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Shark Solar Panel: कम जगह में अधिक बिजली, जानिए इस अनोखे सोलर पैनल के बारे में
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Shark Solar Panel: कम जगह में अधिक बिजली, जानिए इस अनोखे सोलर पैनल के बारे में

फरीदाबाद के एक सोलर स्टार्टअप, लूम सोलर ने हाल ही में शार्क पैनल लॉन्च किया है, जिसे घर में इस्तेमाल करके बिजली बिल से छुटकारा पाया जा सकता है।

बिजली की कटौती और इसकी लगातार बढ़ती दरों के कारण, आज सौर ऊर्जा (Solar Energy) का इस्तेमाल दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। इससे न सिर्फ बिजली की बेरोक उपलब्धता सुनिश्चित होती है और खर्चों को कम करने में मदद मिलती है, बल्कि यह पावर ग्रिड में बिजली उत्पादन के लिए कोयले के इस्तेमाल को कम करने में भी सहायक है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ पर्यावरण को होता है।

हालांकि, आज से कुछ वर्षों पहले तक, देश में सोलर पैनल की कीमत काफी ज्यादा थी और वे ज्यादा सक्षम नहीं थे। लेकिन, आज हम आपको एक ऐसे स्टार्टअप के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने महज़ तीन वर्षों में, भारतीय बाज़ार को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।

यह सोलर स्टार्टअप है, हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित ‘लूम सोलर‘ (Loom Solar), जो देखते ही देखते, महज़ तीन वर्षों में भारत की बेहतरीन सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों में से एक बन गयी। लूम सोलर कोदो भाई, अमोल आनंद और अमोद आनंद ने मिलकर शुरू किया है।

द बेटर इंडिया से ख़ास बातचीत में लूम सोलर के को-फाउंडर, अमोल ने बताया, “आज कोई भी बड़ी कंपनी, हाई एफिशिएंसी सोलर पैनल और आधुनिक तकनिकी उत्पाद बनाने पर ध्यान नहीं देती है। लेकिन ‘लूम सोलर’ ने हमेशा से ही ग्राहकों की परेशानियों का समाधान करने के लिए काम किया है।”

अमोल और अमोद आनंद

अमोल के मुताबिक ‘लूम सोलर’ ने हमेशा ऐसे प्रोडक्ट बनाये हैं, जिनसे घर में इन प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करने वालों को ज़्यादा फायदा मिले। उन्होंने 10 वाट से लेकर 400 वाट के सुपर हाई एफिशिएंसी पैनल की एक बहुत बड़ी रेंज बनाई। ये सीमित जगह में ज़्यादा पावर जेनेरेट करने के साथ-साथ, कम रौशनी और धुंध में भी काम करते हैं।

इस कड़ी में, ‘लूम सोलर’ के दूसरे को-फाउंडर अमोद कहते हैं, “भारतीय बाज़ार में, मोनो पर्क पैनल को लाने से हर भारतीय कंपनी डरती थी। यह मॉडल अधिक कार्य-सक्षम था और इसी वजह से अपेक्षाकृत अधिक महंगा भी था। इसलिए कंपनियों को लगता था कि भारत में लोग इसे नहीं खरीदेंगे।”

लेकिन, जब लूम सोलर ने इसे लॉन्च किया, तो इसकी माँग इतनी अच्छी थी, कि कंपनी ने हर साल 100 करोड़ का टर्नओवर हासिल किया। 

इस सफलता को देख, दूसरी कंपनियों ने भी मोनो पर्क पैनल बनाना शुरू कर दिया। बाद में, केन्द्र सरकार ने भी घरेलू कंपनियों को सोलर पैनल के उत्पादन के लिए पीएलआई स्कीम के तहत अनुदान देना शुरू कर दिया, जिससे यहाँ संभावनाओं का एक नया द्वार खुला।

ग्राहकों की ज़रूरतों को समझा

अमोल कहते हैं, “हमने अपने अनुभव से सीखा कि हर ग्राहक की अपनी ज़रूरत होती है। कोई आटा-चक्की चलाने, तो कोई घर में लाइट, फैन, टी.वी और मोटर आदि चलाने में अपने बिजली के बिल को कम करने के लिए सोलर पैनल की ओर रुख करता है। इसी को देखते हुए, बड़ी कंपनियों ने उच्च क्षमता वाले मोनो पैनल लाँच किये। लेकिन, यहाँ परेशानी यह थी, कि वे सिर्फ 300 वाट या उससे अधिक के पैनल बनाते थे।”

लेकिन, लूम सोलर इकलौती ऐसी कंपनी थी, जो 10 वाट, 20 वाट से लेकर 375 वाट तक के सोलर पैनल बना रही थी।

कंपनी ने हाल ही में, 440 वाट का सुपर हाई एफिशिएंसी पैनल भी लॉन्च किया है, जिसे ‘शार्क पैनल’ (Shark Panel) नाम दिया गया है।

क्या है इसकी ख़ासियत

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Some Happy Customers Using Shark Solar

‘लूम सोलर’ के अनुसार शार्क पैनल, मोनो पैनल टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे बड़ा पैनल है। इसके लिए कम जगह की ज़रूरत होती है और बिजली का उत्पादन अधिक होता है।

कंपनी के अनुसार, जितनी जगह में सिर्फ 250-300 वाट का पॉली पैनल स्थापित होता है, उतनी ही जगह में 440 वाट का शार्क पैनल आसानी से लग जाता है। यानी कि, अगर आप रात के खाने के समय अपने घर की बिजली का सारा लोड सोलर से चलाना चाहते हैं, तो 440 का एक शार्क पैनल ही काफी है। अगर आप पूरी तरह ऑफ-ग्रिड होना चाहते हैं, यानी इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड से बिलकुल भी बिजली नहीं लेना चाहते, तो 440 वाट के दो शार्क पैनल लगाकर अपने पूरे घर को सोलर पर शिफ्ट कर सकते हैं।

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इसे लेकर अमोद कहते हैं, “यह एक नई तकनीक है। सोलर पैनल में, काले रंग का एक सेल (बैटरी) होता है। यदि उस पर धूल-मिट्टी पड़ गई, तो सेल की क्षमता कम होने लगती है। इसी चुनौती को देखते हुए, हमने हाफ-कट तकनीक अपनाई, जिसमें पैनल को दो हिस्सों में बाँट दिया जाता है और सेल की संख्या बढ़ा दी जाती है। इससे सेल को होने वाले नुकसान को एक चौथाई तक कम किया जा सकता है।”

आज एक आम घर के लिए 1 किलो वाट से लेकर 3 किलो वाट तक बिजली काफ़ी है। अगर किसी घर में एसी आदि चलते हैं, तो वहाँ करीब 5 किलो वाट बिजली की जरूरत होती है।

ऐसे में, यदि शार्क पैनल की तुलना साधारण मोनो पर्क पैनल से की जाए, तो हमें एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

अमोल कहते हैं, “एक 375 वाट के पैनल को लगाने के लिए जितनी जगह की जरूरत होती है, उतने में 440 वाट का शार्क पैनल आसानी से लग जाता है। जिसका अर्थ है कि आप प्रति घंटे 65 वाट अधिक ऊर्जा पाते हैं और यदि हर दिन सिर्फ पाँच घंटे भी इससे बिजली का उत्पादन होता है, तो हर दिन आपको 225 वाट अतिरिक्त बिजली मिलती है।”

किया खुद का सर्वे

लूम सोलर ने अपने ग्राहकों के अनुभवों के आधार पर एक साधारण निष्कर्ष निकाला कि भारत में पूरे साल में करीब 300 दिन अच्छी धूप रहती है और हर दिन कम से कम पाँच घंटे के लिए सोलर पैनल से बिजली प्राप्त की जा सकती है।

इस तरह, शार्क पैनल हर साल 6,60,000 वाट यानी 660 यूनिट बिजली का उत्पादन करता है।

खत्म हो सकती है बिजली पर पूरी निर्भरता

लूम सोलर, ‘शार्क’ को दुनिया की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी मानती है। कुछ देशों, जैसे चीन या अमेरिका को छोड़ दें, तो ‘लूम सोलर’ इकलौती ऐसी भारतीय कंपनी है, जिनके पास सुपर हाई एफिशिएंसी तकनिकी का शार्क 440 पैनल है। 

अमोद बताते हैं, “एक शार्क पैनल से एक दिन में कम से कम 2000 वाट, यानि दो यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। यदि किसी घर में एसी, फ्रीज, इंडक्शन चूल्हा जैसे उपकरण भी चलते हैं, तो घर में दो शार्क पैनल लगा कर, पावर ग्रिड पर निर्भरता को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।”

कैसे करते हैं कार्य

लूम सोलर का हेड ऑफिस सिर्फ फरीदाबाद में ही है। लेकिन, आज उनके साथ पूरे देश में 2500 से अधिक डिस्ट्रीब्यूटर और डीलर जुड़े हुए हैं। साथ ही, आज भारत के अलग अलग शहरों तथा गाँवों में उनके 50 हजार से अधिक ग्राहक हैं, जिन्होंने सोलर पैनल लगाया है।


सोलर पैनल लगाने के लिए यदि कोई ग्राहक, कंपनी को ऑनलाइन या नज़दीकी सेल टच पॉइंट पर संपर्क करता है, तो कंपनी स्थानीय डीलर/डिस्ट्रीब्यूटर को ग्राहक के घर भेजकर, घर का साइट सर्वे करवाती है। इससे यह पता चलता है कि उस जगह पर पैनल लग सकता है या नहीं और यदि लग सकता है, तो कितने यूनिट का। किसी भी मुश्किल की स्थिति में कंपनी के इंजीनियर वीडियो कॉलिंग के जरिए, उनका मार्गदर्शन करते हैं।

वहीं, जहाँ डीलर या डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होते हैं, कंपनी पैनल लगाने के लिए अपने कर्मचारियों को भेजती है और इसके लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है।

इसके अलावा, यदि कोई ग्राहक, अपने घर में सोलर पैनल लगाने को लेकर, जानकारी हासिल करना चाहता है, तो लूम सोलर पहले उन्हें अपने यूट्यूब वीडियो या वेबसाइट के जरिए पूरी मदद करती है।

क्या है भविष्य की योजना

लूम सोलर में 100 लोग काम करते हैं और इनकी सालाना आय रु. 100 करोड़ है। भविष्य में लूम सोलर हर उस घर को सोलर पावर्ड बनाना चाहती है, जहां फ़िलहाल इन्वर्टर या बैटरी बैकअप है। कंपनी के मुताबिक केवल 1 -2 सोलर पैनल लगाकर, इन घरों को पूरी तरह सोलर पावर्ड बनाया जा सकता है।

मिले कई अवॉर्ड

सौर ऊर्जा उद्योग में उल्लेखनीय योगदान के लिए, लूम सोलर को 2019 में, संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रतिष्ठित ‘गोल्डन ब्रिज बिज़नेस एंड इनोवेशन अवार्ड’ मिलने के साथ ही, Fastest Growing SMB Award और अमेजन संभव पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

कहाँ से खरीदें

शार्क पैनल की कीमत 15-16 हजार है। इसे लूम सोलर की ऑफिशियल वेबसाइट से ख़रीदा जा सकता है। फेसबुक, गूगल, अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे पोर्टल पर इसे 4.5 की रेटिंग मिली है। कंपनी शार्क पैनल के लिए 25 साल की वारंटी भी देती है।

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कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।
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