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बिना मिट्टी की खेती को बना सकते हैं बिज़नेस, जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह!

इसमें 90% तक कम पानी की ज़रूरत होती है और साथ ही, जगह भी बहुत कम चाहिए होती है!

कुछ दिनों पहले हमने एक लेख लिखा था कि कैसे एक रिटायर्ड नेवी अफसर लोगों को हाइड्रोपोनिक्स के जरिए पेस्टीसाइड-फ्री खाना उगाना सिखा रहे हैं? इसके बाद, हमें बहुत से पाठकों ने हाइड्रोपोनिक्स के बारे में पूछा कि इसमें कितनी उपज हो जाती है और इसका व्यवसाय कैसा है?

इस संदर्भ में हमने दो हाइड्रोपोनिक्स एक्सपर्ट्स से बात की-  राहुल ढोका, एक्वा फार्म्स के फाउंडर और हाइड्रोपोनिक्स के एक्सपर्ट और हाइड्रीला एक्वापोनिक्स की फाउंडर ममता जाह्नवी।

यह दोनों ही हाइड्रोपोनिक्स में सफल व्यवसाय चला रहे हैं। आइये जानते हैं कि क्या कहना है इन एक्सपर्ट्स का:

छोटे से करें शुरुआत:

आज भले ही राहुल और ममता सफल व्यवसायी हैं लेकिन एक वक़्त था जब उन्होंने सिर्फ बागवानी से शुरू की थी। उन्हें पेड़-पौधे लगाने में दिलचस्पी थी और बस वहीं से छोटी-सी शुरुआत उन्होंने की।

ममता कहती हैं, “मैं हमेशा नए लोगों को सलाह देती हूँ कि पहले कोई छोटा पायलट प्रोजेक्ट करें, कहीं पर प्रैक्टिस करें और फिर कमर्शियल काम करें।”

“शुरुआत में, छोटे हर्ब्स जैसे तुलसी आदि से शुरुआत करें। इससे आपको प्रक्रिया समझ में आएगी। कमर्शियल करने से पहले अपने छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स की सफलता पर खुश होना बहुत ज़रूरी है,” उन्होंने आगे कहा।

दूसरी, तरफ राहुल कहते हैं, “मेरे लिए यह बस एक हॉबी से शुरू हुआ। वर्टीकल गार्डनिंग के कॉन्सेप्ट ने मुझे बहुत प्रभावित किया और मुझे ख़ुशी है कि कमर्शियल काम शुरू करने से पहले मैंने इस प्रक्रिया को सीखा और एन्जॉय किया।”

राहुल आज 6000 से भी ज्यादा पेड़-पौधे लगाते हैं और इनमें इटालियन तुलसी, पालक, पुदीना, अजवाइन, लेटिष, केल और कई तरह की हरी सलाद शामिल है।

वह आगे कहते हैं कि हाइड्रोपोनिक्स के बारे में सिर्फ जानकारी इकट्ठा करने से अच्छा है कि आप प्रैक्टिकल करें। 2 या फिर 10 प्लांटर के सिस्टम से शुरू करें और तकनीक को समझें। जब आप इसमें माहिर हो जाएं तो अपना हाइड्रोपोनिक्स गार्डन बनाए।

हाइड्रोपोनिक्स से कमाई और बचत:

राहुल आगे कहते हैं कि अक्सर एक सवाल उठता है कि जैविक बागवानी की जगह हाइड्रोपोनिक्स क्यों अपनाएं? इसका जवाब बहुत ही साधारण-सा है कि हाइड्रोपोनिक्स में आपको जैविक बागवानी से 90% कम पानी की ज़रूरत होती है। साथ ही, इस प्रक्रिया में सभी पोषक तत्व सीधे पौधों को मिलते हैं तो उपज ज्यादा होती है।

सबसे बड़ा फायदा यह है कि हाइड्रोपोनिक्स को काफी जगह और पानी की ज़रूरत नहीं होती और इससे आपको काफी बचत होती है। राहुल सिर्फ 80 स्क्वायर फीट की जगह में अपने सभी पेड़-पौधे (6000) बोते हैं।

“मिट्टी में जिन पौधों को पनपने के लिए 60 दिन चाहिए होते हैं, वही पौधे हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में इसका आधा समय लेते हैं और दुगुनी उपज देते हैं,” राहुल ने आगे बताया।

इस प्रक्रिया के बारे में ममता आगे कहतीं हैं कि बाज़ार में भी हाइड्रोपोनिक्स की उपज को काफी अच्छा दाम मिलता है क्योंकि अब लोग जागरूक हैं और उन्हें हाइड्रोपोनिक्स के फायदे पता हैं। साथ ही, सब जानते हैं कि यह बहुत ही साफ़-सुथरा तरीका है और बिल्कुल पेस्टीसाइड-फ्री है।

समय देना है बहुत ज़रूरी:

अगर आप हाइड्रोपोनिक्स में कमर्शियल स्तर पर आगे बढ़ना चाहते हैं तो सबसे ज्यादा ज़रूरी है समय। आपको इसे अपनी प्राथमिकता बनानी होगी, आप इसे साइड बिज़नेस की तरह नहीं कर सकते। हाइड्रोपोनिक्स फार्म शुरू करने के लिए बहुत मेहनत और भरपूर समय की ज़रूरत होती है।

राहुल ने अपनी 9 से 5 की डेस्क जॉब छोड़कर हाइड्रोपोनिक्स शुरू किया था और आज भी वह हर दिन लगभग 4 घंटे इसके लिए देते हैं।

“आपको अपने पौधों के विकास और कीटों का ध्यान रखने के लिए काफी समय देना होगा। आपको यह भी देखना होगा कि पौधों को पर्याप्त पोषण और पानी मिल रहा है या नहीं। ये हाइड्रोपोनिक्स के ज़रूरी नियम हैं,” ममता ने अंत में कहा।

उम्मीद है कि आपके बहुत से सवालों के जवाब मिल गए होंगे!

मूल लेख: सेरेन सारा ज़कारिया
संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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