उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के नारायणपुर गांव में रहने वाले तीन भाइयों, श्वेतांक पाठक, रोहित आनंद पाठक, मोहित आनंद पाठक और उनके चाचा, जलज जीवन पाठक ने गांव वालों की मदद करने के लिए, अपनी-अपनी नौकरी छोड़कर, ‘उदेस पर्ल फार्म्स’ की स्थापना की। यहाँ मोती पालन के ज़रिए वे, 180 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
गुजरात, वडोदरा के राजा चड्ढा ने गर्मियों में अपने घर को ठंडा रखने के लिए, अपनी छत पर वाटर लिली, ऐवलैंच लिली, पर्पल जॉय और अडेनियम जैसे 300 से ज़्यादा पौधे उगाये हैं।
ओडिशा में बारगढ़ जिले के गोड़भगा में रहने वाली जयंती प्रधान एक प्रगतिशील महिला किसान हैं। जानिए कैसे, दूसरे किसानों के खेत से मिली बेकार पराली से उन्होंने अपने मशरूम की खेती को आगे बढ़ाया।
महाराष्ट्र के सोलापुर में रहने वाले गौरव जक्कल और उनका परिवार पिछले 50 सालों से गार्डनिंग कर रहा है। यह टेरेस गार्डन उनकी दादी, लीला ने शुरू किया था, जो आज एक मशहूर नर्सरी का रूप ले चुका है।