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द बेटर इंडिया

पहाड़ी इलाकों के किसानों तक पहुँचाए लोहे के हल, 14 हज़ार पेड़ों को कटने से बचाया!

By द बेटर इंडिया

अब तक किसान लकड़ी से बने हल प्रयोग कर रहे थे। इसके लिए वे पूरे पेड़ को ही काट देते थे क्योंकि पेड़ के नीचे वाले हिस्से का उपयोग वे हल की फाल यानी खेत में खुदाई करने वाले हिस्से को बनाने के लिए करते थे। ऐसे में हर साल बड़ी संख्या में पेड़ हल की फाल बनाने के नाम पर मज़बूरी में काट दिए जाते थे। राज्य के 11 पहाड़ी जिलों में 6 लाख 45 हज़ार किसानों के द्वारा हर साल ढाई लाख पेड़ काटे जा रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े हीरों में गिना जाने वाला 'जैकब हीरा' देखना हो, तो यहाँ आयें!

By द बेटर इंडिया

कभी निज़ामों के परिवार की निजी संपत्ति रहे इन आभूषणों की रिज़र्व बैंक के तहखानों तक पहुंचने की कहानी भी बड़ी दिलचस्‍प है।

भारत का पहला आर्ट डिस्ट्रिक्ट, जहाँ की हर दीवार पर सजाई गयी है एक अलग दुनिया!

By द बेटर इंडिया

2015 में शुरू हुए इस सफ़र में लोधी कॉलोनी में पिछले साल (2018) में तकरीबन 30 नई दीवारों पर काम हुआ था। इस साल मार्च के अंत तक स्‍ट्रीट आर्ट फेस्टिवल, 2019 के खत्‍म होने तक 50 नई रंग-बिरंगी दीवारें कुछ और घरों का हिस्‍सा बन चुकी होंगी। 

किसानों की दुर्दशा और बढ़ती बिमारियों को देख, यह फ़ोटोग्राफ़र बन गया चलता-फ़िरता देशी बीजों का बैंक!

By द बेटर इंडिया

किसानों की समस्या को जड़ से मिटाने के लिए देश में आज उन्हें जैविक खेती की ओर मोड़ा जा रहा है, जिसमें किसी भी रसायन का प्रयोग न हो। पर यह समस्या तब तक हल नहीं हो सकती जब तक किसान विदेशी बीज अथवा कृतृम बीजों का इस्तेमाल करता रहेगा।

देश का पहला 'पर्यावरण संरक्षण आंदोलन' : जानिए 'चिपको आंदोलन' की कहानी; उसी की ज़ुबानी!

By द बेटर इंडिया

26 मार्च 1974 को गढ़वाल की गौरा देवी के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं ने सरकार द्वारा लागू जंगलों की कटाई की नीति के विरोध में 'चिपको आंदोलन' की शुरुआत की। आज भी इतिहास में इस आंदोलन को देश के सबसे पहले पर्यावरण संरक्षण आन्दोलन के तौर पर जाना जाता है!

भारत का गौरव - ‘मैग्निफिसेंट मैरी’ की ज़िंदगी से जुड़ी 10 बातें!

By द बेटर इंडिया

भारतीय बॉक्सिंग का सबसे बड़ा और ‌सफ़ल नाम मैरी कॉम लाखों की प्रेरणा हैं। रिकॉर्ड छह बार की वर्ल्ड चैम्पियन और ओलंपिक पदक विजेता मैरी, पूरे भारत की शान है। जानिए इस चैम्पियन खिलाड़ी की ज़िंदगी से जुड़ी 10 बातें!

उत्तर-प्रदेश: महज़ 75 परिवारों के इस गाँव के हर घर में हैं एक आईएएस या आईपीएस अफ़सर!

By द बेटर इंडिया

कहा जाता है कि इस गाँव में सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही जन्म लेते हैं। पूरे जिले में इसे अफ़सरों वाला गाँव कहते हैं।

प्रभा खेतान की कहानी - छिन्नमस्ता!

By द बेटर इंडिया

बचपन से ही भेदभाव और उपेक्षा की शिकार साधारण शक्ल-सूरत और सामान्य बुद्धि की प्रिया परिवार की ‘सुरक्षित’ चौहद्दी के भीतर ही यौन शोषण की शिकार भी होती है और तदुपरांत प्रेम और भावनात्मक सुरक्षा की तलाश में उन तमाम आघातों से दो-चार होती है जिनसे सम्भवतः हर स्त्री को गुजरना होता है।

टुकड़े-टुकड़े बिखर जाता हिन्दुस्तान अगर न होते सरदार!

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सरदार पटेल इस प्रकार की अनेक नीतियों से लेकर जरुरत पड़ने पर सैन्य बल का प्रयोग करने तक कभी पीछे नहीं हटे। अन्ततः परिणामस्वरुप उन सभी स्वतन्त्रता सेनानियों के सपनों के भारत को अमली जामा पहनाया और एक उभरते हुए राष्ट्र की आधार शिला रखी गयी, जिसपर एक समग्र , लोकतान्त्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का निर्माण हो पाया।

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, जिनकी नायिकाओं ने सिखाया कि सतीत्व ही नारीत्व नहीं होता।

By द बेटर इंडिया

शरतचंद्र की स्त्री जीवन की परिकल्पना बहुत ही प्रगतिशील है। उन्होंने स्त्री को केवल स्त्री बने रहने से अलग मनुष्य बनने के लिए प्रेरित किया।