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न बिजली का खर्च, न फसल सड़ने की चिंता! पेश है, सौर ऊर्जा से चलने वाला फ्रिज

न बिजली का खर्च, न फसल सड़ने की चिंता! पेश है, सौर ऊर्जा से चलने वाला फ्रिज

‘पूसा फार्म सनफ्रिज’ को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि इंजीनियरिंग विभाग की प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. संगीता चोपड़ा और उनकी टीम ने अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर बनाया है। इस कोल्ड स्टोरेज सुविधा को किसानों के लिए खेतों, मंडियों या बाज़ारों में भी बनाया जा सकता है।

किसानों की खाद्य उपज को सही तरीके से भंडारण करने के साधनों का आभाव होने के कारण, उन्हें कई बार काफी नुकसान उठाना पड़ता है। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में इस तरह की कई खबरें सामने आई, जब किसानों की उपज समय पर बाजार न पहुँचने के कारण खराब हो गई। लेकिन वहीं, अजमेर के पिचोलिया गाँव के किसान सही भंडारण तकनीक को अपनाकर, अपनी उपज को बचाने में सफल रहे हैं। जी हाँ, इस गाँव में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (जिसे पूसा संस्थान भी कहते हैं) द्वारा ‘पूसा फार्म सनफ्रिज’ बनाया गया है। यह एक खास तरह की ‘शीत भंडारण’ तकनीक (Cold Storage Technique) है।

इस ‘शीत भंडारण’ तकनीक के अंतर्गत, किसान अपनी अलग-अलग उपज जैसे- अनाज, दाल, फल, सब्जियां और अंडे आदि स्टोर कर सकते हैं। इस तकनीक को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के ‘कृषि इंजीनियरिंग’ विभाग की प्रधान वैज्ञानिक, डॉ. संगीता चोपड़ा और उनकी टीम ने अमेरिका की ‘मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी’ के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर बनाया है। 

इसके बारे में डॉ. चोपड़ा ने बताया कि इस तकनीक को बनाने का उद्देश्य, किसानों को अच्छी भंडारण सुविधा प्रदान करना है। उन्होंने काफी समय पहले सिर्फ ‘इवैपोरेटिंग कूलिंग’ (वाष्पीकरण शीतलन) के सिद्धांत पर एक तकनीक तैयार की थी। जिसे राजस्थान और पंजाब के कई गांवों में भी लगाया गया था। लेकिन, धीरे-धीरे उन्हें लगा कि इस तकनीक को और बेहतर किया जा सकता है। साल 2015 में, उन्हें इस कोल्ड स्टोरेज तकनीक के विकास के लिए ‘यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट‘ से अनुदान राशि मिली थी। 

Cold Storage Technique
डॉ. संगीता चोपड़ा

पूसा फार्म सनफ्रिज: 

53 वर्षीया वैज्ञानिक आगे बताती हैं, “पूसा फार्म सनफ्रिज एक अभिनव, ऑफ-ग्रिड, बैटरी रहित और कोल्ड स्टोरेज सुविधा है, जिसे खेतों पर ही बनाया जा सकता है और यह बिना बिजली के काम करता है। इसमें ‘इवैपोरेटिंग कूलिंग’ (वाष्पीकरण शीतलन) और ‘सोलर रेफ्रिजरेशन’ तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है। 10x10x10 (लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई) फ़ीट का यह कोल्ड स्टोरेज, पूरी तरह से सौर ऊर्जा से काम करता है। इसकी छत पर सौर पैनल लगे हैं, जिनकी क्षमता पाँच किलोवाट है। इसमें तीन किलोवाट ऊर्जा का उपयोग, कोल्ड स्टोरेज में लगे 1.2 टन के एयर कंडीशनर को चलाने के लिए किया जाता है। दिन में जहाँ, इसके अंदर का तापमान तीन-चार डिग्री सेल्सियस होता है, वहीं रात को यह आठ-दस डिग्री सेल्सियस हो जाता है।” 

यह तकनीक सामुदायिक स्तर पर, छोटे किसानों के लिए काफी फायदेमंद है। इस तकनीक को अपने विभाग में लगाने के साथ-साथ, डॉ. संगीता ने राजस्थान में अजमेर के पिचोलिया गाँव और हरियाणा में पानीपत के चमराडा गाँव में भी लगाया है। इसके अलावा, कुछ समय पहले उन्होंने दिल्ली के मेला ग्राउंड में भी एक पूसा फार्म सनफ्रिज बनाया है। वह कहती हैं, “मेला  ग्राउंड में बनाए गए कोल्ड स्टोरेज को ऐसे बनाया गया है कि आप इसे अपनी जरूरत के हिसाब से, एक जगह से दूसरी जगह लेकर जा सकते हैं। इसे बनाने में कंक्रीट की जगह, सिर्फ मेटल फ्रेम और प्लेट्स का इस्तेमाल हुआ है। जिन्हें अलग-अलग करना और किसी दूसरी जगह ले जाकर, इसे फिर से लगाना काफी आसान है।” 

एक यूनिट को बनाने की लागत, साढ़े चार लाख रुपए या इससे ज्यादा भी आ सकती है। लेकिन यह तकनीक, किसानों की कमाई को बढ़ाने में मददगार है। पिचोलिया गाँव के 36 वर्षीय किसान तनवर सिंह बताते हैं, “हमारे गाँव में पिछले साल मार्च में, यह कोल्ड स्टोरेज बना था। इसकी वजह से लॉकडाउन के दौरान, हम किसानों को बहुत फायदा हुआ। हम इसके अंदर आराम से 10-15 दिनों के लिए, अपनी फल-सब्जियों को स्टोर कर सकते हैं।” 

Cold Storage Technique
किसान तनवर सिंह और पूसा फार्म सनफ्रिज में रखी उनकी उपज

तनवर सिंह, अपनी लगभग 12 बीघा जमीन पर सब्जियों की खेती करते हैं। उनके पास इतने साधन नहीं है कि वह खुद अपने लिए, किसी निजी कोल्ड स्टोरेज का प्रबंध करें। लेकिन जब से ‘भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान’ ने ‘पूसा फार्म सनफ्रिज’ उनके गाँव में बनाया है, उन्हें काफी राहत मिली है। वह कहते हैं कि पहले उन्हें सब्जियों की बिक्री के लिए, हर दिन मंडी जाना पड़ता था। क्योंकि, एक-दो दिन में ही सब्जियां खराब होने लगती थीं। लेकिन, इस कोल्ड स्टोरेज में वह तीन-चार दिन की सब्जियों को इकट्ठा करके, इन्हें मंडी में बेचने जाते हैं। इससे उनके आने-जाने का किराया भी कम हुआ है और साथ ही, वह अपनी उपज को अच्छे दाम पर बेच भी पाते हैं। 

उन्होंने आगे कहा, “मैं कोल्ड स्टोरेज की वजह से, उपज को कई दिनों तक ताजा रख पाता हूँ। जिस दिन मंडी में सब्जियों का अच्छा भाव होता है, उस दिन वहां जाकर इनकी बिक्री करता हूँ। इससे सब्जियों के दाम भी अधिक मिलते हैं। हमारे गाँव में लगभग 15 किसान, इस तकनीक का फायदा ले रहे हैं।” 

आगे की योजना: 

संस्थान के ‘कृषि इंजीनियरिंग’ विभाग के प्रमुख इंदर मानी कहते हैं, “हमारा उद्देश्य इस तकनीक को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुँचाना है। यहाँ हर साल, लगभग 40% खाद्यान बर्बाद हो जाता है। क्योंकि, हमारे किसानों के पास सही भंडारण तकनीक नहीं है। पूसा फार्म सनफ्रिज कोल्ड स्टोरेज तकनीक, कई तरह से काम कर सकती है। पहला, इसे खेतों पर लगाया जा सकता है ताकि कटाई के बाद, उपज को सीधा स्टोर किया जा सके। दूसरा, इसे मंडियों और बाजारों में लगाया जा सकता है, जहाँ किसान दैनिक किराया देकर अपनी फल-सब्जियां स्टोर कर सकते हैं। इससे उन्हें अपनी उपज खराब होने के डर से, कम दामों में बेचने की जरूरत नहीं पड़ती।” 

Cold Storage Technique

इसलिए, संस्थान की कोशिश है कि इस तकनीक को सरकार द्वारा सब्सिडी योजना में शामिल किया जाए। इसके अलावा, वे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। मानी आगे कहते हैं, “किसानों की आय दुगुनी करने की सरकार की योजना के अंतर्गत, लगभग दस हजार एफपीओ का गठन होना है। अगर सभी एफपीओ अपने-अपने किसान समूहों के लिए, यह कोल्ड स्टोरेज तकनीक लगाने के लिए आगे आएं तो हम बड़े स्तर पर किसानों की मदद कर सकेंगे।” 

फिलहाल, उनकी तैयारी दिल्ली के पल्ला गाँव में पूसा फार्म सनफ्रिज बनाने की है। उन्होंने इस तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए, इसका लाइसेंस देना भी शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी सिर्फ एक कंपनी को यह लाइसेंस दिया गया है और अन्य दो-तीन कंपनियों के साथ विचार-विमर्श चल रहा है। डॉ. चोपड़ा का कहना है कि इस तकनीक को और विकसित करते हुए, उन्होंने इसे रिमोट-कंट्रोल भी बना दिया है। जिससे किसान अपने घर पर बैठकर भी इसे कंट्रोल कर सकते हैं। 

अगर आप इस तकनीक के बारे में अधिक जानना चाहते हैं या अपने यहां लगवाना चाहते हैं तो डॉ. संगीता चोपड़ा को dhingra.sangeeta@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं। 

संपादन- जी एन झा

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निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.
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