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प्लास्टिक-फ्री शादी में दिया ‘सेव फ़ूड’ का संदेश; किसानों के लिए लगवाई आविष्कारों की प्रदर्शनी!

भारत में शादी-ब्याह का समारोह न सिर्फ़ दूल्हा-दुल्हन के लिए, बल्कि उनके परिवारों के साथ-साथ नाते-रिश्तेदारों के लिए भी बहुत अहम और ख़ास होता है। शादी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी रस्म को भव्यता से करने की चाह रखने वाले परिवार शादियों में लाखों-करोड़ों रूपये तक खर्च करते हैं। पिछले दिनों हुई अंबानी परिवार की शादी का तो निमंत्रण पत्र तक चर्चा का विषय रहा। क्योंकि देश के सबसे अमीर परिवार के सिर्फ़ एक कार्ड की कीमत 2 लाख रूपये थी।

5 रूपये से लेकर 2 लाख रूपये तक, अलग-अलग कीमतों के कार्ड आप छपवा सकते हैं। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि शादी हो जाने के बाद ये निमंत्रण पत्र सिर्फ़ एक रद्दी बनकर रह जाते हैं। शादी के साल-दो साल बाद तो लोगों को आपकी सालगिरह भी सोशल मीडिया पर देखकर याद आती है। ऐसे में, गुजरात के इस युवक ने अपनी शादी में ऐसा कुछ किया कि अनगिनत लोगों ने उसकी शादी का कार्ड आज भी सहेज कर रखा हुआ है और तो और लोग उन्हें फ़ोन करके उनकी शादी के कार्ड की तस्वीरें और पीडीऍफ़ मंगवाते हैं।

गुजरात के अहमदाबाद में रहने वाले 30 वर्षीय चेतन पटेल एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और सृष्टी संगठन से जुड़े हुए हैं। इस संगठन के तहत वे ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के उत्थान के लिए कार्य करते हैं।

चेतन पटेल

गुजरात के पंचमाल जिले में कंडाच गाँव के एक किसान परिवार से आने वाले चेतन ने प्रारंभिक शिक्षा गाँव के सरकारी स्कूल से की। इसके बाद, उन्होंने मंगल भारती ग्राम विद्यापीठ (संखेडा) में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही वे सृष्टी संगठन के संपर्क में आये थे और आज उन्हें सृष्टी के साथ काम करते हुए लगभग 11 साल हो गये।

“यहाँ तक पहुँचने के लिए मैंने बहुत संघर्ष किया। बचपन से ही मैं खेतों में घरवालों की मदद करता था और उसके साथ-साथ पढ़ाई में भी मुझे बहुत दिलचस्पी थी। मेरी लगन को देखते हुए मेरे परिवार ने भी साथ दिया।” और आज भी उनका परिवार उनके हर एक फ़ैसले में उनका साथ देता है।

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सृष्टी में ‘शोधयात्रा कोऑर्डिनेटर’ के पद पर कार्यरत चेतन का मानना है कि समाज सुधार की वकालत करने वाले लोग ही, अक्सर इन सुधार कार्यों को अपने व्यवहारिक जीवन में नहीं अपना पाते हैं। सब चाहते तो हैं कि समाज में कोई गाँधी हो, पर साथ ही वह गाँधी उनके अपने घर में न होकर किसी दूसरे के घर में होना चाहिए।

“लेकिन अगर हमको बदलाव लाना है, तो हमें खुद के व्यवहार में इस सोच को शामिल करना होगा। सृष्टी के ज़रिए मैं बहुत से मुद्दों पर काम करता हूँ, पर मैं उन्हें अपने ही जीवन में न उतारूँ, तो क्या फायदा? इसलिए मैं चाहता था कि मेरी अपनी शादी लोगों के लिए बदलाव की मुहीम बनें और इसकी शुरुआत मैंने शादी के कार्ड से ही की,” द बेटर इंडिया से बात करते हुए चेतन पटेल ने बताया।

25 नवंबर 2017 को चेतन की शादी उनकी मंगेतर आवृत्ति से हुई। पर ऐसी निराली शादी आपने शायद ही कहीं और देखी और सुनी हो!

अपनी पत्नी आवृत्ति के साथ चेतन पटेल

उनकी शादी का कार्ड ही लगभग 20 पन्नों का था। जिसमें शुरुआत के दो पन्नों में उनकी शादी समारोह का ब्यौरा था और बाकी पन्नों में उन्होंने कृषि से संबंधित, किसानों के लिए हितकारी जानकारी और अलग-अलग ग्रासरूट्स इनोवेटर्स व उनके इनोवेशन आदि के बारे में छपवाया।

“सबसे पहले मैंने उसमें अनाज के भंडारण के लिए देशी तरीकों के बारे में लिखवाया, जैसे कि गेंहूँ में नीम के पत्ते, पुदीने के सूखे पत्ते आदि डालकर रखना। इस तरह के लगभग 30-40 पारम्परिक और जैविक तरीकों के बारे में लिखवाया। अगर किसान इन तरीकों का इस्तेमाल करें तो उन्हें किसी केमिकल की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”

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इस बारे में आगे बात करते हुए उन्होंने कहा, “दूसरा हम अक्सर देखते हैं कि फसल में कई तरह के कीड़े लग जाते हैं। इनसे कैसे बचा जाये, इसके लिए भी मैंने अलग-अलग प्राकृतिक पद्धितियों के बारे में प्रिंट कराया। साथ ही, पशुपालन में ज़रूरी कुछ तकनीकों के बारे में लिखा।”

चेतन की शादी के कार्ड का एक पन्ना

चेतन के ज़्यादातर नाते-रिश्तेदार किसी न किसी तरीके से कृषि पर आधारित हैं। ऐसे में उनकी शादी का कार्ड इन लोगों के लिए अच्छी जानकारी का स्त्रोत है और जो लोग खुद खेती नहीं करते, उन्होंने इस कार्ड को ज़रूरतमंद किसानों तक पहुँचाया।

चेतन बताते हैं कि उनकी शादी को लगभग डेढ़ साल बीत चूका है और अब भी लोग उन्हें फ़ोन करके कार्ड का पीडीऍफ़ भेजने के लिए कहते हैं। अब तक यह कार्ड लगभग 3, 000 लोगों तक पहुँच चूका है!

शादी का कार्ड ही नहीं, शादी भी रही अनोखी

उनकी शादी का कार्ड ही नहीं, बल्कि उनकी शादी भी बहुत अलग और अनोखी थी। उनकी शादी में आने वाले सभी लोगों के लिए यह बहुत नए तरीके की शादी थी। जहाँ किसी डीजे, म्यूजिक सिस्टम की बजाय ग्रामीण इलाकों के लिए इनोवेशन करने वाले लगभग 25 ग्रासरूट्स इनोवेटर्स के आविष्कारों की प्रदर्शनी लगवाई गयी।

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ग्रासरूट्स इनोवेटर्स की प्रदर्शनी

उनकी शादी में अधिकतर किसानों और ग्रामीण लोगों को ही आना था। इस तरह से यह पहल न सिर्फ़ आम किसानों के लिए फायदेमंद थी, बल्कि इन आविष्कारकों के लिए भी अच्छा मौका रहा अपना हुनर दिखाने का।

“शहर में कहीं कृषि मेला लगे या फिर कोई प्रदर्शनी लगी हो, तो किसानों के लिए अपने काम को छोड़कर जाना मुश्किल हो जाता है। पर मुझे पता था कि मेरी शादी में गाँव से बहुत से लोग आयेंगें, इसलिए मैंने उसी दिन यह प्रदर्शनी लगवाई ताकि मेहमान खाना खाते हुए ही खेती के काम को आसान बनाने वाले अविष्कारों के बारे में जान सकें,” चेतन ने कहा।

खाने की बर्बादी पर जागरूकता

किसी भी शादी-ब्याह के आयोजन या फिर और किसी पार्टी आदि में भोजन की बहुत बर्बादी होती है। लोग जितना खाते नहीं हैं उससे ज़्यादा प्लेटों में छोड़ देते हैं। और यह पूरा खाना डस्टबिन में जाता है। लोगों को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए उन्होंने बहुत ही शानदार तरीका अपनाया।

“मैंने 1500 से 2000 पेन लिए, जिन पर ‘सेव फ़ूड, सेव लाइफ’ (खाना बचाओ, ज़िंदगी बचाओ) स्लोगन प्रिंट कराया। इन पेन को लेकर कुछ स्वयंसेवक डस्टबिन्स के पास खड़े हो गये। फिर जो भी मेहमान डस्टबिन में प्लेट रखने जाता और अगर उसकी प्लेट बिल्कुल खाली होती, तो ये स्वयंसेवक उन्हें धन्यवाद कहकर यह पेन गिफ्ट करते। जबकि जिन लोगों ने खाने की बर्बादी की होती, उन्हें यह पेन नहीं दिया गया,” उन्होंने बताया।

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चेतन की इस पहल ने कहीं न कहीं लोगों को इस बारे में सोचने पर मजबूर किया। क्योंकि बहुत से लोगों ने स्वयंसेवकों से पूछा कि उन्हें पेन क्यों नहीं मिला और वजह जानने पर उनके चेहरे पर एक ग्लानि का भाव होता। “शादी में लगभग 3500 लोग आये थे, जिनमें से आधे लोगों को यह पेन मिला। यह आंकड़ा हमें इस विषय की गंभीरता के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। पर अब मैं आपको कह सकता हूँ कि इनमें से अधिकतर लोग अब खाने की बर्बादी करने से पहले एक बार ज़रूर सोचेंगे।”

प्लास्टिक-फ्री शादी

चेतन बताते हैं कि उन्होंने अपनी शादी में किसी भी तरह की प्लास्टिक क्रोकरी का इस्तेमाल नहीं किया। चम्मच से लेकर पानी पिने वाले गिलास तक, सभी कुछ स्टील का था। “मेरे पापा पहले इस बात के लिए राज़ी नहीं थे। उन्हें डर था कि अगर बर्तन शादी में कम पड़ गये तो। पर बाद में, मेरे समझाने पर वे मान गये और शादी वाले दिन हमें किसी एक्स्ट्रा क्रोकरी की ज़रूरत नहीं पड़ी।”

उन्होंने समारोह-स्थल पर पोस्टर भी लगवा दिए थे, जिन पर लिखा था कि हर एक मेहमान बर्तन संभाल कर इस्तेमाल करे ताकि किसी अन्य मेहमान को परेशानी न हो। उनकी यह पहल भी रंग लायी और लोगों को स्टील के बर्तनों का कॉन्सेप्ट बहुत पसंद आया।

अपनी पत्नी आवृत्ति का स्वागत भी उन्होंने बहुत ही विशेष ढंग से किया। उनके परिवार ने अपनी बहु के स्वागत में घर के बाहर रास्ते पर दोनों तरफ 500 फूट तक दिए/दीप जलाए और फुल बिछाए। इसके पीछे उनका उद्देश्य यह संदेश देना था कि जिस तरह ससुराल में दामाद का सम्मान और स्वागत होता है, ठीक वैसे ही बहु को भी सम्मान का पूरा हक़ है।

पूरे सम्मान के साथ किया पत्नी का स्वागत

चेतन का कहना है कि एक लड़की अपना पूरा परिवार छोड़कर नए परिवार को अपनाती है, ऐसे में उनके ससुराल वालों को उसकी तरफ पहला कदम बढ़ाना चाहिए। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम अपने घर की नई सदस्या को प्यार और इज्ज़त दें, तभी वह हमें पूरे दिल से अपना पायेगी।

“हमारी शादी के बाद आवृत्ति का जन्मदिन भी हमने गाँव के एक साधारण से स्कूल में बच्चों के साथ मनाया और वहां हमें जो प्यार और सम्मान मिला, उसे देखकर हमने फ़ैसला किया कि हम हर साल हमारे जन्मदिन स्कूल के बच्चों, अनाथ आश्रम या फिर वृद्धाश्रम में मनायेंगें,” चेतन ने कहा।

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बेशक, चेतन और आवृत्ति की शादी समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी यह पहल सोशल मीडिया के माध्यम से हजारों लोगों तक पहुँच चुकी है। अंत में चेतन सिर्फ़ इतना कहते हैं कि आज नकारात्मक ख़बरें मिनटों में पूरे देश में वायरल हो जाती हैं। लेकिन जो लोग समाज के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं, उनकी कहानियाँ गाँव से शहर तक भी नहीं पहुँच पाती हैं। हमें ऐसे लोगों की कहानी को आगे लाना होगा और मेरा प्रयास सिर्फ़ यही है कि इस तरह की पहलों से प्रभावित होकर ज़्यादा से ज़्यादा लोग बदलाव का हिस्सा बनें।

Note: चेतन और आवृत्ति की शादी का कार्ड गुजराती भाषा में प्रिंट करवाया गया। यदि आपको लगता है कि इस कार्ड में छपी कृषि से संबंधित जानकारी आपके या फिर आपके किसी जानने वाले के काम आ सकती है, लेकिन आप गुजराती पढ़ और समझ नहीं सकते हैं, तो आप चेतन पटेल से 9227447243 पर संपर्क कर सकते हैं! 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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