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कुमार देवांशु देव

हल्दी-अदरक की खेती कर 1.5 करोड़ कमाता है यह IT ग्रैजुएट, अमरीका व यूरोप में हैं ग्राहक

देवेश ने अपने क्षेत्र के 200 से अधिक किसानों को भी प्रशिक्षित किया है और उन्हें जैविक खेती करने में मदद की है। इनमें से कुछ किसान तो आज स्वयं उद्यमी बन गए हैं।

बाल्टी में मोती उगाकर कमा रहे लाखों, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्ज़रलैंड में मशहूर हैं इनके मोती

65 वर्षीय केजे माथचन ने करीब 1.5 लाख रूपए का निवेश कर 4.5 लाख रूपए के मोती उगाये जिससे उन्हें सीधे-सीधे करीब 3 लाख रूपए का फायदा हुआ।

पुरानी बेकार पड़ी चीज़ों से बनाते हैं अलौकिक इमारतें, मिलिए गोवा के अनोखे आर्किटेक्ट से

गोवा के सबसे पुराने किलों में से एक रीस मैगोस किला एक लंबे अरसे से खंडहर था। यहाँ के अधिकारियों ने इसके जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी जेरार्ड को सौंपी। आज यह गोवा के इतिहास को दर्शाने वाला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।

छत पर 250 से अधिक फूलों की खेती, स्विमिंग पूल से लेकर स्लाइडर भी है यहाँ

संदीप के पास 250+ पेड़-पौधे हैं। अपने बच्चे को प्रकृति के करीब रखने के लिए उन्होंने टेरेस गार्डन को प्ले गार्डन बना दिया है, जहाँ स्विमिंग पूल से लेकर स्लाइडर तक है।

80 रूपए के लोन से इन 7 महिलाओं ने बनाई 1600 करोड़ की कंपनी, पढ़ें 'लिज्जत पापड़' का सफ़र

एक दिन गर्मी के मौसम में एक छत पर सात गुजराती महिलाएं अपने घर की गरीबी दूर करने के बारे में सोच रही थीं, उनके दिमाग में पापड़ बनाने का आइडिया आया और चार पैकेट के साथ शुरू हो गया लिज्जत पापड़ का सफ़र।

कभी खेती करने के लिए मना करते थे दादाजी, अब उसी खेती से पोती कमा रही सालाना 10 लाख रूपये

सनिहा सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को खेती के बारे में जानकारी भी देती हैं और ज्यादा से युवाओं को खेती में आने के लिए प्रेरित करती हैं।

देसी मशीनों से खेती कर रिटायर्ड फ़ौजी ने अपने गाँव को बनाया देश का सबसे बड़ा गाजर उत्पादक

साल 2006 में कर्नल देसवाल और उनके मित्र लाल किशन यादव ने मिलकर गाजर की खेती शुरू की थी। इसके साथ ही उनका लक्ष्य बड़ी संख्या में किसानों को एक सूत्र में पिरोना, आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाना और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की स्थापना करना था।

आटे के थैले और चाय के पैकेट में लगा रहीं पौधे, हर महीने यूट्यूब पर देखते हैं लाखों लोग!

“एक समय मेरे घर के आगे एक तालाब हुआ करता था, जिसमें लोग कूड़ा-कचड़ा फेंक देते थे। इसके बाद मेरे पिता जी ने उसमें मिट्टी भर कुछ फलदार पेड़ लगाए, धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। आज हम आम, अमरूद, अनार जैसे फलदार पेड़ों से लेकर गिलोय, कालाबांसा, थोर जैसे कई औषधीय पौधों की भी खेती करते हैं। -अप्रती सोलंकी

कटहल से लेकर नारियल तक, 41 प्रकार के पेड़-पौधे हैं मुंबई की इस सोसाइटी के भीतर!

यहाँ हर वर्ष 600 नारियल, 800-900 आम, 30-40 किलो जामुन और कटहल का उत्पादन होता है और इसे सोसाइटी के सभी 86 फ्लैटों में बराबर बांटा जाता है।

नहीं थी जमीन, तो थर्माकोल और कूलर-ट्रे से छत पर बना दिया ऑर्गेनिक किचन गार्डन!

नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर कार्यरत अजय अपनी छत पर एक सीजन में आठ से अधिक प्रकार की ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगाते हैं।