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दिल्ली: 15 साल पुरानी नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती; आज हर महीने कमाती हैं 1 लाख रूपये!

अपने फार्म से मोनिका हर हफ्ते लगभग 45 किलोग्राम मशरूम की उपज लेती हैं!

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साल 2018 में दिल्ली की रहने वाली मोनिका चौधरी ने जब अपना मशरूम फार्म शुरू किया था, तो शुरू के दो-तीन महीने में उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ा। प्रॉफिट तो दूर की बात है, वह अपनी लागत भी मैनेज नहीं कर पा रही थीं। पर अपनी मेहनत और जुनून से उन्होंने मात्र एक साल में ही तस्वीर पूरी तरह बदल दी। अब वह मशरूम की खेती से महीने के लगभग 1 लाख रुपये कमा रही हैं।

किसानी के लिए छोड़ी 15 साल की नौकरी:

मोनिका ने 15 साल से भी ज़्यादा समय तक, सरकारी संगठनों के साथ बतौर डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल काम किया है। लेकिन हम सभी लोग करियर और पैशन के बीच होने वाली कशमकश से वाकिफ हैं। मोनिका के साथ भी यही हो रहा था। भले ही वो सरकारी संगठनों के लिए कैंपेन डिजाईन कर रही थीं, लेकिन उन्हें पता था कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करना उनका पैशन है।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए मोनिका ने बताया, “मैं स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य समस्याओं पर एक ब्लॉग चलाती थी और डाइट और लाइफस्टाइल के क्षेत्र में मुझे काफी दिलचस्पी थी। जब मैंने अपनी जॉब छोड़ी, तब मैं दो चीजों को लेकर बहुत स्पष्ट थी- एक, मैं अपना पैशन फॉलो करुँगी और दूसरा, मैं इसके लिए बाकी सबकी तरह कोई ऑनलाइन प्लेटफार्म नहीं बनाऊंगी। मुझे ज़मीनी स्तर पर अपना कुछ करना था।”

उन्होंने पारंपरिक खेती में अपनी किस्मत आजमाई, लेकिन मोनिका को पता था कि दिल्ली जैसे शहर में उन्हें काफी इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होगी और फिर ज़रूरी नहीं कि यह कामयाब ही हो।

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ऐसे में, एक दिन अचानक उनके पति के एक दोस्त ने उन्हें डायरेक्टरेट ऑफ़ मशरूम (डीएमआर) में ‘मशरूम फार्मिंग’ के ट्रेनिंग कोर्स के बारे में बताया। उन्होंने इस ट्रेनिंग के लिए जाने का फैसला किया।

“मशरूम, प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स का एक अच्छा स्त्रोत है। आज के समय में ज़्यादातर लोग जंक फ़ूड खाते हैं और उससे कोई ज़रूरी पोषण नहीं मिलता। ऐसे में, रेग्युलर तौर पर मशरूम खाना, पोषण का शॉर्टकट है। इसलिए मुझे एक कमर्शियल मशरूम फार्म सेट-अप करने का ख्याल आया,” उन्होंने बताया।

जैविक मशरूम के लिए झेली परेशानियां

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डीएमआर में ट्रेनिंग के बाद, जून 2018 से मोनिका ने अपना फार्म सेट-अप करना शुरू किया। लगभग एक महीने में सभी काम पूरे हो गए, लेकिन उनका संघर्ष अभी बाकी था।

“मैं ऐसे लोगों के साथ कॉन्टेकट में थी जिनका मशरूम का फार्म है। पर मैं जब भी उनसे पूछती कि कीट से फार्म को कैसे बचाना है या फिर उर्वरक क्या इस्तेमाल करें, तो सब मुझे केमिकल इस्तेमाल करने की सलाह देते। मैं ऐसा नहीं करना चाहती थी क्योंकि फिर क्या फायदा स्वास्थ्य के क्षेत्र में जाने का, अगर मैं केमिकल ही इस्तेमाल करूँ तो?” उन्होंने आगे कहा।

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वैसे तो मशरूम की खेती पर ऑनलाइन वीडियो, किताब और कुछ आर्टिकल्स जैसी काफी सामग्रियां उपलब्ध हैं, लेकिन कोई भी बिना केमिकल के इस्तेमाल के फार्म को कैसे चलाए, इस बात का सही जवाब नहीं दे पा रहा था।

“मेरे पास एक ही विकल्प बचता था – मशरूम की खराब फसल को फेंकने का। इससे मेरा खर्चा और बढ़ता गया। लेकिन जैविक मशरूम उगाना तो जैसे मेरी जिद हो गयी थी। यह मेरे सीखने का समय था और अगले  3-4 महीने तक, मैंने खराब मशरूमों को फेंका, नई चीजें सीखीं और इन पर अमल किया। सितम्बर 2018 में, आखिरकार मैं सही ट्रैक पर आई,” उन्होंने बताया।
पहले महीने में मोनिका ने लगभग 20-25 किलोग्राम मशरूम की फसल ली। आज, वे हर हफ्ते लगभग 45 किलोग्राम मशरूम की उपज लेती हैं।

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मूल लेख: तन्वी पटेल 

संपादन – मानबी कटोच

Summary: Monika Chowdhary, a Delhi woman, worked as a digital marketing professional for government institutions for more than 15 years. Last year, she left her job and started her stint with farming, particularly Mushroom Farming. Right now, she is earning almost 1 lac per month and also, spreading her knowledge to others through workshops.


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