलचस्पी यात्रा करने और खाना बनाने में है।

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