देवेश ने अपने क्षेत्र के 200 से अधिक किसानों को भी प्रशिक्षित किया है और उन्हें जैविक खेती करने में मदद की है। इनमें से कुछ किसान तो आज स्वयं उद्यमी बन गए हैं।
गोवा के सबसे पुराने किलों में से एक रीस मैगोस किला एक लंबे अरसे से खंडहर था। यहाँ के अधिकारियों ने इसके जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी जेरार्ड को सौंपी। आज यह गोवा के इतिहास को दर्शाने वाला एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है।
संदीप के पास 250+ पेड़-पौधे हैं। अपने बच्चे को प्रकृति के करीब रखने के लिए उन्होंने टेरेस गार्डन को प्ले गार्डन बना दिया है, जहाँ स्विमिंग पूल से लेकर स्लाइडर तक है।
एक दिन गर्मी के मौसम में एक छत पर सात गुजराती महिलाएं अपने घर की गरीबी दूर करने के बारे में सोच रही थीं, उनके दिमाग में पापड़ बनाने का आइडिया आया और चार पैकेट के साथ शुरू हो गया लिज्जत पापड़ का सफ़र।
साल 2006 में कर्नल देसवाल और उनके मित्र लाल किशन यादव ने मिलकर गाजर की खेती शुरू की थी। इसके साथ ही उनका लक्ष्य बड़ी संख्या में किसानों को एक सूत्र में पिरोना, आधुनिक कृषि पद्धति को अपनाना और फसल कटाई के बाद के बुनियादी ढांचे की स्थापना करना था।
“एक समय मेरे घर के आगे एक तालाब हुआ करता था, जिसमें लोग कूड़ा-कचड़ा फेंक देते थे। इसके बाद मेरे पिता जी ने उसमें मिट्टी भर कुछ फलदार पेड़ लगाए, धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। आज हम आम, अमरूद, अनार जैसे फलदार पेड़ों से लेकर गिलोय, कालाबांसा, थोर जैसे कई औषधीय पौधों की भी खेती करते हैं। -अप्रती सोलंकी