हैदराबाद के सचिन दरबरवार ने अपनी पत्नी श्वेता दरबरवार के साथ मिलकर ‘सिंपली फ्रेश’ की स्थापना की है, जहाँ QR कोड प्रणाली से ग्राहक हर बार उपज खरीदने से पहले इसकी जांच कर सकता है।
स्वर्ण मंदिर से लगभग 800 मीटर की दूरी पर, चौक पस्सियां की तंग गलियों में स्थित है 100 साल पुराना ‘केसर दा ढाबा’। दाल मखनी और राजमा चावल जैसे असली पंजाबी स्वाद के लिए तो यह मशहूर है ही, पर क्या आप इसका रोचक इतिहास भी जानना चाहेंगे?
मेरठ की सना खान ने ‘एसजे ऑर्गेनिक्स’ वर्मीकंपोस्टिंग कंपनी तब शुरू की थी जब वह बी.टेक के चौथे वर्ष में थीं। आज सना की कंपनी न केवल सालाना एक करोड़ रुपये कमाती है बल्कि 30 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार भी देती है।
साल 2015 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा में पूरे देश में 93वीं रैंक हासिल करने वाली गंधर्व राठौड़ ने यूपीएससी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बहुत सी रोचक और व्यवहारिक बातें बताई हैं, जिन्हें पढ़कर आप भी बिना कोचिंग के इस परीक्षा की तैयारी करने का मन बना सकते हैं।
पुणे निवासी, विमल दिघे का परिवार पिछले 16 वर्षों से खाना पकाने के लिए बायोगैस का उपयोग कर रहा है, जिससे उनके LPG Cylinder पर होने वाला खर्च आधा हो गया है।
महाराष्ट्र में अहमदनगर के निघोज गांव की श्रद्धा धवन ने 11 साल की उम्र में परिवार के डेयरी फार्म की जिम्मेदारी उठाई थी। आज 6 लाख रूपये/ माह आय के साथ, दो मंजिला मवेशी शेड में 80 भैंसों के दूध से प्रति दिन 450 लीटर दूध बेचती हैं।