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अनमोल इंडियंस

Inspiring Indians Stories To Motivate From India. \ भारत के उन प्रेरक नायक नायिकाओं की कहानियां, जो अपने काम से भारत को बेहतर से बेहतरीन बनाने में जुटे हैं!

ईंट भट्टे पर काम से लेकर मणिपुर की पहली ऑटो ड्राइवर बनने का सफर!

By भरत

"लोग मुझ पर हँसे, ताना मारा और मुझे चिढ़ाया, मुझे अपमानित महसूस कराया। लेकिन मेरे पास बहुत कम विकल्प थे, और मेरा एक ही लक्ष्य था- अपने बेटों को अच्छी शिक्षा देना।" - लाईबी ओइनाम

गाँव में उपलब्ध साधनों से ही की पानी की समस्या हल, 25 साल में 500 गांवों की बदली तस्वीर!

By निशा डागर

सिर्फ़ इतना ही नहीं, खेतों की उपज बढ़ाने से लेकर घर-घर में शौचालय बनवाने तक, अवनी मोहन सिंह ने 4 राज्यों के सैकड़ों गांवों को आत्म-निर्भर बनाया है!

18 साल की उम्र में लगाया था पहला पौधा, 6 साल में 22 पार्कों की बदल दी सूरत!

By भरत

भुवनेश ने 18 की उम्र में ही प्लांटेशन को अपनी हॉबी बना लिया और शहर के सभी उजड़े पड़े पार्कों को हरियाली से भरने की सोची।

बिहार में गरीब बच्चों को मुफ़्त कोचिंग दे रहा है न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से पढ़ा यह छात्र!

By निशा डागर

मास्टर्स करने के दौरान किसलय को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिला। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके पास ढेरों मौके थे जहां वे किसी भी बड़े से बड़े गणितज्ञ के साथ काम कर सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने ज्ञान का उपयोग अपने देश के भविष्य के लिए करने की ठानी।

पढ़ाई के साथ संभाली गाँव की ज़िम्मेदारी, 32 लाख का काम करवाया सिर्फ़ 8.5 लाख रुपये में!

By निशा डागर

सिर्फ़ 21 साल की उम्र में सरपंच बनकर अपने गाँव की ज़िम्मेदारी लेने वाले पंथदीप को उनके विकास मॉडल और कामों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा भी राष्ट्रीय सम्मान से नवाज़ा जा चुका हैं!

जब 'मानव कंप्यूटर' शकुंतला देवी ने पति के लिए लड़ी समलैंगिक अधिकारों की लड़ाई!

By निशा डागर

समलैंगिकता पर लिखी किताब में उन्होंने लिखा है, "इस किताब को लिखने के लिए मेरी योग्यता सिर्फ यही है कि मैं एक इंसान हूँ।"

विज्ञान में 90%+ अंक लाते हैं इस सरकारी स्कूल के बच्चे, शिक्षक के तरीकों ने किया कमाल!

By निशा डागर

अपनी ज़िम्मेदारी और छात्रों के भविष्य के प्रति सजग शशिकुमार हर दिन अपने घर से स्कूल तक 60 किमी तक की दूरी तय करते हैं!

15 की उम्र में शादी, 18 में विधवा : कहानी भारत की पहली महिला इंजीनियर की!

जब उनके पति की मृत्यु हुई तब उनकी बेटी सिर्फ 4 माह की थी, अपनी बेटी को वह रिश्तेदार के यहाँ छोड़कर काम पर जाया करती थीं।