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नहीं थी जमीन, तो थर्माकोल और कूलर-ट्रे से छत पर बना दिया ऑर्गेनिक किचन गार्डन!

नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर कार्यरत अजय अपनी छत पर एक सीजन में आठ से अधिक प्रकार की ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगाते हैं।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा कस्बे के रहने वाले अजय शर्मा पिछले तीन वर्षों से अपने घर की छत पर ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रहे हैं। इस ऑर्गेनिक किचन गार्डन की खासियत यह है कि इसे घर में बेकार पड़ी चीजों से तैयार किया गया है।

अजय शर्मा ने कूलर ट्रे, थर्माकोल और घर के बेकार पड़े बर्तनों से छत पर बागवानी तैयार की है। शाहपुरा के सेटेलाइट हॉस्पिटल में नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर कार्यरत अजय अपनी छत पर एक सीजन में आठ से अधिक प्रकार की ऑर्गेनिक सब्जियाँ उगाते हैं, वह भी जीरो बजट पर।

Gardengiri Rajasthan Ajay Sharma
अजय शर्मा

अजय ने द बेटर इंडिया को बताया, “साल 2017 में मैं कहीं खाना खाने गया था, मैंने वहाँ देखा कि नाले के गंदे पानी से सब्जियाँ उपजाई जा रही है। एक चिकित्सा कर्मी होने के नाते मुझे यह अंदाजा है कि केमिकल युक्त सब्जियों से हमारे सेहत को कितना नुकसान होता है। इसी वजह से मुझे आर्गेनिक फार्मिंग का विचार आया, लेकिन जमीन नहीं होने के कारण इसमें काफी परेशानी हो रही थी, इसके बाद मैंने अपने घर की छत पर खेती करने का फैसला किया।“

वह आगे बताते हैं, “इस काम में मेरे पिता ने हमेशा मदद की। शुरुआत में हमने 3-4 कंटेनर में धनिया और पुदीना लगाया था, लेकिन जो उपज हुई, उससे हमें लगा कि इसे और बढ़ाया जा सकता है। आज हम अपने छत पर सौ से अधिक कंटेनरों में भिंडी, टमाटर, लौकी, टिंडा जैसी कई सब्जियाँ उगाते हैं। इससे हर महीने लगभग 2 हजार रुपए की बचत भी होती है।“

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अजय के घर में उगाई गयी सब्जियाँ

फसलों की सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन विधि को अपनाने के साथ ही अजय कीटों से बचाव के लिए किसी रसायन का उपयोग न कर, गौमूत्र और आक के पौधे के मिश्रण से बनाए गए कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। ऑर्गेनिक खेती के क्षेत्र में भारी संभावनाओं को देखते हुए अजय अपने दायरे को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

इस विषय में वह कहते हैं, “मैं अमरूद, चीकू, नींबू जैसे फलों के साथ-साथ कई औषधियों पौधों की बड़े पैमाने पर खेती करने की योजना बना रहा हूँ, ताकि अपने उत्पादों को बाजार में उपलब्ध करा सकूँ। इसके अलावा हम देशी गायों को भी पालेंगे, जिससे शुद्ध दूध मिलने के साथ-साथ प्राकृतिक उर्वरकों की पूर्ति सुनिश्चित होगी।“

छत पर किचन गार्डन होने से शुद्ध सब्जियाँ मिलने के अलावा एक अन्य लाभ यह है कि इससे गर्मी के दिनों में भी घर का निचला हिस्सा ठंडा रहता है और एसी-कूलर के कम इस्तेमाल होने की वजह से बिजली की बचत होती है। अजय की इस पहल से प्रेरित होकर उनके कई संबंधियों ने भी छत पर बागवानी शुरू की है।

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अजय शर्मा का टेरेस गार्डन

द बेटर इंडिया ने अजय के अनुभव को जानने के लिए उनसे खास बातचीत की है, जिसका अंश आप नीचे पढ़ सकते हैं:

  1. यदि कोई छत पर आर्गेनिक खेती करना चाहता है, तो उसे शुरुआत कैसे करनी चाहिए?

अजय: यदि कोई मेरी तरह छत पर आर्गेनिक खेती करना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपने घर में जो भी खाली बर्तन, कंटेनर और अनुपयोगी सामान हैं, जिसमें मिट्टी डाली जा सके, उसे उपयोग में लाकर छोटे जड़ों वाले पौधों की खेती करनी चाहिए।

  1. अगर कोई पहली बार बागवानी कर रहा है, तो उसे किस तरह की खेती करनी चाहिए?

अजय: आपको सबसे पहले छोटी-छोटी सब्जियाँ, जो आसानी से लग जाती हैं यानी जिसे ज्यादा खाद-पानी की जरूरत नहीं होती है, उसे लगानी चाहिए। जैसे- धनिया, मेथी, पुदीना, टमाटर आदि।

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अजय ने शुरुआत धनिया व पुदीने से ही की थी।
  1. घर की छत पर बागवानी के लिए मिट्टी किस तरीके से तैयार करनी चाहिए?

अजय: छत पर खेती के लिए आपको 50 प्रतिशत काली या पीली मिट्टी या जो भी मिट्टी आपके खेत में है, 30 प्रतिशत कोकोपीट और 20 प्रतिशत जैविक खाद्य का उपयोग करना चाहिए।

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  1. छत पर बागवानी करने से क्या छत को नुकसान हो सकता है?

अजय: छत पर बागवानी करने से कोई भी नुकसान नहीं होता है। मुझे 3 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी तरह के परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।

  1. बागवानी के लिए कम लागत में संसाधनों की पूर्ति कैसे करें?

अजय: छत पर बागवानी करने का सबसे बड़ा फायदा है कि आपको जमीन की जरूरत नहीं होती है। इसमें आपको सिंचाई के लिए कम पानी की जरूरत होने के साथ-साथ बेकार पड़े जगह का सदुपयोग होता है। इसके अलावा, इसमें घर के मिट्टी भरने योग्य अनुपयोगी सामानों को काम में ला सकते हैं। आप फलों-सब्जियों के छिलके को खाद्य के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। कुल मिलाकर इस तकनीक में खर्च न के बराबर है।

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धूप से अपने पौधों को बचाने के लिए अजय नेट की चादर भी उपयोग करते हैं।
  1. सिंचाई के लिए किस विधि का उपयोग करना चाहिए?

अजय: सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम सबसे उपयोगी है, क्योंकि इसमें ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है और बूंद-बूंद सिंचाई से पानी की भी बचत होती है और पौधों की जड़ों तक पानी आसानी से पहुंच जाता है।

  1. बागवानी शुरू करने के लिए उचित समय क्या है?

अजय: बागवानी शुरू करने के लिए कोई निश्चित समय नहीं है। आपको जब मन करे आप बागवानी शुरू कर सकते हैं और हर मौसम के अनुसार फल-सब्जियाँ उगा सकते हैं।

  1. पेड़-पौधों की देखभाल कैसे करें, कब सिंचाई करें और कितनी धूप उनके लिए जरूरी है?

अजय: पेड़-पौधों की देखभाल नियमित रूप से करनी होती है और यह ध्यान रखना होता है कि इसमें कीड़े तो नहीं लग रहे हैं या पत्तियों को रंग तो पीला नहीं पड़ रहा है। कीटों से बचाव के लिए ऑर्गेनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा, सिंचाई मौसम और पौधों के अनुसार करनी चाहिए। जैसे- गर्मी के मौसम में दो बार हल्की-हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पौधे के लिए सुबह में 2 घंटे की धूप पर्याप्त होती है, अधिक धूप लगने से पौधा खराब हो सकता है, इससे बचाव के लिए सैड का उपयोग किया जा सकता है।

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अजय दिन पर दिन सब्जी उगाने का काम बढ़ा रहे हैं।
  1. पेड़-पौधों के पोषण के लिए घरेलू नुस्खे क्या हैं?

अजय: पेड़-पौधों के पोषण के लिए सब्जियों और फलों के छिलके की खाद बनाकर उपयोग में लिया जा सकता है। गाय का गोबर सबसे उपयोगी खाद है। इसके अलावा, केले, प्याज और लहसुन के छिलके को एक मटके में 7 से 14 दिनों तक पानी में गलाने के बाद इसे छानकर पौधों के पोषण के लिए स्प्रे किया जाता है।

  1. हमारे पाठकों के लिए कुछ जरूरी सुझाव?

अजय: पाठकों के लिए यही सुझाव है कि घर में उगाई सब्जियाँ बहुत स्वास्थवर्धक होती है। अगर आपके पास जमीन नहीं है, तो छत पर भी बागवानी करना काफी आसान है। इससे आपके बेकार पड़े संसाधनों का उपयोग होने के साथ-साथ आपकी आर्थिक बचत भी होती है।

अजय शर्मा से 9785189017 पर संपर्क किया जा सकता है। उनका ईमेल आईडी है  – ajay222683@gmail.com

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Written by कुमार देवांशु देव

राजनीतिक और सामाजिक मामलों में गहरी रुचि रखनेवाले देवांशु, शोध और हिन्दी लेखन में दक्ष हैं। इसके अलावा, उन्हें घूमने-फिरने का भी काफी शौक है।

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