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“ताकि स्थिति कुछ तो बदले,” 18 वर्षीय रोहन ने 1, 400 ग्रामीणों को बांटे फर्स्ट एड किट!

भारत में 9 में से एक व्यक्ति को आम स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं!

तीन साल पहले, एक कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए रोहन चड्ढा गुरुग्राम के पास एक गाँव में गए थे। गाँव में एक गली से गुजरते हुए उन्होंने एक बच्ची को देखा जिसको काफ़ी चोट लगी थी और खून निकल रहा था। जब रोहित ने उससे पूछा तो पता चला कि उसको दो दिन पहले यह चोटी लगी है।

पर सबसे ज़्यादा बुरा उन्हें इस बात का लगा कि उसके आस-पास से गुजरने वाले लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा और वहां किसी के पास कोई फर्स्ट एड किट तक नहीं थी।

“मैं अपने घर गया और अपने माता-पिता को उस लड़की के बारे में बताया। वे मुझे फिर से वहां लेकर गए और उस लड़की के इलाज में उसकी मदद की,” द बेटर इंडिया से बात करते हुए रोहन ने बताया।

रोहन के किशोर मन पर इस घटना का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और उन्होंने इस समस्या पर काम करने के लिए ‘श्री सहायता’ नाम से अपनी पहल शुरू की। इसके ज़रिए वे गाँव के गरीब परिवारों और झुग्गी-झोपड़ियो में रहने वाले लोगों तक मूलभूत प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साधन पहुंचाने में जुटे हैं।

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18 वर्षीय रोहन बताते हैं कि गाँव के लोगों में अभी भी व्यक्तिगत स्वच्छता या फिर फर्स्ट एड किट जैसी कुछ बुनियादी बातों की कोई जानकारी नहीं है। इसलिए उन्होंने यह पहल शुरू की ताकि वे गाँववालों को इस तरह के कुछ ज़रूरी विषयों पर जागरूक करें।

“स्थिति को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए, मैंने ‘श्री सहायता’ की शुरुआत की, जिसके ज़रिए गाँव के लोगों को प्राइमरी हेल्थ केयर किट दी जाती है और उन्हें कुछ ज़रूरी विषय जैसे फर्स्ट एड, साफ़-सफाई आदि पर शिक्षित किया जाता है,” उन्होंने आगे कहा।

उनका संगठन सबसे पहले हेल्थकेयर किट लोगों को बांटता है और फिर उन्हें इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है।

तीन साल से अस्तित्व में आया ‘श्री सहायता संगठन’ तीन गाँवों में अब तक लगभग 1400 लोगों को किट बाँट चूका है और उन्हें बेसिक हेल्थकेयर और स्वच्छता के बारे में जागरूक कर रहा है।

फर्स्ट एड किट 

Assembling the kits in Gurugram

“अपनी रिसर्च के दौरान मुझे कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पता चले। मुझे पता चला कि भारत में 9 में से एक व्यक्ति को आम स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं। अपनी पहल के ज़रिये मैं प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं देना चाहता हूँ, और स्वास्थ्य, स्वच्छता और सैनिटेशन के बारे में लोगों को जागरूक करना चाहता हूँ,” रोहन ने कहा।

शुरुआत में उन्होंने गुरुग्राम के आसपास के गाँवों में रह रहे लोगों की स्थिति के बारे में समझा। इसके बाद उन्होंने एक हेल्थकेयर किट तैयार की, जिसमें सही फर्स्ट एड सप्लाइज और कुछ जनरल मेडिसिन हों ताकि लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा मदद मिल सके।

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उन्होंने बताया कि इस काम में कई डॉक्टर्स ने उनकी मदद की है। इस हर एक किट में अलग-अलग तरह की चोटों के लिए पट्टी, एक वुडेन स्प्लिंट, एक आय पैच, खांसी और फ्लू के लिए कुछ जनरल दवाइयां, एक बर्न शीट और डॉक्टर्स की सलाह पर कुछ अन्य दवाइयां रखी गयी हैं।

हर एक किट की कीमत 320 रुपये है और उनके पास बांटने के लिए पर्याप्त किट्स हों, इसके लिए रोहन ने 40 हज़ार रुपये का फंड्स भी इकट्ठा किया।

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फंड इकट्ठा करने के लिए रोहन के कुछ तरीके:

1. उन्होंने एक आर्ट ऑक्शन आयोजित किया, जिसमें उन्होंने कुछ मशहूर आर्टिस्ट और छात्रों द्वारा दान में दी गयी पेंटिंग्स को बेचकर फंड्स जुटाए।

2. अलग-अलग मंचों पर अवेयरनेस और डोनेशन ड्राइव किए।

3. बेक-सेल्स में उन्होंने कुछ बेक्ड प्रोडक्ट्स और खाने-पीने की चीज़ें बेचकर भी पैसे इकट्ठा किए।

रोहन बताते हैं कि उनके अभियान में सबसे ज़्यादा योगदान उनके 80 वॉलंटियर्स का है जोकि उनकी तरह ही छात्र हैं। इनकी मदद से ही वे 350 किट्स के लिए फंड्स जुटा पाए। “एक बार फंड्स इकट्ठा होने के बाद और सभी ज़रूरी चीज़ें आने के बाद, हमने इन किट्स को तैयार किया। इन किट्स को हमने गुरुग्राम के दो गाँव- घाटा और सुकराली में बांटे हैं।”

सिर्फ़ किट्स बांटकर ही रोहन और टीम नहीं रुकी, बल्कि उन्होंने गाँव वालों को फर्स्ट एड किट्स का इस्तेमाल कैसे करें और कुछ बेसिक दवाइयां कैसे इस्तेमाल की जाती हैं- इन सब टॉपिक्स के लिए वर्कशॉप भी दीं।

Rohan Chadha in Gurugram

संगठन के बारे में

अपने बारे में बताते हुए रोहन कहते हैं कि उन्होंने इसी साल गुरुग्राम के द श्री राम स्कूल से अपनी स्कूली की पढ़ाई पूरी की है। अपने स्कूल के दौरान ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की। रोहन फ़िलहाल यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो से डबल डिग्री को-ऑपरेटिव प्रोग्राम- मैनेजमेंट और फाइनेंस में बीबीए और क्वांटिटेटिव फाइनेंस और स्टेटिस्टिक्स में बीएससी कर रहे हैं।

“टोरंटो शिफ्ट करने से मेरी ज़िंदगी में बहुत बदलाव आया है। बाकी काम के लिए, हमने पहले से ही दिल्ली और हरियाणा के कुछ गाँवों को शोर्टलिस्ट कर लिया है, जहां हम अगले फेज़ में किट्स बाटेंगे,” उन्होंने बताया।

इन गाँवों को चुनते समय रोहन और उनकी टीम कुछ मानकों को ध्यान में रखती है जैसे कि जनसँख्या, पब्लिक और प्राइवेट अस्पताल से गाँव की दूरी, क्लीनिक्स आदि से दूरी, कुछ कॉमन बीमारियाँ और चोट की घटनाएं आदि।

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रोहन अब अपने संगठन को एक एनजीओ के रूप में रजिस्टर करने के लिए काम कर रहे हैं।

“मैं श्री सहायता को एक सेल्फ-सस्टेन संगठन बनाने के मॉडल पर काम कर रहा हूँ, जिससे कि मेरी भागीदारी पर ही यह निर्भर न रहे। मुझे इस काम में सपोर्ट करने के लिए मैं एक स्ट्रोंग टीम बनाना चाहता हूँ और उम्मीद है कि हम श्री सहायता को और आगे ले जाएंगे और इन गाँवों में बदलाव ला पाएंगे।”

यदि आप रोहन से संपर्क करना चाहते हैं या फिर उनके संगठन को आगे बढ़ने में मदद करना चाहते हैं तो उनका फेसबुक पेज यहाँ पर देखें!

 

मूल लेख: विद्या राजा 

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: 18-YO Gurugram Boy, Rohan Chadha is distributing First-Aid Kits to Underprivileged Villagers. He has started ‘Shri Sahayata’ initiative for this noble work and distributed 350 kits till date. 


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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