ऑफर सिर्फ पाठकों के लिए: पाएं रू. 200 की अतिरिक्त छूट ' द बेटर होम ' पावरफुल नेचुरल क्लीनर्स पे।अभी खरीदें
X
अब तक 1000 मास्क बनाकर ज़रूरतमंदों में मुफ्त वितरित कर चूका है रायपुर का यह परिवार!

अब तक 1000 मास्क बनाकर ज़रूरतमंदों में मुफ्त वितरित कर चूका है रायपुर का यह परिवार!

जहाँ सुरेंद्र और उनकी टोली लोगों के पास जाकर कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क का वितरण कर रही है, वही उनकी पत्नी, आशा दिन-रात सिलाई मशीन पर मास्क बनाने का कार्य करतीं हैं।

कोरोना वायरस की दहशत पूरे विश्व में तेज़ी से फ़ैल चुकी है। भारत में शुक्रवार को 24 घंटों के भीतर ही कोरोना के रिकॉर्ड 50 मामले सामने आ गए। संक्रमण के मामले हाल के दिनों में बढ़ रहे हैं। यह एक अति संक्रामक वायरस है। इससे बचने के लिए WHO ने सामाजिक दूरी बनाये रखने, ज़रूरत पड़ने पर मास्क पहनने और जितना हो सके घर पर ही रहने की हिदायत दी है।  प्रशासन एवं विभिन्न सामाजिक संगठन अपने स्तर पर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं, लेकिन फिर भी मास्क की किल्लत बाज़ार में बनी हुई है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर के भी  कई बड़े-छोटे मेडिकल स्टोर्स पर जरूरतमंद लोग सैनिटाइजर व मास्क खरीदने पहुंच रहे हैं, लेकिन लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। ये तो फिर भी वे लोग हैं जो इस वायरस के बारे में सजग हैं और जिनकी मास्क व सैनिटाइज़र खरीदने की क्षमता है। पर सोचिए, समाज का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे न तो इस वायरस की ज़्यादा जानकारी है और न ही वे इन चीज़ों को खरीद सकते हैं। ऐसे में रायपुर के एक परिवार ने इस आपदा के खिलाफ अपनी तरफ से एक मुहीम छेड़ी।

अब तक 1000 मास्क बनाकर बाँट चूका है बैरागी परिवार

सुरेंद्र बैरागी का परिवार और उनकी सेवा टोली काफी समय से प्लास्टिक के खिलाफ मुहीम चला रहे हैं। इस मुहीम में वे घर पर ही पुराने कपड़ों से बैग बनाते हैं और बाज़ार में जाकर इसका मुफ्त वितरण करते हैं। 16 मार्च को भी इसी तरह थैले बांटने के लिए जब सुरेंद्र बाज़ार गए, तो उन्हें पता चला कि बाज़ार में मास्क की कालाबाज़ारी हो रही है और एक बड़ा तबका है जो मास्क खरीदने में असक्षम है।  इतना ही नहीं बहुत सारे लोगों को यह भी नहीं पता था कि कोरोना वायरस जैसा इन्फेक्शन भी फ़ैल रहा है। यह देखते ही सुरेंद्र ने अपने परिवार और सेवा टोली से चर्चा कर उसी शाम से मास्क बनाने का काम शुरू कर दिया।

सुरेंद्र कहते हैं, “प्लास्टिक के अभियान को अभी हमने रोक दिया है क्योंकि अभी जरुरत इस महामारी से निपटने की है। एक आम व्यक्ति जिस दिन अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास कर लेगा उस दिन हम बड़ी से बड़ी आपदा से निपट लेंगे।  पहले दिन हम सिर्फ 40 मास्क बना पाए थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों का सहयोग हमें मिल रहा है और अब तक हमनें 1000 मास्क बनाकर बाज़ार और बस्तियों में बाँट दिए है। ये मास्क पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं तथा इसे धोकर फिर से उपयोग किया जा सकता है।”

गृहिणी हूँ तो क्या? देश के काम आ सकती हूँ!

श्रीमती आशा बैरागी (दाएं) मास्क सिलते हुए

 

जहाँ सुरेंद्र और उनकी टोली लोगों के पास जाकर कोरोना वायरस से बचाव के लिए मास्क का वितरण कर रही है, वही उनकी पत्नी आशा दिन-रात सिलाई मशीन पर मास्क बनाने का कार्य करती है।

आशा कहतीं हैं,  “हर जगह लोग नकारात्मक बात कर रहे हैं।  कोई सरकार की कमियां निकाल रहा है, तो कोई अंत निकट है कह रहा है। ऐसे में, हम ये क्यों भूल जाते हैं कि इस महामारी के खात्मे के लिए एक-एक व्यक्ति को अपना समय देना होगा। डॉक्टर, नर्स, पुलिस अपना काम कर रहे है, तो मैं गृहणी होकर मास्क क्यों नहीं बना सकती। जो लोग मदद करने में असक्षम हैं, वे अपने घर में रहें और इस संक्रमण को फैलने से रोके। जब तक यह महामारी नियंत्रित नहीं हो जाती है, हमारा पूरा परिवारऔर बच्चे अपना हर संभव प्रयास करेंगे इसकी रोकथाम के लिए। इस मुहीम में हमारे बच्चे भी मदद कर रहे हैं।”

78 वर्ष की हैं सुशीला बैरागी, लेकिन जज़्बे और जोश में कमी नहीं!

सुरेंद्र की माताजी सुशीला बैरागी

इस मुहीम में बैरागी परिवार की वरिष्ठ और सुरेंद्र की माताजी सुशीला बैरागी भी मास्क बना रहीं हैं। वह सुई-धागे से मास्क बनाकर, अपने परिवार की इस मुहीम में हर संभव सहयोग कर रहीं हैं।

माताजी कहती हैं, “अख़बार देखने से पता चला कि आज बुजुर्ग और बच्चे दोनों इस संक्रमण की चपेट में है, इसलिए घर में छोटे -बड़े सभी को मिलकर काम करना चाहिए। तभी तो हम इतनी बड़ी आपदा को ख़त्म करने में सफल होंगे। ”

इस नेक कार्य में सेवा टोली से त्रिलोचन साहू, रवि प्रकाश गुप्ता, रितेन्द्र बैरागी, मितुल बैरागी, योगेंद्र वैष्णव, सूर्यान्शु वैष्णव, सरिता बैरागी, डुलिका बैरागी आदि भी मदद कर रहे हैं।  बैरागी परिवार और सेवा टोली ने प्लास्टिक के खिलाफ एक लम्बी लड़ाई लड़ी है और आज कोरोना से बचाव के लिए भी पूरी हिम्मत और सेवाभाव से अपना समय दे रहे हैं।

निस्वार्थ भाव से मास्क बनाना और उसे गरीब तबके में वितरण करना निश्चित ही बेहद सराहनीय है। बैरागी परिवार से यह सीखा जा सकता है कि व्यक्ति अगर अपनी ज़िम्मेदारी का सही तरीके से निर्वाहन करे, तो वो बड़ी से बड़ी चुनौती का आसानी से सामना कर सकता है।

इस महामारी से उबरने के लिए आप भी एक ज़िम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाए और एक स्वस्थ समाज बनाने में अपना योगदान दें।

कृपया ध्यान दें – WHO के निर्देशानुसार केवल उन लोगों को मास्क पहनने की ज़रूरत है जो खांस या छींक रहे हैं, या फिर पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए उनके आस-पास हैं। यदि आप मास्क खरीदना या पहनना चाहते हैं तो डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही ऐसा करें। मास्क से संबंधित WHO द्वारा दिए सभी निर्देश पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

जिनेन्द्र पारख

जिनेन्द्र पारख ने हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, रायपुर से वकालत की पढ़ाई की है। जिनेन्द्र, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर से आते है। इनकी रुचियों में शुमार हैं- समकालीन विषयों को पढ़ना, विश्लेषण लिखना, इतिहास पढ़ना और जीवन के हर हिस्से को सकारात्मक रूप से देखना।
Let’s be friends :)
सब्सक्राइब करिए और पाइए ये मुफ्त उपहार
  • देश भर से जुड़ी अच्छी ख़बरें सीधे आपके ईमेल में
  • देश में हो रहे अच्छे बदलावों की खबर सबसे पहले आप तक पहुंचेगी
  • जुड़िए उन हज़ारों भारतीयों से, जो रख रहे हैं बदलाव की नींव