सूरत के मगन भाई का पूरा परिवार सालों से डायमंड बिज़नेस से जुड़ा था। लेकिन खेती और पशुपालन के अपने शौक़ के कारण, उन्होंने पांच साल पहले थोड़ी जमीन और दो गायें भी खरीदी थीं। कोरोना के कठिन दौर में पशुपालन ही उनके काम आया, चार भाइयों का पूरा परिवार आज डेयरी बिज़नेस से सालाना एक करोड़ का टर्नओवर कमा रहा है।
'डीहाइड्रेशन' की पुरानी तकनीक को इस्तेमाल करके हैदराबाद के अनुभव भटनागर ने अपना स्टार्टअप, Zilli's शुरू किया है। जिसके अंतर्गत वह प्राकृतिक, प्रेज़रवेटिव-फ्री और रेडी टू कुक प्रोडक्ट्स बना रहे हैं।
राजस्थान के नागौर जिला स्थित सिरसूं गाँव में रहनेवाले 50 वर्षीय रेंवत सिंह राठौड़ के खेत में 2000 से भी ज्यादा पेड़-पौधे हैं। उन्होंने एक खेजड़ी के पेड़ पर ट्रीहाउस भी बनाया है।
उत्तराखंड की 'ट्रैकिंग गर्ल' देवेश्वरी बिष्ट ने अपनी नौकरी छोड़कर, अपना ट्रेवल स्टार्टअप शुरू किया, जिसके जरिए वह देश-दुनिया को पहाड़ों की संस्कृति और खूबसूरती से परिचित करा रही हैं।
उत्तराखंड के देहरादून में रहनेवाले हर्षित सहदेव ने 2018 में Himshakti स्टार्टअप की शुरुआत की, जिसके तहत वह न सिर्फ भारत में, बल्कि दूसरे देशों में भी जैविक और प्राकृतिक खाद्य उत्पाद पहुंचा रहे हैं।
‘नोबल कॉज’, एक कार्ट के आकार का इको-फ्रेंडली शवदाह गृह है, जिसमें पहिए लगे हैं। इसे जरूरत के हिसाब से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस सिस्टम को ‘चीमा बॉयलर्स लिमिटेड’ के चेयरमैन, हरजिंदर सिंह चीमा ने IIT रोपड़ की मदद से बनाया है।