छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) के पातालकोट निवासी, सुकनसी भारती ने अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने और पर्यावरण को बचाने के उदेश्य से, पत्तों से कटोरी (दौना) बनाना सीखा। आज वह, आस-पास के गावों और होटलों में अपने दौने बेच रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के अब्दुल करीम को बचपन से ही पारंपरिक पढ़ाई पसंद नहीं थी। अब, उन्होंने ऐसे डिवाइस बनाए हैं, जिनसे गाँववालों की ज़िंदगी बहुत आसान हो गई है।
31 वर्षीय बकुल खेतकडे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उन्होंने अपनी IT नौकरी से ब्रेक लिया और शौक के लिए Mandala Art बनाना सीखा। आज उनकी वही कला, उनका काम बन चुकी है, जिसे वह बड़ी ख़ुशी से कर रही हैं।
भारतीय वन सेवा की अधिकारी कल्पना के और एम गीताजंलि ने काले हिरणों को बचाने के उपाय खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने दो साल के कार्यकाल में, इन दोनों अधिकारियों ने काले हिरण के संरक्षण के लिए कई पहल किए। उनके प्रयासों को आईएफएस एसोसिएशन ने भी मान्यता दी थी।
IIM-कलकत्ता से MBA ग्रेजुएट आशीष अग्रवाल ने, दिल्ली के प्रदूषण को कम करने और बिना ज्यादा पूंजी लगाए, लोगों को EV मुहैया कराने (E Scooter On Rent) के उदेश्य से VA-YU की शुरुआत की है।
Rajkumari Ratnavati Girls School को न्यूयॉर्क की डायना केलॉग ने डिज़ाइन किया है। राजस्थान में महिला साक्षरता दर महज 32% है। ऐसे में जैसलमेर के कनोई गाँव का यह स्कूल लड़कियों को एक नई उमंग दे रहा है।
पहले जहां पारंपरिक खेती से घर का गुजारा मुश्किल से चलता था, वहीं आज अपनी मेहनत और कुछ नए प्रयासों की बदौलत लाखों कमा रहे हैं, महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसान तुकाराम गुंजल।