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मोईनुद्दीन चिश्ती

देशभर के 250 से ज्यादा प्रकाशनों में 6500 से ज्यादा लेख लिख चुके चिश्ती 22 सालों से पत्रकारिता में हैं। 2012 से वे कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर कलम चला रहे हैं। अब तक उनकी 10 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। पर्यावरण संरक्षण पर लिखी उनकी एक पुस्तक का लोकार्पण संसद भवन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों हो चुका है।

पानी पर बसे हैं घर, चम्बा के इस गाँव में पर्यटन का अलग है अंदाज!

‛नॉट ऑन मैप’ में गांवों की वही तस्वीर टूरिस्ट को दिखाई जाती है जैसा गाँव होता है, कुछ भी गलत या जो नहीं है उसे दिखाने की कोशिश कभी नहीं की जाती।

पुरानी जींस को फेंकिए मत, इन्हें दीजिये, यह बस्ते और चप्पल बनाकर गरीब बच्चों को बांटेंगे!

गांवों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं, यह किट उन बच्चों के लिए विशेष तौर पर डिज़ाइन किया गया है।

इस किसान की बदौलत शिमला ही नहीं, अब राजस्थान में भी उगते हैं सेब!

यह कहानी हरिमन शर्मा नाम के उस जुनूनी किसान के जोश और समर्पण की है, जिनकी खोज को पहले सिरे से नकार दिया गया, पर जब वे सफल हुए तो जिन्होंने उन्हें नकारा, उन्हीं ने माथे पर भी बिठा लिया।

पढ़िए 76 साल की इस दादी की कहानी जिसने 56 की उम्र में की बीएड, खोला खुद का स्कूल!

''माँ के देहांत के कारण बचपन में ही नन्हें कंधों पर रसोई और घर के कामों की जिम्मेदारी आ गई। 15 वर्ष की उम्र तक स्कूल का दरवाजा नहीं देखने वाली इस महिला के लिए काला अक्षर भैंस बराबर था। ज़िद करते हुए नन्हीं बच्चियों के साथ साड़ी पहने हुए ही स्लेट पकड़कर अक्षर ज्ञान लिया। 18 वर्ष की होने तक शादी कर दी गई। ससुराल में पढ़ाई-लिखाई पर पाबंदी के बावजूद पढ़ाई का क्रम जारी रखा। प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर घर पर पढ़ाई कर किसी तरह ग्रेजुएशन और फिर अपनी बेटी के साथ ही बीएड किया। आज खुद का स्कूल चला रही है। शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल बनकर उभरी है।''

विकलांग, नेत्रहीन समेत हज़ारों लोगों को तैरना और डूबते को बचाना सिखाया है इस गोताखोर ने!

अभी दाऊलाल की सांसें नॉर्मल भी नहीं हुई थी कि उन्हें फिर से छलांग लगानी पड़ी। वे जहां कूदे, वहां जल विभाग ने एक बड़ा पाइप डाल रखा था। उनका घुटना उस पाइप से जा टकराया। वे दर्द से कराह उठे, देखा पानी लाल हो रहा है। यह उनका ही खून था।

वकालत छोड़, ग़रीब किसानों के लिए उगाने लगे बीज; बनाया उत्तर-प्रदेश का पहला बीज-गोदाम!

दर्शनशास्त्र में एमए और एलएलबी करने वाले सुधीर अब तक 35 से ज्यादा फसलों के उन्नत बीज विकसित कर चुके हैं। यूपी का पहला ग्रामीण बीज गोदाम लगाने वाले सुधीर के विकसित किए बीज कई राज्यों के किसान उपयोग कर रहे हैं। कई कृषि संस्थान और कम्पनियांं उनसे बीज खरीदती है। देशभर से किसान खेती सीखने उनके पास आते हैं।

डेनमार्क के प्राइमरी स्कूलों में दिया जाता है राजस्थान के इस गाँव का उदाहरण!

''एक वक्त था जब हमारे गाँव की पहाड़ियां हरियाली और सुंदरता में कश्मीर की वादियों जैसी थी। आमजन के लालच, अंधाधुंध वनौषधियों के संग्रहण, वनों द्वारा प्राप्त उपज के अतिदोहन, इमारती लकड़ी की कटाई और बेतरतीब ढंग से मार्बल खानों की खुदाई, अनियंत्रित पशु चराई के कारण यह पहाड़ियां खाली होती चली गई। मैं सोचता हूँ कि कड़े से कड़े कानून भी इस तरह के प्राकृतिक विनाश को रोकने में कारगर साबित नहीं हो सकते।''

गाँव से 5 किमी दूर पैदल जाया करते थे पढ़ने, अब अमेरिका में बने नामी वैज्ञानिक!

''मैंने भारत सरकार से वादा किया है कि यदि हमारी तकनीक से बने खाद को सरकार लागत मूल्य से आधे पर किसान को उपलब्ध करवाती है तो हम तकनीक का लाइसेंस उनको बिना किसी शुल्क लिए प्रदान करने का प्रयास करेंगे।''

इस शिक्षक की कोशिशों से आज पानी से भरी है राजस्थान की नौ चौकी झील!

श्रीमाली ने सुझाव दिया कि पूरा ढेर नहीं हटाकर बीच में से एक झिरी निकाल दी जाए, ऐसा करने में कोई भारी बजट भी नहीं लगेगा, साथ ही जनधन की कोई हानि का ख़तरा भी नहीं होगा। स्थानीय प्रकृति प्रेमियों के दबाव में प्रशासन ने सुझाव को मंजूरी दे दी।