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इतिहास के पन्नों से

History Pages | Motivational History | Inspirational History \ इतिहास के वे भुला दिए गए नायक, जिनकी कहानियां हर भारतवासी को ज़ुबानी याद होनी चाहिए!

अपनी भाभी के सती होने से आहत, राम मोहन राय बन गए आधुनिक भारत के निर्माता!

By निशा डागर

22 मई, 1772 को जन्में राजा राम मोहन राय एक महान विचारक व समाज सुधारक थे। पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले राय को भारतीय पत्रकारिता शुरू करने के लिए भी जाना जाता है। उनके प्रयासों ने ही उस समय सती प्रथा पर रोक लगवाई थी। इसके अलावा उन्होंने भारतीय शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया।

एक केमिकल इंजिनियर जिसनें 'अमर चित्र कथा' की 439 कहानियां देकर भारतीय बच्चों को यहाँ की संस्कृति से जोड़े रखा

By निशा डागर

कर्नाटक के करकाल में 17 सितंबर, 1929 को पैदा हुए अनंत पाई को आज ' भारतीय कॉमिक्स के रचियता' और बच्चों द्वारा अंकल पाई के नाम से जाना जाता है। वे भारत की पहली कॉमिक सीरीज अमर चित्र कथा के संस्थापक व चित्रकार थे। उन्होंने रंग रेखा फीचर्स और टिंकल की भी शुरुआत की।

जानिए कौन था भारत का सबसे छोटा स्वतंत्रता सेनानी, मात्र 12 साल की उम्र में हुआ शहीद!

By निशा डागर

साल 1926 में उड़ीसा के ढेंकनाल ज़िले के नीलकंठपुर गांव में बाजी राउत का जन्म हुआ। उन्होंने बैष्णव पट्टनायक द्वारा स्थापित प्रजामण्डल संगठन की युवा विंग 'बानर सेना' को ज्वाइन किया। बाजी देश के लिए सबसे कम उम्र में शहीद होने वाला सेनानी था।

बिनोय, बादल, दिनेश : भारत माँ के तीन सपूतों की अमर कहानी!

By निशा डागर

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में द राइटर्स बिल्डिंग में 8 दिसंबर, 1930 को तीन क्रन्तिकारी बिनोय, बादल व दिनेश ने ब्रिटिश अधिकारीयों पर हमला बोल दिया था। उन्होंने उस हमले में कई अंग्रेजों की जान ली। साथ ही, वे खुद भी शहीद हो गए। इस स्वतंत्रता दिवस उन्हें याद कर के सम्मानित करते हैं।

कहानी तारा रानी श्रीवास्तव की, ब्रिटिश लाठीचार्ज में पति को खोकर भी फहराया तिरंगा!

By निशा डागर

8 अगस्त, 1942 को महात्मा गाँधी ने गोवलिया टैंक मैदान में 'करो या मरो' के नारे के साथ 'भारत छोडो आंदोलन' का आगाज़ किया। जिसमें बिहार के पटना के पास सारण में जन्मीं तारा रानी श्रीवास्तव ने आगे बढ़कर गाँधी जी के आंदोलन का मोर्चा संभाला। 

वह अमरिकी, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और भारत के किसानों को सेब उगाना सिखाया!

By निशा डागर

अमेरिका की जाने-माने परिवार का बेटा और स्टॉक्स एंड पैरिश मशीन कंपनी का वारिस होते हुए भी सैम्युल इवान्स स्टॉक्स जूनियर ने अपना  में कोढ़ से पीड़ित मरीजों की सेवा करते हुए बिताया।उन्होंने अंग्रेज़ों के विरुद्ध भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। ये कहानी है सैम्युल स्टॉक्स जूनियर की सत्यानंद स्टॉक्स बनने की।

जानिए जे.पी दत्ता की फ़िल्म पलटन में दिखाए भारत-चीन युद्ध के जांबाज़ जवानों को!

By निशा डागर

बॉर्डर, रिफ्यूजी और एलओसी कारगिल जैसी फ़िल्में बनाने वाले जे.पी दत्त एक बार फिर अपनी नई फिल्म 'पलटन' के साथ बड़े परदे पर लौटने वाले हैं। । 'पलटन' फिल्म भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच लगभग 50 साल पहले सिक्किम में नाथू ला और चो ला में हुए एक सैन्य स्टैंड-ऑफ पर आधारित है।

कप्तान हनीफ उद्दीन: वह कारगिल हीरो जिसने अपने सैनिकों को बचाने के लिए दी अपनी कुर्बानी!

By निशा डागर

कारगिल युद्ध में शहीद हुए गायक और जाबांज भारतीय सैनिक हनीफ उद्दीन का जन्म 23 अगस्त, 1974 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने आठ साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया था और उनके नफीस व समीर, दो भाई थे। उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

साल 1999 में बेटा हुआ था कारगिल में शहीद, अब पोती को देखना चाहते हैं आर्मी में!

By निशा डागर

साल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान मेजर पद्मपानी आचार्य,  सेकंड राजपूताना राइफल्स के कंपनी कमांडर थे। उन्होंने टोलोलिंग चोटी को हासिल करते हुए अपना बलिदान दिया। उन्हें महावीर चक्र से नवाज़ा गया।

परमवीर चक्र से सम्मानित कारगिल के ये दो जांबाज़ आज भी कर रहे है देश की सेवा!

By निशा डागर

सूबेदार योगेंद्र यादव और नायब सुबेदार संजय कुमार ने साल 1999 के कारगिल युद्ध के बाद परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले वे अफसर यहीं जो आज भी सेना में सेवारत हैं। यादव उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं और कुमार हिमाचल प्रदेश से।