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अनमोल इंडियंस

Inspiring Indians Stories To Motivate From India. \ भारत के उन प्रेरक नायक नायिकाओं की कहानियां, जो अपने काम से भारत को बेहतर से बेहतरीन बनाने में जुटे हैं!

बंगलुरु: इस डॉक्टर के प्रयासों ने एक डंपयार्ड को बदला दादा-दादी पार्क में!

By निशा डागर

लोगों को कचरा न फेंकने के लिए समझाना बहुत ही मुश्किल काम था। अगर उन्हें रोका जाता तो वे उल्टा डॉ. अग्रवाल से ही बहस करते कि अगर यहाँ न फेंके तो कहाँ फेंके?

कभी बाल मजदूरी करने वाला यह युवक, आज भर रहा है 2 हज़ार गरीबों का पेट!

By निशा डागर

"जब मैं हैदराबाद आया था तो मुझे याद है कि भूखे पेट ही प्लेटफार्म पर सोया था। उस वक़्त मेरे पास खाना खरीदने के भी पैसे नहीं थे।"

'एक रुपया मुहिम' से 3 साल में जोड़े 2 लाख रुपये, भर रही हैं 33 बच्चों की फीस!

By निशा डागर

"मैंने अपने कानों से लोगों को मुझे 'भिखारी' कहते हुए सुना है। कोई कहता कि देखते हैं कितने दिन तक यह मुहिम चलती है। भला एक रुपये में ऐसी क्या दुनिया बदल देगी।"

'न किसी की शिक्षा रुके, न किसी की ज़मीन बिके,' स्कॉलरशिप्स के ज़रिए बदलाव की पहल!

By निशा डागर

साल 2016 में शुरू हुआ यह संगठन अब तक 5 राज्यों में 5, 500 बच्चों को ढाई करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप्स दिलवा चूका है।

जल-संरक्षण के अनोखे तरीके से हर साल 6 करोड़ लीटर बारिश का पानी बचा रहा है यह किसान!

By निशा डागर

जब थरकन ने अपनी 12 साल की रबर की खेती को कटवा दिया तो लोगों ने उन्हें पागल कहा। पर आज वही लोग उनके तरीके अपने फार्म में इस्तेमाल कर रहे हैं!

ट्रेन हादसे में गंवाया एक पैर, आज हैं भारत की पहली महिला ब्लेड रनर!

By निशा डागर

मुझे पता है कि ज़िंदगी में बहुत कुछ ऐसा है जिस पर हमारा कंट्रोल नहीं है। ज़िंदगी का अगला पल, आपको बना सकता है या फिर गिरा भी सकता है।

"अपने बेटे के लिए कुछ करना है," 350 बच्चों को मुफ़्त शिक्षा दे रहीं हैं शहीद की माँ!

By निशा डागर

6 अक्टूबर 2017 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में स्क्वाड्रन लीडर शिशिर तिवारी शहीद हो गए थे।

अब खुद अपने पैरों पर खड़े हो पाएंगे दिव्यांग, IIT मद्रास ने बनायी ख़ास 'स्टैंडिंग व्हीलचेयर'!

By निशा डागर

दिव्यांग-जनों के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वे नियमित तौर पर खड़े हों ताकि उनके शरीर के निचले भाग का ब्लड सर्कुलेशन और हड्डियां ठीक रहें। लेकिन इससे पहले इसके लिए उन्हें हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।

'अच्छी नीयत में बहुत ताकत होती है,' विजिटिंग कार्ड ने बदली काम वाली मौसी की ज़िंदगी!

By निशा डागर

एक व्हाट्सएप ग्रुप से ही उनका कार्ड इस कदर वायरल हो गया कि गीता को पुणे, मुंबई और भी कई इलाकों से फ़ोन आने लगे!