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सोलर स्टार्टअप के लिए इस युवक को मिली फ़ोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया लिस्ट में जगह!

सिमरप्रीत सिंह का सिर्फ एक उद्देश्य है क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत को सबसे आगे लेकर जाने का और साथ ही, देश में सोलर को घर-घर तक पहुंचाने का।

साल 2019 में पब्लिश हुई फ़ोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया की लिस्ट में एशिया पैसिफिक रीजन के 23 देशों से लगभग 300 युवा उद्यमी और आविष्कारकों के नाम हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने आधुनिक समय की चुनौतियों को स्वीकारते हुए आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर कल देने का निश्चय किया है। और बिना रुके और बिना थके, एक बेहतर भारत की दिशा में काम भी कर रहे हैं।

इस लिस्ट में भारत के भी एक उद्यमी सिमरप्रीत सिंह का नाम शामिल है। 29 वर्षीय सिमरप्रीत सिंह ने साल 2017 में हरटेक सोलर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शुरूआत की। इसके ज़रिये उनका सिर्फ एक उद्देश्य है क्लीन और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भारत को सबसे आगे लेकर जाने का और साथ ही, देश में सोलर को घर-घर तक पहुंचाने का।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और फिर एमबीए की पढ़ाई पूरी करने वाले सिमरप्रीत एक बिज़नेस फैमिली से ही आते हैं। चंडीगढ़ में रहने वाले उनके परिवार के व्यवसाय की यात्रा साल 1991 में शुरू हुई, जब सिमरप्रीत के पिता हरटेक सिंह ने पॉवर सेक्टर में ‘हरटेक ग्रुप’ की नींव रखी।

Simarpreet Singh

अपनी पढ़ाई के बाद, साल 2012 में सिमरप्रीत ने अपने पिता का बिज़नेस जॉइन किया। द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, “मुझे कोई 12 दिन हुए होंगे ऑफिस जाते हुए और तब तक मैं बस कुछ-कुछ काम सीखने की कोशिश कर रहा था। फिर 13वें दिन पापा ने अपने ऑफिस में बुलाया और कहा कि क्या चल रहा है? मैं बस बताने लगा कि हाँ मैं समझ रहा हूँ काम तो उन्होंने मेरे सामने एक पेपर पर जीरो लिख दिया और कहा कि यह तुम हो।”

उनके पिता ने उनसे कहा कि ‘जीरो’ इस दुनिया में सबसे ज्यादा पावरफूल नंबर है क्योंकि यह जिसके आगे लग जाता है उसकी वैल्यू बढ़ जाती है। अब यह उन पर निर्भर करता है कि उन्हें सिर्फ अकेले रह जाना है कि अपनी वैल्यू बढ़ानी है। “पापा ने उस दिन मुझे समझाया कि यह मेरे ऊपर है कि लोग मुझे उनके बिज़नेस की वजह से जानें या फिर मैं खुद अपनी एक पहचान बनूँ,” उन्होंने आगे कहा।

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सिमरप्रीत ने उसी दिन ठान लिया कि वह सिर्फ अपने पिता के बिज़नेस में ही सिमट कर नहीं रह जायेंगे बल्कि वह खुद अपनी एक पहचान बनाने की कोशिश करेंगे। उसी दिन से उनके एक अलग सफ़र की शुरुआत हुई। उन्होंने कुछ साल अपने पिता के साथ एनर्जी सेक्टर को समझते हुए, नए अनुभव सीखते हुए बिताये।

शुरू हुआ नया सफ़र: 

साल 2016 में एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में उनका आंध्र-प्रदेश जाना हुआ। यहाँ पर उन्हें एक पावर सब-स्टेशन लगाना था। जगह का मुआयना करने के बाद, सिमरप्रीत यूँ ही पास के एक गाँव में घुमने के लिए निकल गए। वहां उन्होंने देखा कि लोगों के घरों में बिजली तो क्या पीने के लिए साफ़ पानी भी नहीं था।

“पानी और बिजली जैसे साधनों को अक्सर हम इतना सस्ता समझ लेते हैं कि हमें लगता है कि किसी के भी घर में ये बेसिक चीजें तो होंगी ही? पर हमारे देश में लगभग 30 करोड़ लोगों की हक़ीकत यही है कि उनके यहाँ बिजली तक नहीं है। तब मेरे मन में सवाल आया कि आखिर क्यों हम इन गांवों और निचले तबकों तक बिजली नहीं पहुंचा सकते। जबकि हमारे पास तो सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसे बहुत से विकल्प हैं,” उन्होंने कहा।

Hartek Solar team

सिमरप्रीत बताते हैं कि उस गाँव से उन्हें प्रेरणा मिली कि वह घर-घर में सोलर एनर्जी लगाने के प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं। पर जब उन्होंने रिसर्च करना शुरू किया तो असलियत कुछ और ही थी। भारत में सोलर एनर्जी की कैपेसिटी भले ही पिछले कुछ सालों में बहुत ज्यादा बढ़ी है पर यह अभी भी सिर्फ कमर्शियल और इंडस्ट्रियल क्षेत्रों तक ही सीमित है।

रेजिडेंशियल सेक्टर में सोलर एनर्जी का उपयोग अभी भी मानों ना के बराबर है। सिमरप्रीत ने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की ठानी। उन्होंने अपने सभी ज्ञान, रिसर्च और स्टडीज को सिर्फ इस प्रोजेक्ट पर लगाया कि कैसे वह भारत के घरों के हिसाब से एक रूफटॉप सोलर सिस्टम डिजाईन कर सकते हैं और वह भी कम से कम कीमत पर। ताकि यह आम लोगों के लिए अफोर्डेबल हो।

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सिमरप्रीत ने साल 2017 में हरटेक सोलर की नींव रखी और उन्होंने पहले दिन से ही निश्चय कर लिया था कि उनकी कंपनी क्लीन एंड ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में भारत को आगे लेकर जाने के लिए काम करेगी।

डिजाईन की कस्टमाइजेबल सोलर किट:

अपनी रिसर्च के दौरान सिमरप्रीत ने उन सब कारणों पर ध्यान दिया, जिन वजहों से लोग अपने घर की छत पर सोलर पैनल नहीं लगाते। सबसे पहले तो आम लोगों को क्लीन और ग्रीन एनर्जी के विषय पर जागरूकता नहीं है। पर अगर उन्हें समझाया जाये तो अब बहुत से लोग हैं देश में जिन्हें यह आसानी से समझ में आ सकता है कि आखिर क्यों हमें अपनी ऊर्जा की खपत के लिए सौर और पवन ऊर्जा पर निर्भर होने की ज़रूरत है।

इसके अलावा, दूसरी सबसे बड़ी समस्या है कि देश में हर एक घर बहुत अलग तरीके से बना हुआ है। सबकी छतें किसी न किसी तरह से एक-दूसरे से अलग हैं और उनकी ज़रूरत भी अलग है। ऐसे में, चुनौती यह थी कि क्या हर एक घर की ज़रूरत के हिसाब से सोलर पैनल या फिर अन्य प्रोडक्ट्स को डिजाईन किया जा सकता है?

Hartek Solar’s rooftop solar installations

फिर रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने के बाद, लोगों के लिए इसका रख-रखाव भी आसान बात नहीं है। उन्हें लगता है कि इससे उनकी समस्याएं बढ़ जाएंगी। इसलिए जैसे चलता आ रहा है वैसे ही रहने देते हैं।

सिमरप्रीत ने अपनी टीम से साथ इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए काम किया और प्लग एंड प्ले सोलर किट डिजाईन की। इस किट की सबसे खास बात यह है कि यह कस्टमाइजेबल है। इस किट में सोलर पैनल, इन्वर्टर, और रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी ग्राहकों को मिलती है।

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“सबसे पहले हमारी टीम जाकर ग्राहक के घर की छत का मुआयना करती है कि कहाँ सबसे ज्यादा धूप आती है या फिर कहाँ छाया पड़ेगी। छत किस मटेरियल की बनी हुई है और किस दिशा में सोलर पैनल लगाने से ज्यादा एनर्जी मिलेगी आदि। इन सब बातों को जांच- परख कर ही हम सोलर किट बनाते हैं,” उन्होंने आगे कहा।

प्रोडक्ट तैयार होने के बाद इसे सीधा क्लाइंट के घर पहुँचाया जाता है और इंजिनियर्स की एक टीम जाकर सोलर पैनल इनस्टॉल करती है। उनका उद्देश्य अपने क्लाइंट को वन-स्टॉप सोल्यूशन देना है ताकि उन्हें अलग-अलग जगह न भटकना पड़े।

One-stop solution for consumers’ needs

सोलर किट का डिजाईन, सप्लाई, इंस्टालेशन, कमिशनिंग और सर्विसिंग- यह सभी कुछ हरटेक सोलर खुद अपने क्लाइंट के लिए करती है। 40 हज़ार रुपये से 60 हज़ार रुपये की लागत में एक सस्टेनेबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर आपको मिलता है।

बिजली बिल से पाएंगे छुटकारा

वैसे तो हर घर की बिजली की खपत बहुत अलग होती है। पर ट्यूबलाइट और पंखे बेसिक चीज़ों में आते हैं और इसके अलावा, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एसी, कूलर, हीटर आदि का इस्तेमाल बहुत अलग-अलग होता है। सिमरप्रीत बताते हैं कि वे  2 किलोवाट से लेकर 10 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर किट लगा रहे हैं।

सोलर किट की लागत एक बार के लिए ज्यादा लग सकती है पर यह सिर्फ एक ही बार की इन्वेस्टमेंट है। उनके एक क्लाइंट दलजीत सिंह के मुताबिक, 5 किलोवाट पावर वाला सोलर पैनल लगवाने के बाद उनका बिजली बिल एकदम जीरो हो गया है। और इस तरह से मुश्किल से 3 साल में वह अपनी पूरी लागत की भरपाई कर लेंगे।

इसके अलावा, सोलर किट की लाइफ 25 साल है तो बाकी के 22 साल उनकी बिजली बिल्कुल मुफ्त में होगी और वह भी सस्टेनेबल एनर्जी।

सिमरप्रीत की सोलर किट में रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी भी है जिससे कि उनके क्लाइंट आसानी से चेक कर सकते हैं कि कितनी बिजली बन रही है और कितनी की खपत हो रही है। क्लाइंट को सिर्फ इंस्टालेशन के बाद इसका मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करना होता है।

“अब तक हम 25 मेगावाट कैपेसिटी के रूफटॉप प्रोजेक्ट्स इनस्टॉल कर चुके हैं। हमने गुरुद्वारा, मंदिर, मस्जिद जैसी सार्वजनिक जगहों पर तो सोलर प्रोजेक्ट किये ही हैं। साथ ही, चंडीगढ़ के लगभग 100 घरों में हमने रूफटॉप सोलर पैनल लगाये हैं और 200 प्रोजेक्ट्स पर हमारा काम चल रहा है। हम चंडीगढ़ के मॉडल को बाकी जगहों पर भी अप्लाई करने की तैयारी कर रहे हैं। ताकि पूरे देश को ग्रीन एनर्जी से जोड़ सकें,” उन्होंने आगे कहा।

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भविष्य में हरटेक सोलर, और भी स्मॉल स्केल सोलर प्लान पर काम करेगा जैसे कि सोलर ट्री और सोलर फेंसिंग। पर फ़िलहाल उनका फोकस इस पर है कि कैसे वे भारत के कोने-कोने तक बिजली पहुँचाने में सहायक हों। आज के समय में जब हम क्लाइमेट चेंज और प्रदुषण जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं तो ऐसे में, क्लीन एंड ग्रीन एनर्जी की तरफ जाना एक महत्वपूर्ण कदम है।

सिमरप्रीत कहते हैं, “मैं बस अपने देश को सस्टेनेबल एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ते हुए देखना चाहता हूँ। मैं हर एक नागरिक से यही कहूँगा कि जहां भी जैसे भी मुमकिन हो आप बिजली के लिए ग्रीन एनर्जी के विकल्प चुनें। ज़रूरी नहीं है कि आप हरटेक का सोलर पैनल लगवाएं, बल्कि आपको जहां से ठीक लगे आप वहां सम्पर्क करें। पर आप ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल करें।”

यदि आपको इस कहानी ने प्रभावित किया और आप सोलर एनर्जी के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो 91-7341141743 पर सम्पर्क कर सकते हैं!

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: In order to encourage people to adopt solar energy, Hartek Solar Pvt Ltd was started in 2017 by Simarpreet Singh. The Chandigarh-based company aims to offer small-scale solar solutions and is fostering a culture of community-driven clean energy through its customized residential rooftop solar kits. The company has built the product in such a way that it allows people to monitor the energy generated and at the same time calls for minimal maintenance cost.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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