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1050 वर्ग फ़ीट में उगाते हैं मशरूम, हर महीने होती है 30 हज़ार की कमाई

1050 वर्ग फ़ीट में उगाते हैं मशरूम, हर महीने होती है 30 हज़ार की कमाई

जमशेदपुर के राजेश कुमार, पिछले लॉकडाउन से पहले अपनी नौकरी छोड़कर घर लौट आये थे। उन्होंने घर में ही मशरूम की खेती शुरू की, जिससे आज वह हर महीने अच्छी कमाई कर रहे हैं।

पिछले साल देश में जब कोरोना महामारी के मामले बढ़ने लगे और लॉकडाउन की अटकलें लगने लगीं, तो दूसरे शहरों में नौकरी करनेवाले बहुत से लोग, नौकरियां छोड़कर अपने घर लौट आए। ऐसे लोगों में, झारखंड के जमशेदपुर निवासी राजेश कुमार भी शामिल थे। 41 वर्षीय एमबीए ग्रैजुएट राजेश, असम में एक कंपनी में काम कर रहे थे। लेकिन फरवरी 2020 में, बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए, उन्होंने अपने परिवार के पास लौटने का फैसला किया। लॉकडाउन लगने से पहले, मार्च में वह जमशेदपुर अपने घर आ गए। इस तरह नौकरी छोड़ने के बाद, उनकी आजीविका का साधन खत्म हो गया। लॉकडाउन के दौरान, दूसरी नौकरी मिलना भी बहुत मुश्किल था। तब उन्होंने सोचा कि खाली बैठने की बजाय कुछ ऐसा काम किया जाए, जिसे वह घर में रहते हुए भी कर सके। इसलिए, उन्होंने मशरूम की खेती करने का फैसला लिया। 

राजेश ने द बेटर इंडिया को बताया, “मैं मशरूम के बारे में काफी पहले से जानता हूँ। मैंने पहली बार मशरूम सिलीगुड़ी में देखा था और इससे बने कुछ पकवान खाये थे। पिछले कुछ सालों में, मशरूम खाने से स्वास्थ्य में होनेवाले फायदों को लेकर, लोगों की जागरूकता बढ़ी है। इसलिए, मैंने सोचा कि क्यों न मशरूम की ही खेती की जाए! मशरूम की खेती में लागत कम लगती है और सफलता के ज्यादा मौके रहते हैं।”

घर में ही शेड बनाकर किया काम 

सबसे पहले, राजेश ने मशरूम की खेती के बारे में इंटरनेट से जानकारियां जुटाईं। उन्होंने इससे जुड़े लेख पढ़े और साथ ही, यूट्यूब पर इससे जुड़े कई वीडियोज़ भी देखे। इसके बाद, उन्होंने पता किया कि उन्हें जमशेदपुर में कहाँ मशरूम की ट्रेनिंग मिल सकती है। 

Mushroom Farming in Lockdown
Mushroom Farm Setup in Home

उन्होंने कहा, “मुझे ‘टेक्नोलॉजी रिसोर्स कम्युनिकेशन ऐंड सर्विस सेंटर‘ (TRCSC) के बारे में पता चला। मैंने इस सेंटर पर, गणेश दास जी से बात की। उन दिनों, सेंटर पर ट्रेनिंग बंद थी, लेकिन मेरी सीखने की चाह को देखकर, उन्होंने खासतौर पर अकेले मुझे ट्रेनिंग दी। उनसे ट्रेनिंग लेकर ही, मैंने अपने घर में अपना काम शुरू किया।” 

सबसे पहले, राजेश ने तीन अलग-अलग जगहों पर मशरूम लगाने के लिए शेड तैयार किए और ऑयस्टर मशरूम उगाना शुरू किया। वह बताते हैं, “शेड लगाने और मशरूम के बैग तैयार करने का शुरुआती खर्च, लगभग 25 हजार रुपये आया था, जिसमें शेड का खर्च ज्यादा था, लेकिन यह एक ही बार की लागत थी। पहली बार, जब मैंने मशरूम लगाए, तो मुझे नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और दोबारा कोशिश की। दूसरी बार में मुझे थोड़ी सफलता मिली और मेरा हौसला बढ़ा।” 

हालांकि, अलग-अलग मौसम में मशरूम उगाने पर उन्हें कई बार असफलता का सामना भी करना पड़ा। जैसे- सर्दियों की शुरुआत में भी उन्हें काफी नुकसान हुआ, क्योंकि इस मौसम में तापमान कम रहता है। इसलिए, किसानों को इन बातों का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। साथ ही, मशरूम की सभी किस्में हर एक मौसम में नहीं उगायी जाती हैं, लेकिन राजेश ने अपनी असफलताओं से, काफी कुछ सीखा है और अब वह हर एक मौसम में सफलतापूर्वक मशरूम का उत्पादन ले रहे हैं। अब उन्हें पता है कि किस मौसम में, कौन से मशरूम अच्छा उत्पादन देंगे और इनकी देखभाल कैसे करनी है। राजेश ने बताया कि उन्होंने मशरूम फार्म सेटअप करने में जो लागत लगायी थी, वह उन्होंने तीन महीने में ही वापस कमा ली। 

अब वह जो भी कमा रहे हैं, उसमें सिर्फ मशरूम बैग लगाने का खर्च आता है। एक मशरूम बैग को तैयार करने में, उन्हें रु. 42 खर्च आता है। मशरूम तैयार होने के बाद, एक बैग से वह 140 से 200 रुपये तक की कमाई कर पाते हैं। राजेश कहते हैं, “मशरूम का काम शुरू करने के तीन-चार महीने के अंदर ही, किसान भाई अपनी लागत से दोगुना या तीन गुना कमा सकते हैं।”  

Mushroom Farming in Lockdown
Nutritious Mushroom

70+ नियमित ग्राहकों को पहुंचाते हैं मशरूम 

राजेश बताते हैं कि मशरूम उगाने के साथ-साथ, ग्राहकों तक मशरूम पहुँचाना भी बहुत जरूरी है, इसलिए उन्होंने सबसे पहले अपने जानकारों को मशरूम के बारे में जागरूक किया। महामारी के कारण, बहुत से लोग पोषण से भरपूर चीजें खाना चाहते हैं। ऐसे लोगों को राजेश ने, मशरूम के पोषण के बारे में बताया और इन्हें खाकर देखने के लिए कहा। जिन लोगों ने उनसे पहली बार मशरूम खरीदे, वे लोग आज भी उनके साथ जुड़े हुए हैं। 

राजेश, फिलहाल 70 से ज्यादा लोगों तक मशरूम पहुंचा रहे हैं। वह बताते हैं, “जिन्होंने मुझसे मशरूम खरीदे, उन्होंने आगे और भी कई लोगों को जोड़ने का काम किया। आज स्थिति ऐसी है कि मांग ज्यादा है और सप्लाई कम। क्योंकि, मैं अभी कम स्तर पर ही मशरूम का उत्पादन कर रहा हूँ। लेकिन, लोगों के बीच मशरूम की बढ़ती मांग को देखकर, मैंने फैसला किया है कि मैं इसे बड़े स्तर पर करूँ, जिसके लिए मैं अभी जमीन तलाश रहा हूँ।” 

राजेश के फार्म से मशरूम खरीदने वाले रमेश कुमार तिवारी कहते हैं, “मेरा पूरा परिवार शाकाहारी है। मैं अपने परिवार को पोषण से भरपूर चीजें खिलाना चाहता हूँ। मुझे इस बात की खुशी है कि जमशेदपुर में अच्छी क्वालिटी के मशरूम मिल रहे हैं। राजेश जी हमारे यहां नियमित रूप से मशरूम पहुंचा रहे हैं और इस कारण, मेरे परिवारवालों को लगातार पोषण से भरपूर खाना मिल रहा है।” 

मशरूम फार्मिंग से जुड़ी परेशानियों के बारे में राजेश कहते हैं कि अक्सर लोगों को इस बात की चिंता होती है कि अगर उनकी पूरी उपज नहीं बिकी, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि, मशरूम को ज्यादा दिनों तक स्टोर नहीं किया जा सकता। वह कहते हैं कि मशरूम को खराब होने से बचाने का सबसे अच्छा तरीका है, इससे कुछ फ़ूड आइटम बना लेना। उन्होंने बताया, “अगर कभी मशरूम बच भी जाए, तो मैं उन्हें सुखाकर उनका पाउडर, अचार और पापड़ बना लेता हूँ। अब बहुत से लोग, मशरूम से बने फ़ूड आइटम भी शौक से खरीदने लगे हैं।” 

Mushroom Farming in Lockdown
Training others as well

सिर्फ 1050 वर्ग फ़ीट जगह से राजेश आज हर महीने 30 हजार रुपए से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। मशरूम की खेती के साथ-साथ, वह बतौर ट्रेनर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया, “कुछ महीने पहले तक जब स्थिति ठीक थी, तब मैं गाँव-गाँव जाकर भी कई महिला समूहों को ट्रेनिंग देता था। अब बहुत से लोग, मेरे फार्म में आकर ट्रेनिंग ले रहे हैं। मैं अब तक 30 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दे चुका हूँ।” 

राजेश कहते हैं कि अक्सर लोग उनसे पूछते हैं कि क्या वह इस काम से अपनी पिछली नौकरी जितना कमा पा रहे हैं? ऐसे लोगों से वह सिर्फ यही कहते हैं, “अपने बिज़नेस और नौकरी में, जमीन-आसमान का अंतर होता है। यदि हम छोटे स्तर पर काम की शुरुआत करते हैं, तो एकदम से मुनाफा नहीं मिलता, इसमें धैर्य रखने की जरूरत होती है। लेकिन, यह सच है कि अपने बिजनेस में, नौकरी करने के मुकाबले ज्यादा फायदे होते हैं। जैसे- यह काम मैं घर में रहकर कर रहा हूँ, इसलिए मुझे अपने परिवार से दूर नहीं रहना पड़ता। साथ ही, मैं अपने और दूसरे कई परिवारों को स्वस्थ खाना खिला रहा हूँ, इससे बड़ी कमाई और क्या होगी!”

अंत में, राजेश लोगों को सलाह देते हैं कि मशरूम के काम में उन लोगों को बहुत फायदा मिलता है, जो पहले से किसानी कर रहे हैं। क्योंकि, उनके पास अपनी जमीन होती है, जहां वे बड़े फार्म सेटअप कर सकते हैं। इसलिए, वह किसानों और काम की तलाश में परेशान लोगों को एक बार मशरूम की खेती करने की सलाह देते हैं। 

अगर आप राजेश कुमार से मशरूम की खेती के बारे में जानना चाहते हैं, तो उन्हें 8638942575 पर कॉल कर सकते हैं।

संपादन- जी एन झा

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