घूमने के लिए नौकरी छोड़ना ज़रूरी नहीं! 200 शहर घूम चुकीं शिवांगी से जानें कैसे बनाई योजना

Shivangi Sharma, Travel vlogger

“ज्यादातर भारतीय माता-पिता सोलो ट्रैवेल का कॉन्सेप्ट नहीं समझते हैं। उन्हें यह अजीब लगता है और एक लड़की होने के नाते सब कुछ और मुश्किल हो जाता है। उन्हें समझाने के लिए मैंने उस यात्रा के हर मिनट की योजना बनाई, जिसमें मेरा रहना, खाना सब शामिल था और फिर अपने माता-पिता को दिखाया। मैंने सोचा था कि इस तरह की योजना मेरे पक्ष में काम करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"

साल 2014 की बात है। शिवांगी शर्मा (Shivangi Sharma) एक ही दिन में लंदन के तीन रेस्तरां से वापस आ चुकी थीं। उन्हें कहीं भी खाली टेबल नहीं मिली जहां वह बैठ सकें। लंदन में पढ़ने आई शिवांगी वहां नई भी थीं और काफी शर्मीली भी। वह वहां के ‘टेबल पुल’ कॉन्सेप्ट से भी एकदम अंजान थीं। टेबल पुल का मतलब है कि आप अजनबियों के साथ भी एक टेबल पर बैठ सकते हैं।

लेकिन शिवांगी इतनी शर्मीली थीं कि उन्हें अजनबियों और यहां तक कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अपने साथ के छात्रों से बात करने के लिए भी काफी हिम्मत जुटानी पड़ती थी। यह पहली बार था, जब शिवांगी अपने परिवार से दूर, अकेले रह रही थीं। वह हर समय खोई-खोई रहती थीं।

उन्हें केवल शहर को घूमने और देखने में ही सुकून मिलता था। यह शहर मेट्रो, बिग बेन और टेम्स नदी के लिए मशहूर है। अपने सेमेस्टर के अंत तक वह शहर का एक-एक हिस्सा घूम और देख चुकी थीं।

समय के साथ बदलती गईं चीज़ें

Shivangi Sharma
Shivangi Sharma

धीरे-धीरे समय बीतता गया और अपनी इस घूमने की आदत के साथ, चंडीगढ़ में जन्मी शिवांगी (Shivangi Sharma) 30 साल की हो गईं। अब तक वह एक लंबा सफर तय कर चुकी हैं और अब वह शर्मीली और सहमी सी लड़की भी नहीं रहीं। अब तो उन्होंने एक नए सफर की शुरुआत कर ली है, जहां वह नई संस्कृति, नए लोग और नई-नई जगहों को देखने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अपनी यात्राओं के अनुभव को वह व्लॉग के रूप में ऑनलाइन साझा करती हैं और उनके करीब 75000 फॉलोअर्स हैं।

पेशे से वकील, शिवांगी नई जगहें देखने के लिए अपने कोर्ट में होने वाली छुट्टियों और ऑनलाइन हियरिंग की तारीखों का इस्तेमाल करती हैं। जब से उन्होंने अपना इंस्टा अकाउंट बनाया है, तब से ही कई ब्रांड, होटल चेन, प्रीमियम कॉटेज, न्यूज मीडिया हाउस और यहां तक कि सरकार ने भी विभिन्न प्रकार के कोलैबरेशन में दिलचस्पी दिखाई है।

लास्ट मोमेंट पर दोस्तों ने कर दिया मना

शिवांगी उन ट्रैवलर्स में से नहीं हैं, जो अपनी छुट्टियों को पैसे में बदलने में या अपनी फुल-टाइम नौकरी छोड़कर अपने घूमने के शौक़ से पैसे बनाने का निर्णय लेते हैं। जब उन्होंने अकेले यात्रा करने का फैसला किया, तो वह न तो अपनी नौकरी से निराश थीं और न ही अपनी वास्तविकता से बचने के अवसर की तलाश में थीं।

उनकी बस एक साधारण सी इच्छी थी। वह अपने दोस्तों के साथ रोड ट्रिप पर जाना चाहती थीं। पुराने दिनों को याद करते हुए शिवांगी (Shivangi Sharma) कहती हैं, “लंदन कैफे वाली घटना को दो साल बीत चुके थे और अब मैं पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करती थी। ब्रिटेन में मेरी डे ट्रिप ने मुझे नई संस्कृतियों और व्यंजनों से परिचित कराया था और क्योंकि भारत इतना विविध राष्ट्र है, मुझे पता था कि मुझे बस वहां एक रोड ट्रिप पर जाना है। लेकिन अंतिम समय पर मेरे दोस्त पीछे हट गए। मैं अपना ट्रिप कैंसिल ही करने वाली थी कि मुझे याद आया कि इस ट्रिप पर जाने के लिए मैंने कितनी मुश्किल से ड्राइविंग क्लास की ट्रेनिंग ली है। तो बस साल 2016 में, मैंने अपने माता-पिता से झूठ बोला और दक्षिण भारत देखने निकल पड़ी।”

“कितने भी सतर्क रहें, यात्रा के दौरान छोटी-मोटी घटनाओं को टाला नहीं जा सकता”

 Kodinhi village in Kerala with the twins
Shivangi in Kodinhi village in Kerala with the twins

अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं को होने वाली परेशानियों और समस्याओं के बारे में उन्होंने काफी कुछ सुना था। खासकर तमिल नाडु के अरियालुर गैंगरेप की घटना ने उन्हें और सतर्क कर दिया था। सुरक्षा को लेकर वह जोर देकर कहती हैं कि यह नहीं कहा जा सकता कि भारत महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं है।

हालांकि वह (Shivangi Sharma) कुछ बातों को याद करते हुए कहती हैं कि कितने भी सतर्क रहें, यात्रा के दौरान छोटी-मोटी घटनाओं को टाला नहीं जा सकता है।

एक घटना को याद करते हुए शिवांगी कहती हैं कि बेंगलुरु में एक रेंटल कार कंपनी ने कई बार उन्हें किराए पर एक ड्राइवर लेने के लिए कहा। लेकिन वह अपनी योजना पर टिकी रहीं और खुद कार चलाकर मदिकेरी और उसके बाद कूर्ग, वायनाड (केरल), ऊटी (तमिलनाडु), और वापस कर्नाटक के बांदीपुर गईं।

शिवांगी कहती हैं, “मेरे दोस्तों और सहकर्मियों ने अकेले यात्रा करने के मेरे फैसले का समर्थन किया। मुझे नहीं पता था कि पंचर टायर को कैसे ठीक किया जाए या हेडलाइट्स को कैसे बदला जाए। मैं केरल में सीमा पार करते समय आरटीओ का परमिट लेना भूल गई। लेकिन पुलिस ने मेरी बात समझी और मुझे तमिल नाडु पहुंचने के बाद पर्मिट लेने के लिए कहा।”

एक पुलिस वाले ने 5 किमी तक किया Shivangi Sharma का पीछा

हमारे देश में हमें बचपन से सिखाया जाता है कि किसी अजनबी पर भरोसा नहीं करना, सतर्क रहना। शिवांगी उस समय बहुत डर गईं, जब एक पुलिस वाले ने उनका 5 किमी तक पीछा किया और बाद में उसे एक विशेष स्थान पर छोड़ने के लिए कहा।

उस घटना को याद करते हुए शिवांगी कहती हैं कि जब पुलिस वाला कार में बैठ गया, तो उसने महसूस किया कि मैं काफी असहज और थोड़ा डरी हुई हूं। वह कहती हैं, “उसने मुझे अपने बारे में बताया और मुझे सहज करने की कोशिश की। जब मैंने उसे अपने पर्मिट के बारे में बताया, तब उसने रास्ते से आरटीओ में किसी को फोन किया और मुझे बिना ऑफिस गए ही पर्मिट मिल गया। इस घटना से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा।”

बस फिर तो एक साल बाद वह राजस्थान की सुनसान सड़कों और रेगिस्तान पर कार दौड़ा रही थीं। इसी साल उन्होंने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का दौरा भी किया। उन्होंने बैग पैकिंग और यात्रा के दौरान हॉस्टल में रहने का भी मजा लिया।

हिमाचल में, जब खराब मौसम के कारण उसकी पैराग्लाइडिंग इवेंट रद्द कर दी गई, तो वह थोड़ी दुखी हुईं। लेकिन शिवांगी को शायद पता नहीं था कि आने वाला समय और दिलचस्प होने वाला है। जल्द ही पब्लिक ट्रान्सपोर्ट पर उनका एक दोस्त बना। नए दोस्त ने उन्हें धर्मकोट में अपने ग्रूप के साथ यात्रा जारी रखने के लिए आमंत्रित किया।

‘ट्रेवलिंग आपको अकल्पनीय तरीकों से बदल सकती है’-Shivangi Sharma

Ziro, Arunachal Pradesh
Shivangi In Ziro, Arunachal Pradesh

शिवांगी बताती हैं, “एक समय था जब लोगों से बात करते समय मुझे अजीब लगता था और यहां मैं एक अजनबी के साथ एक नई जगह पर जा रही थी। यात्रा आपको अकल्पनीय तरीके से बदल सकती है। रास्ते में, मैंने एक अजनबी के साथ यात्रा करने के अपने फैसले पर एक बार फिर सोचा, लेकिन वह यात्रा यादगार बन गई।”

शिवांगी बताती हैं कि दो साल तक अनुभव और ज्ञान इकट्ठा करने के बाद, उन्होंने 2019 में 39 दिनों में 29 भारतीय राज्यों को कवर करने का फैसला किया। यह प्रेरणा उन्हें एक व्यक्ति से मिलने के बाद मिली, जिसने एक महीने में देश भर की यात्रा की थी। लेकिन जब उन्होंने अपनी यह इच्छा जाहिर की, तो उनके दोस्तों ने उनका काफी मजाक उड़ाया। दोस्तों ने उनसे कहा कि ऐसा करना काफी मुश्किल है, खासकर महिलाओं के लिए। 

लेकिन शिवांगी ने अपना मन पक्का कर लिया और इस बार उन्होंने अपने माता-पिता से झूठ बोलने के बजाय, उन्हें सच बताया। महिलाओं के लिए अकेले यात्रा करने का निर्णय लेना आसान नहीं होता। शिवांगी ने भी कई समस्याओं का सामना किया। वह बताती हैं, “ज्यादातर भारतीय माता-पिता सोलो ट्रैवेल का कॉन्सेप्ट नहीं समझते हैं। उन्हें यह अजीब लगता है और एक लड़की होने के नाते सब कुछ और मुश्किल हो जाता है। उन्हें समझाने के लिए मैंने उस यात्रा के हर मिनट की योजना बनाई, जिसमें मेरा रहना, खाना सब शामिल था और फिर अपने माता-पिता को दिखाया। मैंने सोचा था कि इस तरह की योजना मेरे पक्ष में काम करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उल्टे मेरे माता-पिता ने मुझसे दो सप्ताह तक बात नहीं की। वे यह नहीं समझ पाए कि मैंने यह साबित करने की जिम्मेदारी क्यों ली कि भारत महिला यात्रियों के लिए सुरक्षित है।”

हताशा के समय एक इंटरव्यू ने जगाया उत्साह

शिवांगी ने धीरे-धीरे अपने माता-पिता को समझाया और उन सभी राज्यों को कवर किया, जिसकी उन्होंने योजना बनाई थी। उन्होंने 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन चंडीगढ़ से शुरुआत की और 20,000 किलोमीटर की दूरी तय की। उन्हें काफी आश्चर्य हुआ, जब 8 अप्रैल को बीबीसी का एक रिपोर्टर उनका इंटरव्यू लेने के लिए उनके पास पहुंचा।

याद करते हुए वह कहती हैं, “शुरुआती हफ्तों में, मेरे पास कोई समर्थन नहीं था। मेरे माता-पिता फोन करके मुझ पर चिल्लाते थे, मेरे रिश्तेदारों ने मुझे हतोत्साहित किया था और मेरे पास किसी भी तरह की कोई मान्यता नहीं थी। मैं कई रातों से जगी हुई थी और सोना चाहती थी। मैं डरी हुई थी, अकेली थी, निराश थी और हार मानने की कगार पर थी। मेरे साथ बातचीत करने वाले किसी अजनबी ने बीबीसी को मेरी एकल यात्रा के बारे में बताया था और उन्होंने मुझे फोन किया। उस इंटरव्यू ने मुझे वायरल कर दिया और मैं फिर वापस यात्रा के लिए उत्साहित हो गई।”

साल 2019 तक, शिवांगी के फॉलोअर्स की संख्या लगातार बढ़ रही। उनके फॉलोअर्स एक ऐसी लड़की की कहानी और अनुभव सुनने के लिए उत्सुक थे, जो अकेले यात्रा कर रही थी और दिलचस्प, अजीब और मजेदार कहानियां साझा कर रही थी।उसी साल, उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट के माध्यम से उत्तर पूर्व राज्यों को कवर करने की योजना बनाई। शिवांगी का उद्देश्य यह बताना था कि यात्रा के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक सुरक्षित माध्यम है। उन्होंने 7 जून, 2019 को अपनी यात्रा शुरू की।

जब मुख्यमंत्री ने की Shivangi Sharma से मुलाकात

Shivangi at the Hornbill festival in Nagaland
Shivangi at the Hornbill festival in Nagaland

उत्तर पूर्व राज्यों की यात्रा का समय याद करते हुए शिवांगी बताती हैं, “यात्रा पर हुई सबसे अच्छी चीजों में से एक, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से मुलाकात थी। मैं एक बैम्बू कॉटेज में रह रही थी और उस कॉटेज के मालिक को मेरे आने का उद्देश्य पता था। यह बात उन्होंने सीएम को बताई और वह मुझसे मिले। वहां एक पत्रकार भी मौजूद था, जिसने मेरा इंटरव्यू लिया। मेरा चेहरा क्षेत्रीय अखबारों और चैनलों पर था। इसलिए जब मैं अरुणाचल प्रदेश गई, तो एक पुजारी ने मेरे लिए एक सर्किट हाउस की व्यवस्था की।”

शिवांगी कहती हैं कि उन्होंने इतने सालों में 500 पेज की रिसर्च मटीरियल इकट्ठा की है। जब वह किसी नए शहर जाती हैं, तो वह पर्यटन स्थलों का दौरा करना, तो पसंद करती ही हैं, साथ ही अनजाने, अनसुने जगहों पर जाने से भी पीछे नहीं रहतीं। भले ही वे जगहें कितने भी एकांत में हों। ऐसी ज्यादातर जगहों तक पहुंचना काफी मुश्किल होता है। 

वह बताती हैं, “मैं केरल के कोडिन्ही गाँव गई। इस गांव की खासियत है कि यहां सबसे ज्यादा जुड़वा बच्चों का जन्म होता है। यहां हर 1,000 में से 45 माताएं जुड़वां बच्चों को जन्म देती हैं। त्रिशूर का मरोट्टीचल गांव एक चाय बेचने वाले के लिए मशहूर है, जिसने शतरंज के खेल के जरिए शराब की खपत कम की थी। वहीं नागालैंड के लोंगवा ग्रामीणों के पास भारत और म्यांमार की दोहरी नागरिकता है। राजा के महल में एक एलओसी चिह्नित है और हर बार जब आप स्थान बदलते हैं, तो आपके फोन में टाइम जोन बदल जाता है, यह देखना काफी मजेदार था।”

जल्द ही शिवांगी की मिनी सीरीज होगी OTT प्लेटफॉर्म पर रीलीज़

इन अनोखे अनुभवों को रिकॉर्ड करके ही शिवांगी ने ट्रैवलिंग इंडस्ट्री में लोकप्रियता हासिल की है। साल 2019 में, उन्हें पेड कोलैबरेशन मिलना शुरू हुआ और कई लोगों ने अपने ब्रांड आदि को बढ़ावा देने के लिए उन्हें आमंत्रित करना शुरू कर दिया।

ओडिशा राज्य पर्यटन बोर्ड ने उन्हें महामारी के दौरान, राज्य के हर हिस्से का दौरा करने और कंटेंट इकट्ठा करने का आमंत्रण दिया। इसी कंटेंट पर शिवांगी ने एक मिनी-सीरीज़ बनाई है, जिसकी जल्द ही एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ होने की उम्मीद है।

वह (Shivangi Sharma) कहती हैं, “ओडिशा का अवसर तब मिला, जब महामारी के कारण मेरी अमेरिका की यात्रा रद्द हो गई थी। मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी और वहां एक ट्रैवल चैनल के साथ तीन साल काम करने के लिए तैयार थी। महामारी के कारण मेरा जाना नहीं हो सका। लेकिन इस पर दुखी होने के बजाय, मैंने कुछ और करने का सोचा और मेरे लिए यह काम ठीक रहा। अब मैं खुद प्रैक्टिस करती हूं, जो मुझे अक्सर यात्रा करने की अनुमति देता है।”

कई लोगों को, शिवांगी का यात्रा ग्लैमरस और मजेदार लगती है। लेकिन शिवांगी बताती हैं कि कभी-कभी ये यात्राएं एक बदसूरत रूप ले सकती हैं। शिवांगी बताती हैं, “हालांकि मैंने अकेले यात्रा की है और प्रमुख सुरक्षा मुद्दों का सामना नहीं किया है, लेकिन हर समय सतर्क रहना पड़ता है।” वह कहती हैं कि खराब सड़कों और फोन कनेक्टिविटी की प्रॉब्लम के साथ लंबी दूरी की यात्रा करना भी खतरनाक हो सकता है।

Shivangi Sharma को आने लगे थे पेनिक अटैक्स

वह बताती हैं, “जब मैं एक उत्तर पूर्वी गाँव में थी, तब मेरी सगाई टूट गई थी। मेरा दिल टूट गया था और ध्यान हटाने के लिए आस-पास कुछ भी नहीं था। मैं अकेली रोती रहती थी। मुझे पैनिक अटैक भी आते था। सोलो ट्रैवलर्स के लिए होम सिकनेस की समस्या से निपटना जरूरी है। जिन जगहों पर लोग आपको या आपकी भाषा को नहीं समझते हैं, वहां यह कठिन हो सकता है। आप अकेले खाना खा रहे हैं और आपके आस-पास लोग ग्रूप में मौज-मस्ती कर रहे हैं, कभी-कभी यह देखना बहुत डिप्रेसिंग हो जाता है।”

इन सबके बावजूद, शिवांगी (Shivangi Sharma) का जेट-सेटर स्वभाव उन्हें अनछुए क्षेत्रों तक जाने के लिए प्रेरित करता है। उनके नए प्रॉजेक्ट में उनके दो गोद लिए गए कुत्तों के साथ पेट-फ्रेंडली स्थानों की यात्रा करना शामिल है। वह पहले ही कश्मीर और मनाली को कवर कर चुकी हैं। वह एक जगह पर करीब महीने भर रही हैं। 

Shivangi Sharma, Travel vlogger
Shivangi Sharma, Travel vlogger

इसी तरह की यात्रा पर निकलने की इच्छा रखने वालों को सुझाव देते हुए, शिवांगी कहती हैं कि यात्रा से कुछ कमाने या पैसे बचाने के कई तरीके हैं। वह कहती हैं, “चूंकि इस दुनिया में कुछ भी मुफ्त नहीं है, आपको बदले में कुछ देने के लिए तैयार रहना होगा।”

इस संबंध में शिवांगी चार सुझाव देती हैं – 

1. ब्रांड बनाएं

“अपनी यात्रा में कुछ पैसे निवेश करें, मज़ेदार वीडियोज़ बनाएं और अपने सोशल मीडिया हैंडल के लिए बेहतरीन और अनूठी तस्वीरें लें। एक बार जब आपके फॉलोअर्स की संख्या ठीक हो जाए, तो इसे हॉलीडे प्रॉपर्टीज पर पिच करें। अपने आप को एक ब्रांड बनाएं।”

2. वॉलन्टियर

“कई हॉस्टल, होमस्टे और होटल हैं, जिन्हें रोजाना के काम करने, मेहमानों की मेजबानी करने या कंटेंट बनाने के लिए वॉलन्टिर्स की जरूरत होती है। बदले में, वे फ्री रहने की जगह और फ्री काना देते हैं। गूगल या सोशल मीडिया पेजों की मदद से ऐसी जगहों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।”

3. अपना टैलेंट दिखाएं

“अगर आप कंप्यूटर, वीडियोग्राफी, अकाउंटेंसी, कुकिंग या परफॉर्मिंग आर्ट्स में अच्छे हैं तो होटल, हॉस्टल आदि में वर्कशॉप होस्ट कर सकते हैं और बदले में फीस ले सकते हैं।”

4. ब्रांड्स के साथ कोलैबरेट करें

हालांकि, शिवांगी प्रोडक्ट कोलैबरेशन से दूर रहती हैं, वह कहती हैं, “ब्रांड आपको कूपन भेजते हैं, जिनका लाभ आप ट्रांसपोर्ट या आवास पर छूट प्राप्त करने के लिए उठा सकते हैं।” 

मूल लेखः गोपी कलेरिया

संपादनः अर्चना दुबे

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