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द बेटर इंडिया

बेस्ट ऑफ़ 2019: इस साल बहुत खास रहीं इन प्रशासनिक अधिकारीयों की पहल!

By द बेटर इंडिया

यही अधिकारी हमें आशा की किरण देते हैं, कि कुछ अच्छे अफ़सरों के सच्चे प्रयास एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं!

बेस्ट ऑफ़ 2019 : द बेटर इंडिया पर सबसे ज्यादा पढ़ी गयी इन किसानों की कहानियाँ!

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इस साल 'द बेटर इंडिया' पर जिन भी किसानों की कहानियाँ लिखी गयी हैं, सभी अपने आप में खास हैं। पर आज हम उन कहानियों को एक बार फिर आपके सामने रख रहे हैं, जिन्हें आपने सबसे ज़्यादा पढ़ा और सराहा है!

बेस्ट ऑफ़ 2019: इतिहास की वो अनसुनी कहानियाँ, जिन्होंने जीता हमारे पाठकों का दिल!

By द बेटर इंडिया

इस साल को अलविदा कहते हुए एक बार फिर उन अच्छी यादों को सहेज लें जो भविष्य में भी हमारी प्रेरणा रहेंगी!

भोपाल गैस त्रासदी: 'जब्बार भाई', जो अंतिम सांस तक लड़ते रहे पीड़ितों के हक़ की लड़ाई!

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इस त्रासदी में खुद अपनी माँ, भाई और पिता को खो देने वाले अब्दुल जब्बार 35 साल तक पीड़ितों के 'जब्बार भाई' बनकर उनके हक़ की लड़ाई लड़ते रहें!

हिमाचल प्रदेश : मीडिया की नौकरी छोड़ करने लगे खेती; सालाना आय हुई 10 लाख रूपये!

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रवि के छोटे भाई अक्षय शर्मा भी एक निजी यूनिवर्सिटी में जाॅब कर रहे थे। पर रवि की सफलता को देखते हुए अब उन्होंने भी नौकरी छोड़कर भाई का साथ देने का फैसला लिया है।

60+ की उम्र में बनाया क्लब; बदल रहे हैं गरीब बच्चों की ज़िदगियां!

By द बेटर इंडिया

ये बुजुर्ग इन बच्चों की स्कूल फीस से लेकर उनकी किताबों और ड्रेस के साथ ट्यूशन फीस का भी खर्च उठा रहे हैं। साथ ही उनको स्वरोजगार का प्रशिक्षण और लोन दिलाने में भी मदद करते हैं।

शुरुआत : भिक्षावृति में लिप्त नन्हें हाथों में कलम पकड़ा कर बदलाव लाने की ज़िद!

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जो बच्चे कभी रेलवे स्टेशन पर घूमते हुए भीख मांगते नजर आते थे। नशावृति और बाल अपराधों में जकड़े हुए थे, वे आज सबसे पहले ईश्वर की प्रार्थना करते हैं। किताबों में अपने सपनों के रंग भरते हैं।

आर्थिक मदद नहीं, स्वावलंबी बनाकर मेरी फीस का किया था इंतजाम; आज भी ऋणी हूँ आपका सर!

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विद्यालय में मेरे प्रवेश के साथ ही शिक्षकगण इस बात का फैसला कर चुके थे कि वे मुझे अधिकाधिक कार्य सिखाएंगे और इसी विद्यालय में माध्यमिक परीक्षा के बाद मुझे नौकरी भी देंगे ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। - शिवनाथ झा

Watch : इस हैदराबादी की वजह से आज बिहार के पूर्णिया में हैं आम, लीची और अमरुद के बागान!

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जब हम अनंत सत्यार्थी के पूर्णिया स्थित घर पर पहुँचे तो वहाँ के माहौल ने हमारा मन मोह लिया। अनंत सत्यार्थी की नर्सरी में पेड़-पौधे बहुत ही करीने से लगे हुए हैं।