"बड़े किसानों के लिए तो बाज़ार में उपलब्ध मशीनें खरीदना बहुत आसान है, लेकिन छोटे किसानों के लिए यह बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में अगर हम भी सिर्फ मुनाफे के बारे में सोचेंगे तो उनका क्या होगा?"
'अगर दूसरों के कॉपी करने से मेरा यह डिजाईन देशभर के किसानों तक पहुँच सकता है और उनके लिए हितकर हो रहा है तो कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि हमारा उद्देश्य किसानों की भलाई है।'
रवि के छोटे भाई अक्षय शर्मा भी एक निजी यूनिवर्सिटी में जाॅब कर रहे थे। पर रवि की सफलता को देखते हुए अब उन्होंने भी नौकरी छोड़कर भाई का साथ देने का फैसला लिया है।
"साल 2008 में जब कैंसर के चलते मैंने अपनी पत्नी को खो दिया, तो मुझे लगा कि मैं अपने लेवल पर लोगों का स्वास्थ्य सुधारने के लिए जो कर सकता हूँ, ज़रूर करूँगा।"
योगेश के घर वाले चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी की तैयारी करे लेकिन योगेश ने खेती को चुना और 7 किसानों के साथ मिलकर जीरे की आर्गेनिक खेती शुरू की। आज उनका यह सफर 3000 किसानों के साथ जापान और अमेरिका तक पहुँच चुका है!