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प्रेरक कहानी: बचपन में गोबर उठाना पड़ा, अब करोड़ों का करते हैं बिज़नेस, 100 लोगों को देते हैं रोज़गार

प्रेरक कहानी: बचपन में गोबर उठाना पड़ा, अब करोड़ों का करते हैं बिज़नेस, 100 लोगों को देते हैं रोज़गार

हरियाणा के शौफी गाँव के रहने वाले गौरव राणा की। वह ब्यूटी स्टार्टअप कैलेप्सो के संस्थापक हैं और इसके तहत वह न सिर्फ हर साल करोड़ों रुपए की कमाई करते हैं, बल्कि 100 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

अपने जीवन में हर कोई सफल होना चाहता है, लेकिन सफलता उन्हीं के कदम चूमती है, जो कठिन से कठिन वक्त में भी हार नहीं मानते हैं। आज हम आपको एक ऐसे इंसान से मिलाने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी में तमाम कठिनाइयों के बावजूद बिजनेस के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।

यह कहानी है हरियाणा के शौफी गाँव के रहने वाले गौरव राणा की। वह ब्यूटी स्टार्टअप कैलेप्सो के संस्थापक हैं और इसके तहत वह न सिर्फ हर साल करोड़ों रुपए की कमाई करते हैं, बल्कि 100 से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

लेकिन, गौरव का यह सफर कई चुनौतियों से भरा रहा है। इसके बारे में वह द बेटर इंडिया को बताते हैं, “मेरा बचपन काफी संघर्षों से बीता है। मेरे पिता और ताऊ जी नशे की चपेट में आ गए थे, जिस वजह से घर की स्थिति खराब हो गई थी। आलम यह था कि हमें घर में जलावन के लिए सड़क से गोबर उठाने पड़ते थे।”

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गौरव राणा

गौरव के दादाजी घर में ही एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते थे और पूरे परिवार का पालन-पोषण इसी से होता था। लेकिन, विषम परिस्थितियों में भी गौरव ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई को जारी रखा। 

वह बताते हैं, “मैं पढ़ाई में अच्छा था और 10 वीं पास करने के बाद, मुझे अपने फूफा जी की मदद से आगरा के दयालबाग कॉलेज में, पॉलिटेक्निक में दाखिला मिल गया। यहाँ से साल 2011 में पासआउट होने के बाद, मुझे इंदौर में वोल्वो आयशर कंपनी में ऑटोमोबाइल इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिल गई और यही से मेरी जिंदगी बदल गई।”

इसके बाद गौरव ने नौकरी के साथ-साथ साल 2012 में एक इवेंट मैनेजमेंट बिजनेस भी शुरू किया, लेकिन इसमें उन्हें किसी कारणवश 18 लाख रुपए का नुकसान हुआ। यह गौरव के लिए काफी मुश्किल वक्त था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नए मौके की तलाश करने लगे।

इसी कड़ी में उन्हें ब्यूटी सैलून शुरू करने का विचार आया। वह बताते हैं, “मुझे इस बिजनेस को लेकर अपनी माँ से विचार मिला। जो कि खुद एक ब्यूटीशियन हैं। इसके बाद, मैंने साल 2015 में कैलेप्सो को शुरू करने का फैसला किया।”

शुरूआती दिनों में वह इंदौर के सैलून के लिए एक ऑन डिमांड सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करते थे, लेकिन यह बिजनेस उन्हें रास नहीं आया और इसके कुछ समय बाद, उन्होंने खुद ही सैलून शुरू करने का फैसला किया। 

गौरव, कैलेप्सो को एक ब्रांड बनाना चाहते थे, और इसके लिए उन्हें निवेशकों की सख्त जरूरत थी। इसी कड़ी में उन्होंने कई निवेशकों से अपने विचार साझा किए और अंत में उन्हें सफलता भी मिली।

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अपनी टीम के साथ गौरव

वह बताते हैं, “काफी प्रयासों के बाद मुझे ओयो रूम के सीईओ रितेश अग्रवाल जी, ह्यूज सिस्टिक के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद सूद जी, और पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा जी का साथ मिला।”

गौरव बिजनेस में रिस्क को कवर करने के लिए कैलेप्सो को चलाने के साथ-साथ नौकरी भी करना चाहते थे, लेकिन रितेश अग्रवाल और विजय शेखर शर्मा ने उन्हें नौकरी छोड़, पूरा ध्यान बिजनेस पर लगाने की सलाह दी, लेकिन गौरव के लिए यह आसान नहीं था।

वह बताते हैं, “नौकरी छोड़ने को लेकर मैं भयभीत था, कि अगर बिजनेस नहीं चला तो मैं अपने घर को कैसे चलाउंगा। लेकिन, दोनों ने मेरा पूरा साथ दिया और असफल होने की स्थिति में उन्होंने मुझे जॉब सिक्यूरिटी देने का वादा किया।”

इसके बाद, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और कैलेप्सो को एक नया आयाम देने के लिए एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़े। फिलहाल, वह अपने सैलून के बिजनेस को भोपाल और इंदौर में चला रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने साल 2019 में भारतीय रेलवे के लिए ‘रेलून’ नाम से एक सेवा को शुरू किया है।

गौरव बताते हैं, “रेलून, एक क्विक सैलून सर्विस है। इसके तहत हम ग्राहकों को 30 मिनट, यानी वेटिंग टाइम के अंदर हो सकने वाली सेवाओं को देते हैं, जैसे – हेड मसाज, फूट रिलेक्सोलॉजी, आदि।” 

वह आगे बताते हैं, “हमारी यह परियोजना, भोपाल, इंदौर, नागपुर, अहमदाबाद, नासिक और पटना रेलवे डिवीजन में चल रही है। वहीं, हमारे रेलून की शुरूआत मुंबई में जल्द ही होगी। इसके अलावा, हमारी योजना 50 ट्रेनों में कॉस्मेटिक सर्विसेज को उपलब्ध कराने की है।”

लॉकडाउन में क्या था एप्रोच

गौरव बताते हैं, “लॉकडाउन के दौरान हमें काफी परेशानियां हुईं, क्योंकि हम एक हाई टच इंडस्ट्री में हैं। शुरूआती तीन महीने में हमारा बिजनेस पूरी तरह बंद रहा, इस वजह से कई निवेशक पीछे हटने लगे। लेकिन, जैसे ही बाजार खुला, हमने बाउंस बैक किया।”

गौरव का रेलून

वह बताते हैं, “पहले लोग हाइजीन की ज्यादा चिंता नहीं करते थे। लेकिन, कोरोना महामारी के बाद, लोगों का इसके प्रति रुझान बढ़ा। पहले हाइजीन लग्जरी था, लेकिन आज यह जरूरत है। यही कारण है कि अब लोग पैसे कि चिंता किए बिना सैलून आने लगे।”

सुरक्षा मानकों के भरपूर इंतजाम

गौरव बताते हैं, “लॉकडाउन के बाद, कैलेप्सो की वैल्यू शुरू हो गई। क्योंकि अब लोग ऐसे जगह जाना पसंद करते हैं, जहाँ वह सुरक्षित महसूस कर सकें। हमने अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कई मानकों को तय किया है। जैसे सैलून में कोई भी व्यक्ति किसी भी चीज को सीधे तौर पर छू नहीं सकता है। वहीं, जो भी ग्राहक आते हैं, उन्हें पहले मास्क, नए तौलिए वगैरह दिए जाते हैं, और प्रवेश स्थल पर यूवी रे की मशीन लगी हुई।”

कितनी है कमाई

गौरव बताते हैं, “मैंने बिजनेस को जीरो से शुरू किया था, लेकिन पिछले साल हमारा वैल्यूएशन 70 करोड़ रुपए था। आने वाले वर्षों में, मेरा इरादा इस बिजनेस को और ऊँचाईयों तक लेकर जाने का है।”

दादाजी की दी हुई सीख आई काम

गौरव ने बचपन में अपने दादाजी के साथ दुकान चलाने से लेकर अब तक कई बिजनेस में हाथ आजमाया है। इस दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन वह हमेशा सहज रहे और हर असफलता के बाद उन्होंने वापसी की और कुछ नया करने का प्रयास किया।

इसे लेकर वह कहते हैं, “बचपन में मुझे मेरे दादाजी ने सीख दी थी कि कोई भी काम बुरा नहीं होता है, हर काम सीखने चाहिए और हमेशा आगे बढ़ते रहने की कोशिशि करनी चाहिए। मैं इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ा हूँ और मेरी सफलता का राज यही है।”

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संपादन – जी. एन झा

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कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।
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