दिल्ली में आनंद पर्वत कॉलोनी की एक गुमनाम नायिका, जया रेड्डी ने कुष्ठ रोगियों के साथ काम करते हुए दो दशक से अधिक समय बिताया है। जानिए उनके संघर्ष की कहानी।
आयोध्या के रहनेवाले वेद कृष्ण ने अपने पिता के गुजर जाने के बाद ‘यश पक्का’ की बागडोर संभाली। उन्होंने गन्ने की खोई से कप-प्लेट बनाकर किसानों और पर्यावरण, दोनों को फायदा पहुँचाया है।
महाराष्ट्र के उरळी कांचन में रहनेवाले भाऊसाहेब कंचन ने अपने घर की छत को अंगूर के एक हरे-भरे बाग में बदल दिया है, जिसे देखने पुणे जैसे शहरों से भी लोग आते हैं।
विशाखापट्टनम के रहने वाले प्रदीप वर्मा, रतन रोहित और ज्ञान साईं ने मिलकर ‘K-Shield’ नाम की एक ऐसी एआई डिवाइस बनाई है, जो गाड़ी और ट्रैफिक की हर एक्टिविटी को ट्रैक करने में सक्षम है।
जंगगढ़ सिंह श्याम, कभी झोपड़ियों की दीवारों और भैंसों की पीठ पर कलाकृतियां उकेरा करते थे। लेकिन उन्होंने इस कला को विदेशों की प्रतिष्ठित संग्रहालयों तक पहुंचाया।
उत्तर प्रदेश के बांसा के रहने वाले जतिन सिंह ने अपने गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक कम्युनिटी लाइब्रेरी की शुरुआत की। जानिए इससे हजारों छात्रों को कैसे फायदा हो रहा है।