ध्रुव और रोहन का बचपन पढ़ाई के साथ-साथ रोहन के दादाजी के गैराज में भी बीता। जहां वे दोनों पुरानी चीजों को नया रूप देते थे और वहीं से उन्हें आने वाली पीढ़ी के लिए यह 'आश्रम' शुरू करने की प्रेरणा मिली!
पेशे से इंजीनियर शैलेन्द्र तिवारी और आनंद कुमार ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जिसकी सहायता से किसानों को पता चल जाता है कि आने वाले 4-5 दिनों में उनके खेत के आसपास का मौसम कैसा होगा।
धनंजय अभंग ने ऐसा बायोगैस प्लांट बनाया है जिसे जगह के हिसाब से बनाकर लगाया जा सकता है। अच्छी बात ये है कि इसमें प्रोसेसिंग के दौरान कोई बदबू नहीं आती है!
गाँव में ब्लॉक प्रिंट का काम करने वाले लोग ख़त्म हो चुके थे और युवा इसे करना नहीं चाहते थे। लेकिन मुहम्मद युसूफ अपने अब्बा से मिली विरासत को इस तरह खोना नहीं चाहते थे। उन्होंने ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए वह इस कला को मरने नहीं देंगे।
81 वर्षीय गोपाल भिसे ने ज़िंदगी की थकान को कभी खुद पर हावी होने नहीं दिया। उन्होंने छोटे किसानों के लिए साइकिल से जुताई मशीन बनाई, जिससे उनके जैसे किसानों को हल व बैल का एक सस्ता विकल्प मिल गया।