लुधियाना में रहने वाली रूह चौधरी, पिछले कई सालों से इको-फ्रेंडली तरीकों से अपना जीवन जी रही हैं और साथ ही, वह हर दिन लगभग 75 बेसहारा जानवरों को खाना खिलाती हैं।
फरीदाबाद में ऑटो पिन स्लम में रहने वाले 20-25 बच्चों ने पहले साथ में मिलकर प्लास्टिक की खाली-बेकार पड़ी बोतलों और अन्य कचरे से 300 से भी ज्यादा 'इको ब्रिक' बनाई हैं और इन इको ब्रिक का इस्तेमाल उन्होंने अपने स्लम में 'इको बेंच' बनाने के लिए किया है।
मुंबई की रुचिरा सोनलकर, अपने पति रोहन के साथ मिलकर ‘Native Tongue’ नामक एक कंपनी चलाती हैं, जिसके अंतर्गत वे प्राकृतिक और प्रेजर्वेटिव-फ्री जैम, स्टोन ग्राउंडनट बटर, सेवरी स्प्रेड, फ्रूट कॉर्डियल्स और डेजर्ट सॉस जैसे कई स्वादिष्ट खाद्य उत्पाद बेचते हैं।
मेरठ में जन्मीं, अर्जिता सेठी ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में, अपने पति अंशुल धवन के साथ मिलकर, एक EdTech स्टार्टअप ‘Equally’ की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत शिक्षा के लिए ‘ऑगमेंटेड रियलिटी’ (AR) का उपयोग किया जाता है।
ध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में 28 वर्षीया डॉ. नूरी परवीन, जरूरतमंद और गरीब लोगों के लिए क्लिनिक चला रही हैं, जहाँ वह मात्र 10 रुपये में मरीज़ों का इलाज करती हैं।
केरल के रहने वाले दो MBA ग्रैजुएट्स, हाफिज रहमान और अक्षय रवीन्द्रन ने मिलकर अचार बनाने का व्यवसाय Athey Nallatha लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे माँ के हाथ से बने अचार को ग्राहकों तक पहुँचा रहे हैं और 34 गृहणियों को रोजगार दे रहे हैं।
असम के धेमाजी में रहने वाले नबजीत भराली ने जरूरतमंदों व दिव्यांगजनों के लिए कई ज़रूरी आविष्कार किए हैं, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
वाराणशी सुब्रया भट के नेतृत्व में सुपारी किसानों ने 1973 में कर्नाटक के मंगलुरु में Campco कंपनी का गठन किया था, जो आगे चलकर भारत की तीसरी सबसे बड़ी चॉकलेट कंपनी बनी।