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9 To 9 की IT नौकरी छोड़कर, ऑनलाइन सीखा Mandala Art और शुरू कर दिया अपना बिज़नेस

Mandala Art

31 वर्षीय बकुल खेतकडे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उन्होंने अपनी IT नौकरी से ब्रेक लिया और शौक के लिए Mandala Art बनाना सीखा। आज उनकी वही कला, उनका काम बन चुकी है, जिसे वह बड़ी ख़ुशी से कर रही हैं।

हममें से कई लोग हैं, जो सुबह से रात तक ऑफिस के काम में उलझे रहते हैं। कभी-कभी हम अपने परिवार के लिए भी समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में हम ना कुछ नया सीख पाते हैं और ना ही लंबी छुट्टियों पर जा पाते हैं। चूँकि, नौकरी हमारे जीवनयापन के लिए इतनी जरूरी होती है कि हम इससे पीछा भी नहीं छुड़ा सकते। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने लिए ऐसा काम खोज निकालते हैं, जिससे उन्हें ख़ुशी और समय तो मिलता ही है। इसके साथ ही, उनकी आय का ज़रिया भी बन जाता है। 31 साल की सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बकुल खेतकडे ने भी अपने लिए कुछ ऐसा ही काम खोज निकाला। वह एक मंडला आर्टिस्ट हैं और ऑनलाइन अपने Mandala Art बेचती हैं। मंडला पेंटिंग बनाना, उनके लिए मेडिटेशन जैसा है। लेकिन आज से तीन साल पहले उनका लाइफस्टाइल बिल्कुल अलग था। 

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बकुल खेतकडे

तीन साल पहले, वह एक जानी-मानी IT कंपनी में काम करती थीं। द बेटर इंडिया से बात करते हुए वह बताती हैं, “मैं घर से दूर मैंगलोर में रहती थी। मेरा रूटीन कुछ ऐसा हो गया था कि मैं घरवालों से फ़ोन पर बात करने का समय भी नहीं निकाल पाती थी। इसके बाद दिसम्बर 2018 में मैंने नौकरी से कुछ समय का ब्रेक लेने का फैसला किया।” बकुल ने छह सालों तक दो IT कंपनियों के साथ काम किया। वह बताती हैं, “मैं अच्छे पैसे तो कमा रही थी, लेकिन अपने लिए बिल्कुल समय नहीं निकाल पाती थी।”

सोशल मिडिया से सीखा मंडला पेंटिंग्स बनाना 

बकुल ने नौकरी छोड़ने के बाद, योग और ध्यान करना शुरू किया। उन्होंने सोशल मिडिया में Mandala Art और इनसे बनी पेंटिंग्स देखीं, जो उन्हें काफी पसंद आई। बकुल बताती हैं, “हालांकि मैं कभी पेंटिंग और आर्ट से नहीं जुड़ी थी। हां, बचपन में थोड़ी-बहुत पेंटिंग किया करती थी, लेकिन पढ़ाई के कारण वो भी छूट गया था।” उन्होंने Mandala Art ऑनलाइन देख-देख कर ही सीखा। उनकी रूचि इसमें इतनी बढ़ गई कि वह हर दिन कुछ ना कुछ ड्रॉ करती रहतीं। 

Mandala Art के बारे में बात करते हुए वह कहती हैं, “मंडला, जिसका संस्कृत में अर्थ होता है चक्र। मंडला पेंटिंग्स भी एक चक्र को दर्शाती हैं, जो एक बिंदु से शुरू होती हैं। एक बार आप इसे बनाना शुरू करें, तो आपका ध्यान कहीं और नहीं जाता।  इसलिए ऐसा कह सकते हैं कि यह एकाग्रता को भी बढ़ाता है।”

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शौक़ को बनाया बिज़नेस 

रेगुलर प्रैक्टिस से बकुल धीरे-धीरे अच्छी पेंटिंग्स बनाने लगीं। उनके दोस्त और घरवालों ने भी इसे काफी पसंद किया। वह बताती हैं, “मैंने अपनी मंडला पेंटिंग्स जब अपने घर में लगाई, तो कई लोगों ने मेरी तारीफ़ की। साथ ही कुछ लोगों ने तो मुझे, उनके लिए भी एक पेंटिंग बनाने को कहा, जिससे मैं काफी प्रेरित हुई।”  उन्होंने अपनी मंडला पेंटिंग्स को सोशल मिडिया प्लेटफॉर्म पर डालना शुरू किया। ऑनलाइन भी उनकी पेंटिंग और डिज़ाइन को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। 

साल 2020 से उन्होंने, इसे अपना बिज़नेस बनाने का फैसला किया। वह कहती हैं, “यह एक ऐसा बिज़नेस था, जिसमें मुझे कुछ ज्यादा पूंजी नहीं लगानी पड़ी। बस कुछ कैनवास, ब्रश और कलर के साथ मैंने अपना काम शुरू कर दिया। शुरुआती दिनों में ऑर्डर्स भी ज्यादा नहीं आते थे। चूँकि मुझे अपने काम से ख़ुशी मिल रही थी, इसलिए मैंने इसे बनाना जारी रखा।”  उन्होंने अभी तक मंडला पेंटिंग कहीं से सीखी नहीं हैं। वह फेसबुक और इंस्टाग्राम के ज़रिए ही नई-नई डिज़ाइन सीखती हैं और उनपे काम करती हैं। 

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समय के साथ मिली सफलता 

उनका मानना है कि किसी भी काम को सफल बनाने में थोड़ा समय और मेहनत लगानी पड़ती है। अगर आप अपने काम में माहिर हैं, तो आपको सफलता ज़रूर मिलेगी। ऐसा ही कुछ उनके साथ भी हुआ। फ़िलहाल, उनके पास 10 पेंटिंग्स के आर्डर हैं और पिछले महीने भी उन्होंने आठ पेंटिंग्स बेंची। वह 12 इंच की एक पेंटिंग 1200 रुपये, वहीं 27 इंच की पेंटिंग को तक़रीबन छह से सात हजार में बेचती हैं। इसके अलावा, उन्हें अमरावती में ही दो वॉल पेंटिंग के प्रोजक्ट भी मिले थे। 

आने वाले दिनों में उन्हें और ऑर्डर्स मिलने की उम्मीद है। अगर आप भी उनकी खूबसूरत मंडला पेंटिंग देखना या आर्डर करना चाहते हैं तो उन्हें इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फॉलो कर सकते हैं।  

संपादन – अर्चना दुबे

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