रावलगाँव के उत्पादों ने महाराष्ट्र में गन्ने की खेती के क्षेत्र में एक क्रांति का सूत्रपात कर एक पिछड़े क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
नयी टाइलें खरीदने के बजाय, सनी ने पुराने टूटे हुए मकानों की टाइलें महज़ रु.5 प्रति टाइल के दर से खरीदीं, जो आज बनाई जा रहीं टाइलों के मुकाबले बेहद सस्ती भी थीं और मज़बूत भी।