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बानू शेख सफी : एक कचरा बिनने वाली से एक कामयाब नर्स बनने का सफ़र!

By मानबी कटोच

वे दिन भर कचरा बिनती, उन्हें इकठ्ठा करके चुनती और फिर कबाड़ी वाले को बेचने जाती। पर इस कठोर संघर्ष के बावजूद इन दोनों ने अपनी पढाई कभी नहीं छोड़ी।

मिलिए माँ दुर्गा की प्रतिमा बनाने के लिए प्रख्यात, 'कुमारटूली' की पहली महिला मूर्तिकार से!

By मानबी कटोच

चायना 17 साल की उम्र से इस कला से जुड़ी हुई है। इस कला पर पुरुषो की अधिक सत्ता होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में अपना एक अलग मकाम बनाया है।

क्रांतिकारी रह चुके 100 साल के पप्पाचन और उनकी 80 साल की पत्नी आज भी करते है अपने खेत का सारा काम!

By मानबी कटोच

100 साल की उम्र में केरल के उद्दुक्की जिले में खेती किसानी कर के किसान युवाओं के दिलों में क्रांति ला रहे है आजादी की लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारी।

मुंबई आकर भीख मांगने और गजरे बेचने को मजबूर किसानो के बच्चो को देश का पहला सिग्नल स्कूल दिखा रहा है जीने की नई राह !

By मानबी कटोच

अब देश के पहले सिग्नल स्कूल के खुल जाने से मोहन जैसे कई किसानो के बच्चो को अपने भविष्य को सुधारने का मौका मिल रहा है, जो मुंबई की सडको पर रहने को मजबूर है

रामधारी सिंह दिनकर की कविता - 'समर शेष है' !

By मानबी कटोच

आज हम आपके लिए रामधारी सिंह दिनकर की एक ऐसी कविता लाये है जो उन्होंने आजादी के ठीक सात वर्ष बाद लिखी थी। कविता का नाम है - 'समर शेष है'।

जानिये इस साल के राष्ट्रिय शिक्षक भूषण पुरस्कार के विजेता शिक्षकों की प्रेरणादायी कहानियां!

By मानबी कटोच

पुरस्कार ऐसे प्रेरणादायी शिक्षको को दिया जाता है, जो अपने रास्ते में आये मुश्किलो की परवाह न करते हुए अपने छात्रो को उच्च स्तरीय शिक्षा देते रहे।

कबीर दास : वह कवि जो धर्म, जाती और भाषा से परे था, वह शिष्य जो गुरु का मान करना सिखा गया!

By मानबी कटोच

15वीं सदी के मशहूर कवि कबीर कबीर की भाषाएँ सधुक्कड़ी एवं पंचमेल खिचड़ी हुआ करती थी।

"मैं तुझे फिर मिलूंगी..." - अमृता प्रीतम !

By मानबी कटोच

अमृता प्रीतम की लिखी कविता का हिंदी अनुवाद , "मैं तुझे फिर मिलूंगी". ये कविता उन्होंने अपने दोस्त इमरोज़ के लिए लिखी थी.

बेटियों को समर्पित प्रसून जोशी की नयी कविता, जो आपसे पूछ रही है, "शर्म आ रही है ना?"

By मानबी कटोच

रिओ में देश का नाम ऊँचा करने के बाद सब लड़कियों पर गर्व कर रहे है. पर प्रसून जोशी की कविता, 'शर्म आ रही है ना' आपको पीछे मुडके देखने पर मजबूर कर देगी