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महज 4 घंटे में आपके पेट्रोल टू-व्हीलर को इलेक्ट्रिक स्कूटर में बदल सकता है यह स्टार्टअप

Convert Petrol Scooter to Electric

Zuink Retrofit की इलेक्ट्रिक कन्वर्जन किट सिर्फ 26,999 रुपये में आपके पेट्रोल से चलने वाले पुराने टू-व्हीलर को इलेक्ट्रिक में बदल सकती है।

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर आज हर कोई परेशान है। ह़जार रुपए का पेट्रोल कब भरवाया और कब खत्म हो गया पता ही नहीं चलता। लोग अब विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ देखने लगे हैं। लेकिन इनकी कीमतें भी कुछ कम नहीं है। उसे खरीदने से पहले दो बार जेब की तरफ देखना पड़ता है। ऐसे में अगर हम कहें कि पेट्रोल से चलने वाले आपके पुराने स्कूटर को ही इलेक्ट्रिक स्कूटर में बदला जा सकता है और वह भी काफी कम कीमत में….. तो? 

बेंगलुरु स्थित कंपनी Zuink Retrofit की बदौलत अब न तो आपको ई-बाइक के लिए लाखों रुपए खर्च करने की जरूरत है और न ही लंबे समय तक इंतजार करने की। यह स्टार्टअप सिर्फ 4 घंटे में आपके स्कूटर को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदल देगा। इसके लिए आपको सिर्फ 26,999 रुपये खर्च करने होंगे।

Zuink Retrofit, डॉकलेस स्कूटर शेयरिंग कंपनी ‘बाउंस’ का एक हिस्सा है।

अभी कर लें बुक

ज़ुइंक रेट्रोफिट के उपाध्यक्ष सचिन शेनॉय ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा, “अगर आप चाहते हैं कि आपके पास अपना ईवी स्कूटर हो, लेकिन ज्यादा पैसे खर्च करने का मन नहीं है या फिर आपकी जेब इसकी इजाजत नहीं दे रही, तो आपके लिए यह विकल्प सबसे बेहतर है।” वह आगे कहते हैं, “मान लिजिए आपके पास सात साल पुरानी एक होंडा एक्टिवा है और उसे बदलकर आप नई ईवी लेना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको 70 हजार से एक लाख रुपये के बीच खर्च करना होगा। लेकिन हम सिर्फ 26,999 में इसे इलेक्ट्रिक स्कूटर में बदल देंगे।” 

फिलहाल इस किट को बेंगलुरु में 499 रुपये देकर बुक कराया जा सकता है। दिसंबर से ज़ुइंक रेट्रोफिट इसके इंस्टॉलेशन का काम शुरु कर देगा। कंपनी को उम्मीद है कि वह जून 2022 तक दिल्ली, अहमदाबाद, पुणे, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों तक अपनी पहुंच बना लेगी। 

स्कूटर को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट क्यों कराएं?

सचिन ने बताया, “पेट्रोल पर चलने वाले स्कूटर को इलेक्ट्रिक में बदलने के बाद, एक महीने में फ्यूल पर होने वाला खर्चा लगभग आधा हो जाएगा। हमारे हिसाब से एक पेट्रोल स्कूटर पर ग्राहक, प्रति किलोमीटर 3 या 3.5 रुपये खर्च करता है। अगर आप इसे इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करा लेते हैं, तो यह खर्च घटकर लगभग डेढ़ रुपये प्रति किलोमीटर रह जाएगा।”

स्कूटर जितना पुराना होगा, उसका इंजन उतना ज्यादा धुआं छोड़ेगा। ऐसे में अगर आपके पास पांच से छह साल पुरानी होंडा एक्टिवा या टीवीएस स्कूटी जेस्ट है, तो उसे ईवी में बदलना ही समझदारी है। इसका सीधा सा मतलब है कि आप फ्यूल बचाने के साथ-साथ पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचा रहे हैं। सचिन दावा करते हैं कि इस IC-इंजन वेरिएंट की चेसिस (chasis), बाजार में मिलने वाले ईवी की तुलना में काफी मजबूत है और कनवर्जन की प्रक्रिया में चेसिस को मजबूत बनाए रखा गया है।

अब तक, Zuink Retrofit ने IC-इंजन स्कूटरों के लगभग चार मॉडलों को बदलना शुरू कर दिया है, जिनमें TVS Scooty Zest, Honda Activa 3G, 4G और 5G शामिल हैं। ये पिछले एक दशक में सबसे अधिक बिकने वाले मॉडल रहे हैं। आगे चलकर कंपनी सुजुकी एक्सेस, हीरो प्लेजर और स्कूटर के अन्य मॉडल्स पर भी काम करना शुरू कर देगी।

स्कूटर को कैसे बदलते हैं ईवी में?

Petrol Scooter Converted to Electric (EV)
Converted to Electric (Image courtesy Zuink Retrofit)

सचिन ने बताया, “अगर हम ग्राहकों की नज़र से देखें, तो यह सर्विसिंग के लिए अपने स्कूटर को अधिकृत सर्विस सेंटर पर छोड़ने जैसा है। आप इसे सुबह छोड़ दें और दोपहर में आपको तैयार मिलेगा। पहले आने वाले ग्राहकों के लिए हमारे पास कुछ ऑफर और डिस्काउंट भी हैं। आप चाहें, तो 899 रुपये प्रतिमाह की ईएमआई का विकल्प भी चुन सकते हैं। अगर आप रोजाना 25 से 30 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, तो इसकी ईएमआई देने के बाद भी आपका खर्च, हर महीने पेट्रोल पर होने वाले खर्च से कम ही रहेगा।”

पेट्रोल स्कूटर को इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करते समय, सबसे पहले इसके फ्यूल टैंक और साइलेंसर को हटाया जाता है और फिर इसमें रियर व्हील माउंटेड हब मोटर के साथ एक इलेक्ट्रिक पॉवरट्रेन इंस्टॉल करते हैं। साथ ही इसमें 2kwh लिथियम-आयन बैटरी लगाई जाती है। यह स्टार्टअप, पिछले डेढ़ साल में लगभग 200+ IC- इंजन स्कूटरों को इलेक्ट्रिक में बदल चुका है। ये सभी बाउंस के डॉकलेस में तैयार खड़े हैं।

सभी कंपोनेंट्स भारत में किए गए हैं डिजाइन

वह बताते हैं, “ये रेट्रोफिट स्कूटर वास्तव में मजबूत होते हैं और पूरी तरह से परीक्षण करने के बाद ही इस किट को मार्केट में लाया गया है। किट लगाने के बाद आपको बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगेगा कि यह IC-इंजन से अलग है। सीधे फैक्टरी से निकले ई स्कूटर में, कभी-कभी तेज मोड़ लेते समय ब्रेक लगाने और एक्सलरेटर के बीच एक सेकंड का अंतर आ जाता है। वे इतने बेहतर तरीके से कट नहीं ले पाते जैसा कि एक IC – इंजन लेता है। लेकिन हमारे कनवर्टेड स्कूटर के साथ ऐसा कुछ नहीं है। उसे हम IC – इंजन से बेहतर तो नहीं कह सकते, लेकिन यह काम कुछ वैसा ही करता है।

ये कन्वर्टेड स्कूटर 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलते हैं और एक बार के चार्ज में लगभग 55 किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं। हालांकि परीक्षण के दौरान यह रेंज 80 किलोमीटर तक भी पहुंच गई थी। जबकि बाजार में मौजूद ईवी इससे कम स्पीड देते हैं और इसकी तुलना में काफी महंगे भी हैं।

सचिन के अनुसार, रेट्रो फिट के सभी कंपोनेंट्स को भारत में डिजाइन कर बनाया गया है और उन्हें यहीं असेंबल भी किया जाता है। इन सभी को स्टार्टअप की कड़ी निगरानी में तैयार किया जाता है।

बैट्री स्वैपिंग तकनीक 

सभी कन्वर्टेड स्कूटर, Zuink Retrofit द्वारा बनाई गई बैटरी स्वैपिंग तकनीक पर काम करेंगे। बैंगलोर में 150 से ज्यादा बैट्री स्वैपिंग स्टेशन हैं। कंपनी का लक्ष्य, दिसंबर तक हर एक किलोमीटर पर एक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बनाने का है। वह कहते हैं, “बेंगलुरु में हमने पिछले डेढ़ सालों में 3 लाख बैटरी स्वैप की है। इस सिस्टम में आपको बैटरी रखने, इसे घर ले जाने, रखरखाव की चिंता करने और बिजली पर पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं होती। आप इसे हम से 80 रुपये प्रति स्वैप के हिसाब से किराए पर लेकर, लगभग 55 किलोमीटर की सवारी करें और जब यह डिस्चार्ज होने लगे तो पास के स्टेशन पर फिर से स्वैप कर लें। बैटरी स्वैप करने में तीन मिनट से भी कम का समय लगता है।”

सचिन आगे बताते हैं, “बैटरी को 1200 से 1300 बार चार्ज करने के बाद बदलना पड़ता है। क्योंकि इसके बाद ये बेकार हो जाती हैं। अगर आपके पास अपनी बैटरी है, तो उसे हर तीन साल में एक बार बदलना होगा। यह एक ऐसी जानकारी है जिसके बारे में अधिकांश ईवी निर्माता बात नहीं करते। लेकिन हमारे बैटरी स्वैपिंग मॉडल के साथ ग्राहक को इस तरह का कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा।”

नए आर सी से नंबर प्लेट तक, सब नया करके देगी कंपनी

एक बार ग्राहकों के बीच इस किट को ले जाने के बाद रजिस्ट्रेशन का भी ध्यान रखा जाएगा। जब आपका वाहन इलेक्ट्रिक में तब्दील हो जाएगा, तो उसके लिए नए आर सी की जरूरत होगी। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विशेष हरी और सफेद नंबर प्लेट भी जरुरी होती है। इसकी सारी जिम्मेदारी कंपनी की होगी। हालांकि रजिस्ट्रेशन फी का भुगतान ग्राहक को ही करना पड़ेगा।

आखिर में सचिन कहते हैं, “इस सारी प्रक्रिया में 15 से 20 दिन लग जाएंगे। हमारा मकसद ग्राहकों की परेशानी को कम करना है, ताकि वे बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पेट्रोल टू व्हीलर को इलेक्ट्रिक व्हीकल में कन्वर्ट करा सकें।”

मूल लेखः रिनचेन नोर्बु वांगचुक

संपादनः अर्चना दुबे

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