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700 रूपये में 1500 किमी! इनसे लीजिए सबसे सस्ती यात्रा करने के टिप्स

राजस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजिनियर आकाश ने, 50 पैसे प्रति किमी से भी कम में तय की, टाटा नेक्सन इलेक्ट्रिक कार से, जयपुर से लोंगेवाला तक की 1500 किमी की लम्बी राउंड ट्रिप।

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क्या आपने कभी सोचा था कि दुनिया में सबसे सस्ता माइलेज देने वाले मंगलयान से भी सस्ता माइलेज देने वाला वाहन आपके पास होगा! नहीं न! तो हम आपको बताते हैं, एक ऐसे इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर की कहानी, जिन्होंने अपनी टाटा नेक्सन (Tata Nexon) इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से, जयपुर से लोंगेवाला तक 1500 किमी का सफ़र मात्र 700 रूपये में तय किया।

कुछ महीने पहले, जयपुर के एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर, आकाश ने अपने दोस्तों के साथ जैसलमेर जिले के शहर लोंगेवाला जाने के लिए एक लंबी सड़क यात्रा करने का प्लान बनाया। उनके दोस्त अपनी आईसी-इंजन वाली गाड़ियों में यात्रा करने की सोच रहे थे, वहीं आकाश, अपने Tata Nexon इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को चलाने की योजना बना रहे थे। जिसमें 312 किमी की प्रीमियम बैटरी रेंज है। लेकिन उनके दोस्तों ने ट्रिप से कुछ देर पहले ही इसे कैंसिल कर दिया। लेकिन आकाश इस ट्रिप को कैंसिल नहीं करना चाहते थे। आखिर उन्होंने इसके लिए इतनी ज़बरदस्त तैयारियां जो की थी। और इस ट्रिप में अब दोस्तों की बजाय उनकी पत्नी कौशल उनकी साथी बन गयीं।

2020 के क्रिसमस की सुबह इस दंपति ने जयपुर से लोंगेवाला की लगभग 1500 किमी की राउंड ट्रिप की शुरूआत की। उन्होंने पुष्कर, जोधपुर और जैसलमेर होते हुए लोंगेवाला की यात्रा पूरी की और चार दिनों में वापस आ गए।

3डी प्रिंटर्स डिजाईन करने वाली कंपनी, ‘Aha 3डी इनोवेशंस’ के संस्थापक आकाश कहते हैं, “हमने जयपुर में अपने घर से पुष्कर की यात्रा शुरू की, जहाँ हम रात भर रुके और अपनी गाड़ी को चार्ज किया। पुष्कर से होते हुए आगे हम, जोधपुर, जैसलमेर और फिर लोंगेवाला शहर गए।”

इस यात्रा के बारे में ख़ास बात यह थी कि, उन्होंने अपनी EV को चार्ज करने के लिए महज़ 700 से 800 रुपये ही खर्च किए। अगर आकाश ने यह यात्रा किसी भी IC-Engine वाली गाड़ी से तय की होती, जिनका औसत माइलेज 15 किमी प्रति लीटर होता है। तब उन्हें पेट्रोल पर ही लगभग 9,000 रुपये खर्च करने पड़ते।

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आकाश और कौशल अपनी यात्रा की शुरुआत में

EV से लंबी सड़क यात्रा करने के लिए पड़ेगी किन चीज़ों की ज़रूरत

सबसे पहले, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चलाने वालों को यह पता होना चाहिए कि वह अपनी गाड़ी को कहाँ चार्ज कर पाएंगे।

आकाश ने अपनी गाड़ी को चार्ज करने के लिए एक ‘एक्सटेंशन केबल’ बनाई और इसे बिजली के मीटर (इलेक्ट्रोमीटर) से जोड़ दिया ताकि वह खपत की गई बिजली को माप सके और होटल के मालिक को इसके अलग से पैसे दे सके। ट्रिप के दौरान, उन्होंने एक अर्थिंग किट भी लिया, क्योंकि बहुत सारे होटलों में अर्थिंग की व्यवस्था नहीं होती।

उन्होंने बताया, “EV इस्तेमाल करने वाले अक्सर ‘डू इट योरसेल्फ’ (DIY) अर्थिंग किट बनाने का सहारा लेते हैं। ‘अर्थिंग’ बिजली की अनियंत्रित प्रवाह से बचाव करने की एक प्रक्रिया है, जो बिजली से चलने वाले उपकरणों को नुकसान पहुँचाने से रोकती है। यह महत्वपूर्ण है कि EV के लिए अर्थिंग उपलब्ध रहे। एक लोहे की छड़ को जमीन में गाड़कर उसमें एक तार जोड़ दीजिये। यह अर्थिंग बनाता है और फिर इस तार को वाहन चार्जर से जोड़ दीजिये।”

आकाश ने आगे बताया, “अपनी यात्रा के दौरान मैंने अर्थिंग बनाने के कई और तरीके भी ढूंढ निकाले। मैंने पानी की टंकी आधारित बिजली की अर्थिंग के लिए कॉपर प्लेट और क्लैंप का उपयोग किसी धातु की संरचना जैसे पाइपिंग (जीआई पाइप), हैंड-पंप, रेलिंग, पोल, बिजली बोर्ड के गड्ढों से अर्थिंग प्राप्त करने आदि की जानकारी इकट्ठी की। यह जानकारी रोड ट्रिप्स प्लान करने वालों के लिए मददगार साबित हो सकती है।”

EV चलाने वालों को, अपने EV को सुरक्षित रूप से चार्ज करने के लिए अर्थिंग की ज़रूरत होती है। इस यात्रा के दौरान उन्हें अधिकांश स्थानों पर ‘अर्थिंग चार्जिंग पॉइंट’ नहीं मिले। हर जगह, उन्हें अर्थिंग को बनाने के लिए जुगाड़ करना पड़ा। यात्रा के बाद उन्होंने एक EV चार्जिंग किट विकसित की, जिसमें ऊर्जा मीटर के साथ एक्सटेंशन केबल जैसे, सभी आवश्यक सामान शामिल हैं। जो किसी भी लंबी EV सड़क यात्रा के लिए जरूरी है। इसकी लागत लगभग 9,878 रुपये है, और यह आपको Aha3D वेबसाइट पर मिल जायेगा।

आकाश बताते हैं, “हमने योजना बनाते वक्त यह भी सुनिश्चित किया कि हर 200-किमी की दूरी पर EV को चार्ज करने के लिए होटल में रुकने की व्यवस्था हो। हम होटल, दोस्त के घर, और रेगिस्तान शिविरों में रुके थे और हमने पहले ही उनसे पूछ लिया था कि वहाँ बिजली होगी या नहीं।”

वह आगे कहते हैं, “रात में रुकने वाले हर स्थान पर, हमने अपनी कार को 10 से 11 घंटे तक अच्छे से चार्ज किया। हालांकि, हम EV को तब चार्ज करते हैं जब बैटरी 15% बचती है और पूरी तरह चार्ज होने के लिए सिर्फ 8 घंटे की ज़रूरत होती है।”

अगर ड्राइवर बिना किसी बैटरी चार्ज के हाईवे पर फंस जाता है, तो वह या तो पास के वर्कशॉप को कॉल करके कार को टो करवा सकता हैं या आती-जाती गाड़ियों से भी मदद ले सकता हैं। रीजेनेरेटिव चार्जिंग या टो चार्जिंग सुविधा के कारण, EV को टो करने या रस्सी से खींचने से गाड़ी को चार्ज होने में भी मदद मिलती है।

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रोड ट्रिप: चाय पीने के लिए रुके

आकाश कहते हैं, “आपको बस अपनी टोइंग रस्सी को अपनी कार के बूट में ले जाने की ज़रूरत है और आप अपनी कार को टो करने के लिए तैयार गाड़ी को रोक सकते हैं। हर एक किलोमीटर तक गाड़ी को टो करने से यह लगभग 1.1% चार्ज हो जाती है। यदि गाड़ी को 5 किमी तक चलाते हैं तो आप 6% बैटरी चार्ज करते हैं। हर 1% चार्ज आपको 2.5 किमी की रेंज देता है। अगर आप 5 किमी तक अपनी गाड़ी को टो करते हैं तो, आप लगभग 5 किमी के अलावा लगभग 15 किमी की रेंज हासिल कर सकते हैं।”

इस तरह, टो रस्सी भी इस EV यात्रा चार्जिंग किट का एक ज़रूरी हिस्सा है। पर आकाश इस विकल्प की सिफारिश नहीं करते हैं। उनका मानना है कि इसका इस्तेमाल सिर्फ सख्त जरूरत वाली परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए। अगर ड्राइवर मूल योजना का पालन करते हैं, तो उन्हें ऐसी किसी परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

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इस कड़ी में उन्होंने बताया, “टाटा नेक्सॉन जैसी EV में इससे पहले की बैटरी डिस्चार्ज हो जाए, हमें पहले ही पता चल जाता है कि हम और कितना लम्बा (किमी) सफ़र तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे हैं, तो आपको 200-220 किमी की रेंज मिलती है। अगर आपको लगता है कि, यह उम्मीद से कम है, तो आप 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलाना शुरू कर सकते हैं और इससे आपकी बैटरी रेंज 300 किमी से ज़्यादा हो जाती है। यही वजह है कि, हम रास्ते में कहीं नहीं फंसे।”

आकाश के अनुसार, “हालाँकि कंपनी 312 किमी की रेंज का दावा करती है, लेकिन Tata Nexon को 90-100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाए, तो बैटरी की रेंज लगभग 160 किमी तक नीचे चली जाती है। अगर गाड़ी को 40 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चलाया जाये, तो 320 किमी तक की रेंज हासिल की जा सकती है।”

उन्होंने बताया, “गाड़ी की रेंज, रफ़्तार और एक्सेलेरेशन पर निर्भर करती है। जब चालाक गाड़ी को बहुत तेज चलाने की कोशिश करता है, तो काफी ज्यादा मात्रा में, बैटरी में संचित उर्जा की खपत होती है। अचानक ब्रेकिंग से भी बैटरी की काफी खपत होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों में यह सुविधा होती है कि, यदि कोई चालक तेज रफ़्तार से गाड़ी चला रहा है, और गाड़ी को रोकना चाहता है तो वह रोकते समय ऊर्जा बचा सकते हैं।”

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रोड ट्रिप: राजमार्ग पर

उन्होंने बताया, “हमारी सबसे बड़ी चुनौती जोधपुर से जैसलमेर जाते समय आई। मार्ग के साथ लगभग पाँच किमी तक, हाइवे अंडर कंट्रक्शन था और सड़क काफी रेतीली और पथरीली थी। हमने इन 5 किमी को कवर करने में लगभग 10% ऊर्जा खर्च की। नतीजतन, हमें अपने अगले गंतव्य तक पहुँचने के लिए और 148 किमी की यात्रा करनी थी और हमारे पास सिर्फ 118-120 किमी की बैटरी रेंज बची थी।”

इसके बाद उन्होंने लगभग 45-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धीरे-धीरे गाड़ी चलाना शुरू किया और इससे उन्हें कम चार्ज पर यह दूरी तय करने में मदद मिली।

कौशल बताती हैं, “अगर हमने 15 किमी/लीटर की माइलेज वाली आईसी-इंजन गाड़ी में यात्रा की होती, तो हमें 1500 किमी की राउंड ट्रिप को कवर करने के लिए लगभग 100 लीटर पेट्रोल की ज़रूरत पड़ती। अगर पेट्रोल की औसतन कीमत 90 रुपये/लीटर ली जाए तो, हमने सिर्फ ईंधन पर ही 9,000 रुपये खर्च किए होते। EV में, हमने इसे चार्ज करने के लिए लगभग 200 यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया। अगर 7 रुपये/यूनिट बिजली का शुल्क लिया जाए, तो यह लगभग 1,400 रुपये होता है, जो IC-Engine गाड़ी की कुल ईंधन लागत का मुश्किल से 15% है। कई जगहों पर हमसे बिजली का शुल्क भी नहीं लिया गया। यही कारण है कि हमें बिजली की 200 इकाइयों में से, सिर्फ 100 का ही भुगतान करना पड़ा। इसलिएइस पूरे ट्रिप में ईंधन की लागत सिर्फ 700 रुपये से 800 रुपये तक ही थी।”

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राजस्थान में रोड ट्रिप का अनुभव

आकाश बताते हैं, “टाटा मोटर्स ने जयपुर शहर के दायरे में दिल्ली, अजमेर, और कोटा शहरों की तरफ जाने वाले हाईवे से पहले कई सारे ‘फ़ास्ट चार्जिंग स्टेशन’ लगाए हैं। सभी प्रमुख शहर 250 किमी के दायरे में हैं। अब मैं अपने पैतृक गाँव की यात्रा करने की योजना बना रहा हूँ, जो जयपुर से 230 किमी की दूरी पर है।”

यात्रा शुरू करने से पहले आकाश ने, टाटा मोटर्स के एक वरिष्ठ प्रबंधक अमित गोयल से संपर्क करके तकनीकी बैक-अप के लिए मदद मांगी।

आकाश कहते हैं, “वह दिन दूर नहीं है जब बुनियादी चार्जिंग ढांचे के साथ, यात्री अपने EV से हाईवे पर सफ़र करेंगे।”

सीमित चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के बावजूद, आकाश और कौशल ने आसानी से 1500 किमी की राउंड ट्रिप को पूरा किया। उम्मीद है कि, शायद अगली बार, हमारे वातावरण को पेट्रोल या डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों से, निकलने वाली ज़हरीली गैस से प्रदूषित करने के बजाय, हम भी अपने EV से यात्राओं पर निकलेंगे।

संपादन – मानबी कटोच
मूल लेख – रिनचेन नोरबू वेंग्चुक

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