एक्सपर्ट से सीखें, केले के छिलके से बेहतरीन खाद बनाना

हर घर में खाया जाने वाला, सुपर फूड केला हमारे स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही, इसके छिलके भी कम गुणकारी नहीं हैं। केले के छिलके से बनाई गई खाद, पौधों के विकास के लिए बहुत अच्छी होती है। चलिए जानें, क्या है इसे बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका।

banana peel compost

जिस तरह, हम इंसानों के अच्छे स्वास्थ्य और तंदुरुस्त शरीर के लिए पोषक खाना जरूरी है। ठीक उसी तरह, पौधों को भी बढ़ने के लिए सही पोषक तत्वों की जरूरत होती है। कई बार सूरज की रोशनी और सही पानी देने के बावजूद भी पौधों का विकास सही रूप से नहीं हो पाता। कभी-कभी पौधे लंबे और घने तो हो जाते हैं, लेकिन उनमें फल और फूल नहीं आते, इसका कारण है पोषण की कमी। 

पौधों में पोषक तत्वों को पहुंचाने का सबसे आसान तरीका है, इसमें कंपोस्ट खाद मिलाना। आजकल बाजार में कई तरह के कंपोस्ट मिल रहे हैं। जिसका इस्तेमाल लोग अपने पौधों को हरा-भरा और ज्यादा फलदार बनाने के लिए करते हैं। लेकिन गार्डनिंग एक्सपर्ट बताते हैं कि कंपोस्ट को बड़ी आसानी से घर पर भी तैयार किया जा सकता है। घर पर तैयार कंपोस्ट पूरी तरह से जैविक होने का साथ-साथ सस्ती भी होती है। 

इसके लिए आप, अपने रसोई के कचरे का इस्तेमाल कर सकते हैं। सब्जियों और फलों के छिलकों में भी कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जिसके उपयोग से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और फूल और फलों की पैदावार भी अच्छी होती है। मेरठ में पिछले पांच सालों से गार्डनिंग कर रहीं, सुमिता सिंह ने द बेटर इंडिया को बताया कि वह घर पर ही कंपोस्ट बनाती हैं। 

सुमिता सिंह

वह कहती हैं, “वैसे तो तक़रीबन सभी सब्जियों और फलों के छिलकों में कुछ न कुछ पोषक तत्व होते ही हैं। लेकिन सुपरफ़ूड माने जाने वाले, केले के छिलकों का उपयोग पौधों के विकास के लिए बेहद अच्छा है। इसमें पोटैशियम, फॉसफोरस, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट के साथ कई और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स शामिल होते हैं।”

सुमिता ने द बेटर इंडिया से केले के छिलकों से कंपोस्ट बनाने और उसे इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में कई जानकारियां साझा कींः

लिक्विड फ़र्टिलाइज़र के रूप में करें इस्तेमाल

सुमिता बताती हैं कि केले के छिलकों को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे आसान तरीका है, लिक्विड फ़र्टिलाइज़र के तौर पर इस्तेमाल  करना। इसके लिए चार से पांच केलों के छिलकों को पानी में डाल दें और इसे दो या तीन दिनों तक ढककर रखें। बाद में, इस पानी को सादे पानी के साथ मिलाकर पौधों में खाद के तौर पर इस्तेमाल करें। ध्यान दें, अगर आप एक लीटर पानी का लिक्विड फ़र्टिलाइज़र बना रहे हैं, तो उसमें तकरीबन, चार गुना पानी मिलाकर पौधों में डालें। 

 कंपोस्ट बिन में तैयार करें कंपोस्ट

लिक्विड फ़र्टिलाइज़र के अलावा, दूसरा तरीका है कंपोस्ट बिन में डालकर कंपोस्ट तैयार करना। इसके लिए आप केले के छिलकों को एक कंपोस्ट बिन में डाल दें। इसे आप रसोई से निकले दूसरे कचरे और सूखी पत्तियों के साथ मिलाकर कंपोस्ट तैयार कर सकते हैं। केले के छिलकों में नाइट्रोजन ना के बराबर होता है, वहीं अगर आप इसे कंपोस्ट बिन में डालेंगें तो यह बाकी पत्तों और छिलकों से साथ मिलकर नाइट्रोजनयुक्त भी बन जाएगा। नाइट्रोजन भी पौधों के विकास के लिए जरूरी होता है। इस तरह बने कंपोस्ट को समय-समय पर अपने पौधों में डाल सकते हैं।  

सुखाकर करें इस्तेमाल

केले के छिलकों को इस्तेमाल करने का तीसरा और सबसे अच्छा तरीका है, इसे सुखाकर उपयोग करना। इसके लिए सबसे पहले आप केले के छिलकों को धूप में सुखा लें। तक़रीबन एक हफ्ते में, ये पूरी तरह से सूख जाएंगे। आप इन सूखे पत्तों का मिक्सर में पाउडर बना लें, तैयार है आपके पौधों के लिए सूखी खाद। इसे आप सालभर स्टोर करके भी रख सकते हैं। महीने में एक या दो बार या पौधे की जरूरत के अनुसार आप इस पाउडर को अपने पौधों में डालें। 

इस पाउडर को डालते समय, गमले से थोड़ी मिट्टी हटा दें,  ड्राई केले का पाउडर डालें और वापस ऊपर मिट्टी दाल दें। 

सुमिता बताती हैं कि केले के छिलकों को सुखाकर बनाया पाउडर सबसे अच्छा तरीका है, इसे उपयोग में लेने का। 

किन बातों का रखें ध्यान 

सुमिता का कहना हैं कि चूँकि केले के छिलकों में कार्बोहाइड्रेट काफी ज्यादा होता है, इसलिए फंगस लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। ध्यान रखें कि बारिश के दिनों और ठंड के मौसम में केले के छिलकों की कंपोस्ट का इस्तेमाल न करें। कुछ लोग केले के छिलकों को सीधा गमले में डालते हैं, ऐसा करने से केले के छिलकों को मिट्टी के साथ मिलने में काफी समय लगता है, आप गमले की मिट्टी के अंदर, केले के छोटे-छोटे टुकड़े कर डाल सकते हैं, लेकिन अगर धूप न निकल रही हो तो ऐसा करने से परहेज करें। 

अगर आप भी गार्डनिंग के शौक़ीन हैं और आपके गार्डन के पौधों में फल और फूल कम आ रहे हैं, तो एक बार केले के छिलकों का इस्तेमाल जरूर करें। 

हैप्पी गार्डनिंग 

संपादन- अर्चना दुबे

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