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मुंबई: घर-घर से इकट्ठा किये प्लास्टिक से बनेंगी अब पब्लिक पार्क के लिए बेंच!

इस साल मुंबई में सवा लाख से भी ज़्यादा लोगों ने प्लास्टिक वेस्ट इकट्ठा करके ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ टीम को दान किया है!

क्सर हम सोचते हैं कि आखिर एक पॉलिथीन या फिर एक प्लास्टिक की बोतल से क्या बिगड़ जाएगा? लेकिन सालों से हमारी इसी एक सोच ने आज देश और दुनिया में प्लास्टिक के कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े कर दिए हैं। धीरे-धीरे यह प्लास्टिक हमारे पर्यावरण की सांसे खत्म कर रहा है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, साल 1950 के बाद 8.3 बिलियन टन प्लास्टिक उत्पन्न हुआ है। इसमें से लगभग 60% प्लास्टिक या तो लैंडफिल में जाता है या फिर पर्यावरण में। अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन होगा जब हमारे प्राकृतिक स्त्रोत को यह प्लास्टिक पूरी तरह खा जायेगा।

इन डरावने आंकड़ों के बीच अच्छी बात यह है कि आम जन अब इस बात की गंभीरता को समझते हुए इस मुद्दे पर काम करने के लिए साथ में आगे आ रहे हैं। इसका श्रेय कहीं न कहीं उन लोगों, संगठनों और संस्थाओं को जाता है जो बिना रुके और पीछे हटे लगातार आम नागरिकों को जागरूक कर रहे हैं।

मुंबई के ही रहने वाले शिशिर जोशी द्वारा शुरू किया गया संगठन, ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ भी इसी फ़ेहरिस्त में शामिल होता है।

‘प्रोजेक्ट मुंबई’ एक पहल है नागरिकों, प्रशासन और प्राइवेट संगठनों को साथ में जोड़कर, आम मुद्दों के हल तलाशने की और फिर शहर में इसे लागू करने की। यह एक तरह का प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ लोग साथ में विचार-विमर्श करते हैं, रिसर्च करते हैं और फिर समाधानों को लागू करते हैं। उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर मुंबई देना है, जो अपने शहर के प्रति जागरूक हो और ज़िम्मेदार हो।

शिशिर कहते हैं,

“मुंबई शहर में हर कोई अपने शहर के लिए कुछ न कुछ करना चाहता है। आम लोगों से लेकर प्रशासन तक और फिर प्राइवेट सेक्टर भी। लेकिन बहुत-सी वजहों से अक्सर ये लोग साथ नहीं आ पाते। ऐसे में, ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ इन तीनों के बीच एक सेतु, एक चेन का काम करता है ताकि बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकें।”

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शिशिर ने लगभग दो दशक तक पत्रकारिता के क्षेत्र में काम किया। वह हमेशा से सिटिज़न जर्नलिज्म से जुड़े रहे। इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी और आज तक जैसी मीडिया कंपनियों  के साथ काम करते हुए, उन्होंने देश के कई शहरों में सिटिज़न जर्नलिज्म पर वर्कशॉप भी किये। इसी दौरान उन्हें ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ शुरू करने का ख्याल आया।

‘प्रोजेक्ट मुंबई’ में शिशिर के साथ फ़िलहाल 7 लोगों की टीम है, जो ऐसे मुद्दों पर काम करती है, जिनका असर आम लोगों की ज़िन्दगी में बड़े स्तर पर हो। हर मुद्दे पर काम करने के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट्स चलाये जाते हैं। हर एक प्रोजेक्ट के लिए एडवाइजरी बॉडी रखी गयी है, जो उन्हें ज़रूरी सलाह और सपोर्ट देती है। इन प्रोजेक्ट्स की फंडिंग में उन्हें प्राइवेट सीएसआर फंड्स से मदद मिलती है।

पर उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं आम मुंबईकर, जो वॉलंटियरिंग करके इन अभियानों को सफल बना रहे हैं।

‘मुंबई के लिए कुछ भी करेगा,’ उनका स्लोगन है और यही एक वाक्य काफ़ी है यहाँ हर बच्चे, युवा, महिलाओं और बुजूर्गों के मन में जोश भरने के लिए।

अपने शहर के लिए कुछ भी करेंगे

अपने इन अभियानों की शुरुआत उन्होंने शहर के 36 रेलवे स्टेशनों पर साफ़-सफाई करके सौंदर्यीकरण करने की पहल से की। और आज यह संगठन जल्लोश-क्लीन कोस्ट, म्युनिसिपल हॉस्पिटल प्रोजेक्ट, स्माइलिंग स्कूल प्रोजेक्ट, प्लास्टिक रीसायकलोथोन जैसे कई अलग-अलग अभियान चला रहा है।

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इनमें से ‘जल्लोश-क्लीन कोस्ट,’ ‘बस कर मुंबईकर- एंटीलिटरिंग,’ और ‘प्लास्टिक रीसायकलोथोन’ स्वच्छता को केंद्र में रखकर शुरू किये गये अभियान हैं।

“जल्लोश क्लीन कोस्ट के ज़रिए हम लोगों के साथ मिलकर समुद्र तटों की साफ़-सफाई पर काम करते हैं तो ‘बस कर मुंबईकर’ का उद्देश्य लोगों को जगह-जगह कचरा फेंकने से रोकना है। बाकी प्लास्टिक रीसायकलोथोन’ का कॉन्सेप्ट कुछ अलग है। इसमें हम मुंबई के निवासियों को अपने घरों से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा करके हमें दान करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं,” उन्होंने बताया।

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साल 2018 से शुरू हुए इनके अभियान ‘प्लास्टिक रीसायकलोथोन’ को काफ़ी सफलता मिली। पहले साल में इस ड्राइव में लगभग 80, 000 लोगों ने प्लास्टिक वेस्ट डोनेट किया था, तो वहीं इस साल सवा लाख से भी ज़्यादा लोग इस पहल से जुड़े हैं।

पिछले साल इकट्ठे किये हुए वेस्ट को रीसायकल करके ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ ने बीएमसी पार्क में लगाने के लिए बेंच बनवायीं हैं। इस साल भी उन्होंने काफ़ी मात्रा में प्लास्टिक इकट्ठा किया है। इस प्लास्टिक से वे रोज़ इस्तेमाल होने वाली ज़रूरी चीज़ें जैसे पेन, नोटबुक, कचरे के लिए बड़े डस्टबिन और बेंच आदि बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं।

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उन्होंने आगे बताया है कि जिन भी लोगों ने प्लास्टिक डोनेशन में भाग लिया, प्रोजेक्ट मुंबई टीम ने उन सभी लोगों को बदले में कपड़े का बैग दिया है। इसके पीछे उनका मकसद लोगों को पॉलिथीन छोड़कर कपड़े के थैले इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना है। ताकि अगली बार जब आप सब्ज़ी खरीदने या अन्य कोई शॉपिंग करने निकले तो घर से कपड़े का बैग लेकर जाएँ।

इस प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए उन्होंने तय किया है कि अब वे हर महीने घरों से प्लास्टिक वेस्ट इकट्ठा करने के लिए ड्राइव करेंगे। इसके साथ ही उनकी कोशिश है कि मुंबई की तरह इस पहल को अन्य शहरों में ले जाया जाए। क्योंकि उनका सिद्धांत बहुत क्लियर है – लोग, उद्देश्य और सकारात्मक बदलाव!

यदि आप मुंबईकर हैं तो ‘प्रोजेक्ट मुंबई’ की टीम से जुड़ने के लिए उनकी वेबसाइट देख सकते हैं। बाकी यदि आप ऐसा कुछ अपने शहर में शुरू करना चाहते हैं और कोई सलाह चाहते हैं तो 9653330712 पर संपर्क करें। आप उन्हें info@projectmumbai.org पर मेल भी कर सकते हैं!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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