उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिला के बवाइन गाँव के रहने वाले रविंद्र प्रताप सिंह ने 2006 में शिक्षक की नौकरी शुरू की थी लेकिन 2017 में उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और बागवानी की शुरुआत कर दी।
रिटायरमेंट के बाद 63 वर्षीया राजेश्वरी ने अपने गार्डनिंग के शौक को पूरा करने का मन बनाया और अपने छत पर बागवानी शुरू कर दी, आज उनके टेरेस गार्डन में 200 से अधिक पौधे हैं।
बेंगलुरु में रहने वाली अश्विनी गजेन्द्रन पिछले 3 सालों से अपनी छत पर हर तरह के फल-फूल और साग-सब्जियां उगा रहीं हैं और उन्हें अपने गार्डन से इतनी उपज मिलती है कि वह बाहर से न के बराबर सब्जियां खरीदतीं हैं!
नई दिल्ली में रहने वाले अमित चौधरी करीब 3 साल पहले फैशन डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद किसी वजह से डिप्रेशन में चले गए थे। इस वजह से वह तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें जिंदगी में करना क्या है। इसके बाद उन्होंने बागवानी शुरू करने का फैसला किया, जो बचपन से ही उनका शौक था।
ब्रह्मदेव कुमार अपनी छत पर फूल और मौसमी सब्जियों के अलावा थाईलैंड अमरुद, थाई एप्पल बेर, पान, ड्रैगन फ्रूट, आम, मौसम्बी, निम्बू, संतरा और अंजीर जैसे फल भी उगा रहे हैं!
मध्य-प्रदेश के विदिशा में रहने वाली ज्योति सारस्वत न सिर्फ खुद गार्डनिंग कर रही हैं, बल्कि रेडियो के ज़रिए उन्होंने और भी बहुत से लोगों को गार्डनिंग से जोड़ा है!