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#KnowYourPalm: सस्टेनेबल ऑयल पहचानने में हो रही परेशानी? इन कंपनियों के पास है जवाब

#KnowYourPalm: सस्टेनेबल ऑयल पहचानने में हो रही परेशानी? इन कंपनियों के पास है जवाब

#KnowYourPalm: एक उपभोक्ता और सक्रिय हितधारक के तौर पर, यह हमारा दायित्व है कि हम पाम ऑयल से बने उत्पादों को ज़िम्मेदारी के साथ मंगाएं और इसका इस्तेमाल करें।

(यह लेख RSPO के साथ पार्टनरशिप में प्रकाशित किया गया है।)

करीब 3 साल पहले समीर हंस ने अपने साथी सानू राठो और सुचिस्मिता नाइक के साथ मिलकर, भुवनेश्वर में अपने ‘बोका कैफे’ की शुरूआत की थी। इसके तहत, उनका एकमात्र लक्ष्य ग्राहकों को खाना सर्व करना नहीं था, बल्कि वह अपने द्वारा निर्धारित “एन ईको रिवुलेशन ऑन ए प्लेट” उद्देश्य को आगे बढ़ाने चाहते हैं।

ईको-फ्रेंडली कॉयर कोस्टर, कॉर्नस्टार्च और सुगरकेन पल्प पैकेजिंग, पेपर स्ट्रॉ से लेकर ज़ीरो प्लास्टिक के सिद्धांत को अपनाने तक, वह शहर में फूड और हास्पिटैलिटी इंडस्ट्री के समक्ष एक नज़ीर पेश करना चाहते थे।

समीर कहते हैं, “स्थायी तरीकों को अपना कर पर्यावरण को क्षति पहुँचाने वाले व्यवहारों का सामना करना, एक सतत् प्रक्रिया है। इसके लिए कड़ी प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने और बदलाव लाने की इच्छा अनिवार्य है।”

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और, इसीलिए, जब यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी के प्रमुख समन्वयक पुण्यस्लोका पांडा ने समीर से पाम ऑयल के उत्पादन को लेकर, लोगों में जागरूकता फैलाने में मदद की अपील की, तो समीर और उनकी टीम इसके लिए तुरंत राजी हो गई।

सकारात्मक बदलाव, एक बार में एक प्लेट

समीर इस बात से हैरान थे कि पाम ऑयल का इस्तेमाल खाना पकाने के तेल के रूप में नहीं किया जाता है। जबकि, आज इसका इस्तेमाल ब्रेड, आइसक्रीम, चॉकलेट और यहाँ तक ​​कि शैम्पू और साबुन बनाने में भी किया जाता है। यह दुनिया में सर्वाधिक इस्तेमाल में लाए जाने वाले तेलों में से एक है।

इसे लेकर समीर कहते हैं, “आज हम अपने जीवन में, पाम ऑयल का इस्तेमाल कई अप्रत्यक्ष तरीकों से करते हैं। जैसे – इसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को बनाने से लेकर साफ-सफाई और पैकिंग के वस्तुओं को बनाने में होता है। यह सीखने और सुधार करने की एक निरंतर प्रक्रिया है। हम इसे लोगों के और अनुकूल बनाने और बढ़ावा देने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

लेकिन, वास्तविक समस्या तेल के इस्तेमाल की नहीं, बल्कि इसके उत्पादन की है। पाम ऑयल के उत्पादन का असंगत तरीका, पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचा सकता है और लाखों हेक्टेयर में फैले उष्णकटिबंधीय वर्षा-वनों में, ऑरंगुटन, राइनोसोरस और सुमात्रन टाइगर जैसे लुप्तप्राय जानवरों के विनाश का कारण बन सकता है।

वहीं, दूसरी ओर, यदि इसके उत्पादन में सतत् व्यवहारों को अपनाया जाए, तो इससे तेल उत्पादन के क्षेत्र में कई गंभीर समस्याओं को निपटाया जा सकता है।

पुण्यस्लोका के शब्दों में, एक उपभोक्ता और सक्रिय हितधारक के तौर पर, यह हमारा दायित्व है कि हम पाम ऑयल से बने उत्पादों को ज़िम्मेदारी के साथ मंगाएं और इसका इस्तेमाल करें।

वह कहते हैं, “यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी, रेस्तरां को जागरूक करने की दिशा में मजबूती से कार्य कर रहा है, ताकि वह भी एक बदलाव का हिस्सा बन सकें।”

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इस तरह, वालिटियंरर्स की अपनी टीम के साथ, यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी ने भुवनेश्वर के करीब 30 होटलों से संपर्क किया और इनमें से कम से कम 15 होटल, अपने आपूर्तिकर्ताओं से सर्टिफाइड सस्टेनेबल पाम ऑयल को उपलब्ध कराने के सिलसिले में बातचीत करने के लिए तैयार हो गए।

बोका कैफे इस पहल की कई सफल कहानियों में से सिर्फ एक है!

यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी

यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी की शुरूआत साल 2019 में हुई। इस संस्था का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण में युवाओं और हितधारकों के बीच एक समन्वय स्थापित करना है।

राउंडटेबल ऑन सस्टेनेबल पाम ऑयल (RSPO) ने युवाओं को पाम ऑयल की सोर्सिंग और कन्सम्प्शन को लेकर जागरूक करने के लिए यूथ फॉर सस्टेनेबिलिटी को अपना साझेदार बनाया है। इसके तहत, उनका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन की दिशा में सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और पाम ऑयल के एक जिम्मेदार पूर्ण उपभोग को बढ़ावा देना है।

आरएसपीओ एक गैर-लाभकारी अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो सस्टेनेबल पाम ऑयल के मानकों को तय करने और ड्राइव डिमांड को विकसित करने की दिशा में कार्यरत है। पाम ऑयल का उत्पादन,  जब  आरएसपीओ मानकों के अनुसार किया जाता है, तो इसकी खेती, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के बीच तारतम्य को विकसित किया जाता है। आरएसपीओ यह तय करता है कि, पाम ऑयल के उत्पादन में वन्यजीवों के आवास को कोई नुकसान न हो और इसके आपूर्ति श्रृंखला में सभी हितधारकों को मजबूती मिले।

#KnowYourPalm अभियान के एक भागीदार के तौर पर, आरएसपीओ द बेटर इंडिया के साथ उपभोक्ताओं, व्यवसायों और अन्य हितधारकों को सस्टेनेबल सर्टिफाइड पाम ऑयल के व्यवहार को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

आरएसपीओ को यकीन है कि वह अपने सभी हितधारकों – पाम ऑयल के उत्पादकों, उपभोक्ताओं, निवेशकों, बैंकों, छोटे व्यवसायों से लेकर गैर सरकारी संगठनों और युवा संगठनों की मदद से पाम ऑयल को सामान्य बनाने के अपने उद्देश्यों को जल्द की साकार करेगा।

इस प्रयास को लेकर पुण्यस्लोका कहते हैं, “आज बाजार में पाम ऑयल कई रूपों में उपलब्ध है। जिसे आमतौर पर, ‘पाम’ या ‘पाम ओलीन’ जैसे अधिक प्रचलित शब्दों से सूचिबद्ध नहीं किया जाता है। इससे उपभोक्ताओं और अन्य व्यवसायों को इसे खरीदने में काफी कठिनाई होती है।”

वह आगे बताते हैं, “यूथ फ़ॉर सस्टेनेबिलिटी, होटलों को प्रमाणित पाम ऑयल को पहचानने में मदद कर रही है। हम सामान्यतः रेस्तरां और कैफे पर ध्यान केंद्रित करते हैं, क्योंकि इसे अधिकांशतः युवा इस्तेमाल करते हैं। हमारा मानना है कि ये छोटे-छोटे व्यवहार एक बड़े बदलाव की शुरुआत है।”

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समीर भी इस बात से सहमति जताते हुए कहते हैं कि बोका कैफे ने भी हमेशा इस पहल में युवाओं को केन्द्र में रखा है।

वह कहते हैं, “जब भी हम कुछ नया पेश करते हैं, तो शुरू में लोग इसे असुविधाजनक मान लेते हैं और नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन, उन्हें जागरूक करने का, यही एक अवसर होता है। उदाहरण के लिए, जब हमने अपने डिलिवरेबल्स को नॉन-प्लास्टिक कंटेनर में पैक किया तो, तो लोगों को इसे लेकर शिकायत थी। लेकिन, उन्हें यह समझाने के बाद कि प्लास्टिक कैसे पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है और इससे निपटने में एक छोटी सी कोशिश का कितना व्यापक असर हो सकता है, के बाद उन्होंने इसका समर्थन किया। इस तरह, एक समय में एक ग्राहक को इस ढंग से समझा कर हम, बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

आरएसपीओ का सदस्य कैसे बनें?

आरएसपीओ का सदस्य बनकर, भारत के खुदरा विक्रेता और रेस्टोरेंट चैन सर्टिफाइड सस्टेनेबल पाम ऑयल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा सकते हैं और ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए, जिम्मेदार पूर्ण तरीके से इसके कन्सम्प्शन और प्रोडक्शन को बढ़ावा दे सकते हैं।

यहाँ जानिए, आरएसपीओ का सदस्य कैसे बनें।

यह भी पढ़ें – #KnowYourPalm: जानिए क्यों ज़रूरी है सस्टेनेबल तरीकों से बना पाम ऑइल इस्तेमाल करना

संपादन: जी. एन. झा

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कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।
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