बानू शेख सफी : एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र!प्रेरणाBy मानबी कटोच03 Oct 2016 10:42 ISTवे दिन भर कचरा बिनती, उन्हें इकठ्ठा करके चुनती और फिर कबाड़ी वाले को बेचने जाती। पर इस कठोर संघर्ष के बावजूद इन दोनों ने अपनी पढाई कभी नहीं छोड़ी।Read More
मिलिए माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए प्रख्यात, 'कुमारटूली' की पहली महिला मूर्तिकार से!प्रेरक महिलाएंBy मानबी कटोच30 Sep 2016 17:52 ISTचायना 17 साल की उम्र से इस कला से जुड़ी हुई है। इस कला पर पुरुषो की अधिक सत्ता होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में अपना एक अलग मकाम बनाया है।Read More
क्रांतिकारी रह चुके 100 साल के पप्पाचन और उनकी 80 साल की पत्नी आज भी करते है अपने खेत का सारा काम!हिंदीBy मानबी कटोच27 Sep 2016 15:32 IST100 साल की उम्र में केरल के उद्दुक्की जिले में खेती किसानी कर के किसान युवाओं के दिलों में क्रांति ला रहे है आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारी।Read More
मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !बदलावBy मानबी कटोच26 Sep 2016 11:00 ISTअब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई किसानो के बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है, जो मुंबई की सडको पर रहने को मजबूर हैRead More
रामधारी सिंह दिनकर की कविता - 'समर शेष है' !साहित्य के पन्नो सेBy मानबी कटोच23 Sep 2016 09:14 ISTआज हम आपके लिए रामधारी सिंह दिनकर की एक ऐसी कविता लाये है जो उन्होंने आजादी के ठीक सात वर्ष बाद लिखी थी। कविता का नाम है - 'समर शेष है'।Read More
जानिये इस साल के राष्ट्रिय शिक्षक भूषण पुरस्कार के विजेता शिक्षकों की प्रेरणादायी कहानियां!प्रेरणाBy मानबी कटोच05 Sep 2016 09:44 ISTपुरस्कार ऐसे प्रेरणादायी शिक्षको को दिया जाता है, जो अपने रास्ते में आये मुश्किलो की परवाह न करते हुए अपने छात्रो को उच्च स्तरीय शिक्षा देते रहे।Read More
कबीर दास : वह कवि जो धर्म, जाती और भाषा से परे था, वह शिष्य जो गुरु का मान करना सिखा गया!साहित्य के पन्नो सेBy मानबी कटोच04 Sep 2016 09:51 IST15वीं सदी के मशहूर कवि कबीर कबीर की भाषाएँ सधुक्कड़ी एवं पंचमेल खिचड़ी हुआ करती थी। Read More
"मैं तुझे फिर मिलूंगी..." - अमृता प्रीतम !साहित्य के पन्नो सेBy मानबी कटोच31 Aug 2016 20:11 ISTअमृता प्रीतम की लिखी कविता का हिंदी अनुवाद , "मैं तुझे फिर मिलूंगी". ये कविता उन्होंने अपने दोस्त इमरोज़ के लिए लिखी थी.Read More
बेटियों को समर्पित प्रसून जोशी की नयी कविता, जो आपसे पूछ रही है, "शर्म आ रही है ना?"प्रेरक महिलाएंBy मानबी कटोच23 Aug 2016 13:08 ISTरिओ में देश का नाम ऊँचा करने के बाद सब लड़कियों पर गर्व कर रहे है. पर प्रसून जोशी की कविता, 'शर्म आ रही है ना' आपको पीछे मुडके देखने पर मजबूर कर देगीRead More
भारत की प्रख्यात महिला कहानीकार और उनके विचार !विशेषBy मानबी कटोच05 Aug 2016 12:09 ISTभारत की प्रख्यात महिला कहानीकार और उनके विचार !Read More