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मुम्बई: माँ-बेटी की जोड़ी ने लॉकडाउन के बीच शुरू की होम डिलीवरी सर्विस, हजारों है कमाई

मुंबई में रहने वाली गार्गी पारखे मूल रूप से एक कॉलेज स्टूडेंट हैं और लॉकडाउन के दौरान उन्होंने जब देखा कि लोग अपने घरों से दूर फंसे हैं और होटल बंद होने की वजह से उन्हें खाना आसानी से नहीं मिल रहा है, तो ऐसी स्थिति में उन्होंने अपनी माँ के साथ मिलकर खाने की होम डिलीवरी सर्विस शुरू कर दी।

कोरोना महामारी के कारण आम जनजीवन थम सा गया है। महामारी के संक्रमण के भय से शुरूआती दिनों में तो लोगों का अपने घर के दहलीज से भी बाहर निकलना आसान नहीं था। वहीं लॉकडाउन की वजह से देश में हजारों लोगों की नौकरियाँ चलीं गईं। लेकिन, इन सब नकारात्मक खबरों के बीच भी कई लोगों ने इस आपदा की घड़ी में सकारात्मक काम  भी किए और अपने नौकरी-पेशे को एक रणनीति के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया।

कुछ ऐसी ही कहानी है मुंबई के भांडुप वेस्ट में रहने वाली गार्गी पारखे की। गार्गी मूल रूप से एक कॉलेज स्टूडेंट हैं और फिलहाल, स्थानीय रामनारायण रुइया कॉलेज से साइकोलॉजी और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन कर रही हैं। 

गार्गी को बचपन से ही खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना काफी पसंद है और लॉकडाउन के दौरान उन्होंने जब देखा कि लोग अपने घरों से दूर फंसे हैं और होटल बंद होने की वजह से उन्हें खाना आसानी से नहीं मिल रहा है, तो ऐसी स्थिति में उन्होंने अपनी माँ के साथ मिलकर खाने की होम डिलीवरी सर्विस शुरू कर दी।

इसे लेकर गार्गी ने द बेटर इंडिया को बताया, “मुझे और मेरी माँ को खाना बनाना और उसे दूसरों को खिलाना काफी पसंद है। हम पहले से ही अपना फूड बिजनेस शुरू करना चाहते थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से हमने होम किचन शुरू किया।” 

Gargi Parekh
अपने माँ के साथ गार्गी

गार्गी आगे बताती हैं, “लॉकडाउन के शुरूआती दिनों में हम अपने ग्राहकों को टिफिन सेवा देते थे, लेकिन जुलाई में, हमने अपने वेंचर ‘फ्लेवर्स ऑफ होम’ को शुरू किया। इसके तहत हम ग्राहकों को मिसल पाव, पाव भाजी, स्मोकी पाव भाजी जैसे महाराष्ट्रीयन व्यंजनों के साथ-साथ पास्ता, मंचूरियन, छोले-भटूरे, आदि जैसे 25 से अधिक व्यंजनों की ऑनलाइन डिलीवरी की सुविधा दे रहे हैं। वहीं, अब जब सर्दी बढ़ रही है, तो हम अपने मेन्यू में पकौड़ा, मोमोज और सूप, आदि को भी शामिल करेंगे।”

बता दें कि गार्गी के पास अब तक 400 से अधिक ऑर्डर आ चुके हैं, जिससे उन्हें हर महीने 40 हजार रुपए से अधिक आय होती है।

माँ के साथ मिलकर शुरू किया बिजनेस

गार्गी बताती हैं, “मेरी माँ एक अस्पताल में एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम करती हैं और इस फूड बिजनेस को अपने समय की उपलब्धता के अनुसार, हम दोनों मिलकर चलाते हैं।”

Mumbai Girl food venture

वह बताती हैं, “आज के समय में लोगों को यह यकीन दिलाना मुश्किल है कि कोई वेंचर अपने घर में खाना बनाता है, लेकिन मेरी माँ ने लोगों को यकीन दिलाया कि हमारा खाना पूरी तरह हाइजेनिक है और मेरे घर वाले भी वही खाना खा रहे हैं, जो हम बेच रहे हैं। इससे हमारे ऊपर लोगों का विश्वास बढ़ा।”

किस तरीके से करते हैं बिजनेस

गार्गी अपने फूड बिजनेस को ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से चलाती हैं, ताकि इसमें रिस्क को कम किया जा सके। शायद यही कारण है कि लॉकडाउन में थोड़ी छूट के बाद, जब होटल फिर से खुलने लगे, तो उन्हें ज्यादा कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ा।

इसे लेकर वह कहती हैं, “बाजार में जब होटल खुलने लगे, तो एक वक्त ऐसा भी था कि हमें एक हफ्ते तक कोई ऑर्डर नहीं आए। इससे हम निराश थे और हमें लगा कि हमें अपना वेंचर बंद करना पड़ेगा। लेकिन, मेरी माँ ने मेरा हिम्मत बढ़ाया और कहा कि हमने इस बिजनेस को ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से शुरू किया है, तो इसमें चिन्ता की क्या बात है। हमारे पास जब भी ग्राहक आएंगे, हम उन्हें खाना बना कर देंगे। इस तरह, कुछ दिनों में हमारे पास धीरे-धीरे फिर से ऑर्डर आने लगे।”

बता दें कि आज गार्गी के पास पूरे मुंबई से आर्डर आते हैं और उनके बिजनेस का दायरा करीब 42 किलोमीटर तक फैला हुआ है। ग्राहकों को अपना ऑर्डर पहुँचाने के लिए उन्होंने वीफास्ट को अपना डिलीवरी पार्टनर बनाया है और 3 किलोमीटर के दायरे में ऑर्डर पहुँचाने के लिए वह कोई चार्ज नहीं लेती हैं।

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गार्गी द्वारा निर्मित गार्लिक ब्रेड

कैसे करती हैं मार्केटिंग

गार्गी ने इस बिजनेस को महज 5000 रुपए से शुरू किया था। उनके शुरूआती ग्राहक उनकी माँ और पिता जी के दोस्त थे, जो लॉकडाउन की वजह से बाहर खाना नहीं खा सकते हैं।

वह बताती हैं, “हमने अभी तक कोई एग्रेसिव मार्केटिंग नहीं की है। हमारा बिजनेस वर्ड ऑफ माउथ के जरिए आगे बढ़ा है। हम फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं।”

पैपर बैग का करती हैं इस्तेमाल

एक और खास बात यह है कि गार्गी, अपने ऑर्डर की पैकिंग के दौरान सिर्फ पेपर बैग का ही इस्तेमाल करती हैं, ताकि प्लास्टिक के बैग के इस्तेमाल को न्यूनतम रखने में मदद मिले। और, प्रकति में कार्बन फूट प्रिंट को कम किया जा सके।

क्या है भविष्य की योजना

गार्गी बताती हैं कि आज उनके अधिकांश ग्राहक बैचलर्स और कॉलेज जाने वाले छात्र हैं, जो खुद से खाना नहीं बना सकते। इसी को देखते हुए, वह देश में हालात सामान्य होने के बाद, स्कूली बच्चों के लिए खाना बनाने का विचार कर रहीं हैं। इसके तहत उनका अपना एक्सटेंशन सेंटर भी खोलने का इरादा है।

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गार्गी का मेन्यू

इसके अलावा, गार्गी अपने बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए मार्केटिंग और प्रमोशन में भी निवेश करने की योजना बना रही हैं।

गार्गी द्वारा होम किचन बिजनेस शुरू करने के लिए कुछ जरूरी सुझाव:

  • बिजनेस को शुरू करने से पहले, यह तय करें कि आपके एरिया में किस चीज की माँग है और आप क्या कर सकते हैं।
  • अपने ग्राहकों को तलाशने के बाद अपना प्राइस रेंज तय करें।
  • इसके बाद यह तय करें कि आपको इसमें कितने पैसे निवेश करने हैं।
  • फिर, एफआईसीसीआई के लिए आवेदन करें।
  • फिर सभी जरूरी संसाधनों को जुटाएँ।
  • नए ग्राहकों को तलाशने का प्रयास करें।
  • धैर्य बनाएँ रखें और लाभ से ज्यादा ग्राहकों को खुश करने पर ध्यान दें।

आप फूड ऑफ फ्लेवर्स से यहाँ संपर्क कर सकते हैं।

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