वाराणसी के रहने वाले नंदलाल मास्टर और रंजू सिंह अपने घर की छत पर मौसमी सब्ज़ियाँ जैसे बैगन, टमाटर, लौकी, सेम, खीरा, करेला,पालक,लहसून, भिन्डी आदि उगा रहे हैं!
छत्तीसगढ़ के रहने वाले सुबोध भोई और उनकी पत्नी ईश्वरी भोई, पेशे से एक शिक्षक हैं। लेकिन, पिछले 8 वर्षों से, अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच, दोनों टेरेस गार्डनिंग कर, अपनी बागवानी की रुचि को एक नया आयाम दे रहे हैं।
साल 2019 में, आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर दीपक जॉन मैथ्यू ने अपने घर के बगीचे में टैपिओका लगाया। इसके करीब 8 महीने बाद, उन्हें 24 किलो टैपिओका की फसल मिली, जो औसतन 6 किलो के अनुमानित उपज से चार गुना ज्यादा था।
केरल के कोक्कवड गाँव के रहने वाले जोशी मैथ्यूज के पास 0.25 एकड़ जमीन है, जहाँ उन्होंने जैविक खेती और मछली पालन से लेकर मधुमक्खी पालन की सुविधा भी विकसित कर ली है।
'पॉलिथीन डोनेट मिशन' के तहत उपेन्द्र पांडेय लोगों को बेकार और पुरानी पॉलिथीन कचरे में फेंकने की बजाय उन्हें देने के लिए कहते हैं और फिर इन्हीं में बांटने के लिए पौधे तैयार करते हैं!
उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाली मंजू लता मौर्य पिछले दो दशक से अधिक समय से टैरेस गार्डनिंग कर रही हैं। आज उनके बगीचे में सैकड़ों फूल और सजावटी पौधे होने के साथ-साथ कई बोनसाई पेड़ भी हैं।