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पूर्व नौसेना अफसर ने शुरू किया ‘पेट भरो प्रोजेक्ट’, सिखा रहे हैं पेस्टीसाइड-फ्री खाना उगाना!

पेस्टीसाइड-फ्री होने के साथ-साथ यह तकनीक मिट्टी-फ्री भी है, यानी आपको इन सब्ज़ियों को उगाने के लिए मिट्टी की ज़रूरत नहीं है!

शायद ही आपने कभी सुना हो कि मिट्टी के बिना भी खेती हो सकती है। जी हाँ, यह सुनने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन यह सच है और कहीं न कहीं आज की ज़रूरत भी है। पिछले कुछ दशकों में देश में उपजाऊ ज़मीन का क्षेत्रफल जिस तरह से कम हुआ है, ऐसे में हमें कोई तो विकल्प चाहिए।

हाइड्रोपोनिक्स, एक ऐसी ही तकनीक है जिसमें आप बिना मिट्टी के खेती कर सकते हैं। यह तकनीक कोलंबिया में इजाद हुई और आज हर एक देश में अपनी जगह बना रही है। सीमित ज़मीन और साधनों में खेती करने का यह एक बेहतर तरीका है।

भारत में भी बहुत से लोग धीरे-धीरे इस तकनीक को अपना रहे हैं और इस फेहरिस्त में एक नाम शामिल होता है सी. वी. प्रकाश का। मूल रूप से केरल के एक मिलिट्री परिवार से संबंध रखने वाले प्रकाश ने 14 सालों तक भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं देने के बाद 35 साल की उम्र में रिटायरमेंट ले ली।

CV Prakash, Founder of PetBharo Project

“मैंने खुद रिटायरमेंट ली क्योंकि मैं कुछ अलग करना चाहता था। इसलिए मैं रिटायरमेंट के बाद दुबई शिफ्ट हो गया और वहां अलग-अलग काम किये। इसके बाद मैं वहां से ऑस्ट्रेलिया गया, जहां मैंने एक कंसल्टिंग फर्म शुरू की। अपनी फर्म के ज़रिए मैं कंपनियों को उनके बिज़नेस में मदद करता था। एक बार मुझे श्रीलंका की एक कंपनी का प्रोजेक्ट मिला। यह कंपनी हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के क्षेत्र में काम करती थी,” उन्होंने बताया.

प्रकाश जब उस कंपनी के मैनेजर से मिलने उनके ऑफिस पहुंचे तो उन्होंने वहां दो खूबसूरत ग्रीनहाउस गार्डन देखे। इन गार्डन्स में उन्होंने फल, फूल और सब्ज़ियाँ उगाई हुईं थीं और वह भी बिना मिट्टी के। उसी दिन से प्रकाश ने इस कॉन्सेप्ट को और गहराई से समझने की ठान ली। उन्होंने जितना इस तकनीक के बारे में पढ़ा, उतना ही उनका मन खुद इसे आजमाने का हुआ।

कई सालों तक विदेश में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक सीखने और खुद प्रैक्टिस करने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फैसला किया। “मेरा उद्देश्य हाइड्रोपोनिक्स के बारे में भारत के लोगों को जागरूक कर उन्हें खुद अपना जैविक और स्वस्थ खाना उगाने के लिए प्रेरित करना था। अच्छा और स्वस्थ खाना हर एक नागरिक का अधिकार है। चाहे वह कोई अमीर हो या गरीब।”

साल 2008 में उन्होंने कर्नाटक के धारवाड़ जिले में ‘पेट भरो प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की। उनका पहला प्रोजेक्ट बंगलुरु के हेन्नुर में एक अनाथ आश्रम के लिए था। उन्होंने इस अनाथ आश्रम में एक 250 स्क्वायर फीट का गार्डन सेटअप किया और साथ ही वहां के बच्चों को भी यह तकनीक सिखाई।

इस तरह से खेती करने के लिए सबसे पहले एक पॉली हाउस बनाया जाता है, जिसमें एक नियंत्रित तापमान और जलवायु में पौधे उगते हैं। पौधे उगाने के लिए आपको ग्रो ट्रे चाहिए, जिसमें केवल कोको-पीट, वर्मीक्युलाइट और परलाइट का मिश्रण भरा जाता है। इसमें बीज बोए जाते हैं और फिर उनके अंकुरित होने तक पानी दिया जाता है। पॉली हाउस को किसी विशेष फूल, फल या सब्जी की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है, तो उतरते-चढ़ते तापमान के कारण कोई कीट पेड़ों को ख़राब नहीं करता है।

आम तौर पर मिट्टी में पाए जाने वाले कीट भी यहाँ नहीं होते हैं। इसलिए, फल, फूल और सब्ज़ियाँ उगाने का यह सबसे स्वच्छ और स्वस्थ तरीका है।

अब तक, प्रकाश लगभग 10 हज़ार लोगों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। वह बताते हैं, “मुझे अपने ट्रेनिंग सेशन से समझ में आया कि देश में यह तकनीक पहले से मौजूद है, बस कमी है तो स्किल की। मैं पहले 1 दिन का वर्कशॉप करता था, लेकिन पिछले साल से मैंने लोगों के लिए तीन महीने का रेसिडेंशियल ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शुरू किया है।”

इस प्रोग्राम में वह अपने छात्रों को 40 किस्म की सब्जियों और हर्ब्स से परिचित कराते हैं। इसमें वे बीज लगाने से लेकर फसल काटने तक, सभी ज़रूरी चरणों के बारे में सीखते हैं। प्रकाश के मुताबिक, हाइड्रोपोनिक्स में सफल होने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी है कि आपके पास सही स्किल हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि यह बहुत आसान है।

लेकिन वास्विकता इससे अलग है। प्रकाश अपने छात्रों को पहले दिन से ही इस तकनीक से जुड़ी सभी परेशानियों के बारे में विस्तार से बता देते हैं। वह कहते हैं, “मैं किसी को भी सब कुछ अच्छा-अच्छा बताकर उन्हें इससे जुड़ने के लिए उकसाता नहीं हूँ। अपनी ट्रेनिंग के पहले दिन ही, लोगों को हर एक बात समझाता हूँ ताकि दिन के अंत तक वे फैसला कर पाएं कि उन्हें ये सीखना है या नहीं।”

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प्रकाश से ट्रेनिंग लेने वाले 25 वर्षीय लोकेश बताते हैं कि उन्होंने तीन महीने का ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था। उन्होंने हॉर्टिकल्चर में ग्रैजुएशन की है। “ग्रैजुएशन के बाद मुझे इस क्षेत्र में बहुत अच्छे विकल्प नहीं मिले और सैलरी भी कोई खास नहीं थी। पढ़ाई के दौरान हाइड्रोपोनिक्स के बारे में थोड़ा-बहुत पढ़ा था और जब मुझे इसके ट्रेनिंग कोर्स का पता चला तो मैंने इसके लिए अप्लाई किया। प्रकाश सर ने हमें हर चीज़ बहुत बारीकी से समझाई। प्रैक्टिकल करते हुए पूरी ट्रेनिंग हुई। उन्होंने हमें पेस्टीसाइड छोड़कर पूर्ण रूप से जैविक खेती करने के लिए तैयार किया,” उन्होंने कहा।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद लोकेश ने गार्डनिंग के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों में अप्लाई किया। फ़िलहाल, वह हैदराबाद की ‘ट्रायंगल फार्म’ कंपनी में अच्छे पैकेज की नौकरी कर रहे हैं। लोकेश कहते हैं कि यदि सही तरह से ट्रेनिंग और स्किल मिलें तो हाइड्रोपोनिक्स का भारत में अच्छा भविष्य है।

Lokesh Yadav along with Prakash

पिछले साल से प्रकाश ने ‘हाइड्रो यात्रा’ की शुरुआत भी की है। जिसमें उन्होंने 13 शहरों में 44 वर्कशॉप कीं। प्रकाश कहते हैं कि उनका उद्देश्य लोगों को पेस्टिसाइड-फ्री, स्वस्थ और सेहतमंद खाना उगाने और खाने के लिए प्रेरित करना है। इस तरह से वह आने वाली पीढ़ी के लिए अपना कुछ योगदान दे पाएंगे।

कोई भी हाइड्रोपोनिक्स की ट्रेनिंग करके अपना खुद का गार्डन सेटअप कर सकता है या फिर बागवानी के सेक्टर में काम कर रही किसी कंपनी के साथ भी काम कर सकता है। प्रकाश कहते हैं, “अगर कोई खुद इस तकनीक से खेती करना चाहता है तो उन्हें कॉकोपीट, माइक्रोब्स, पोषक तत्वों का स्प्रे, ग्रो बैग्स आदि की ज़रूरत होती है। बाज़ारों में आपको आसानी से हाइड्रोपोनिक्स किट मिल जाएगी। इसमें आपकी एक बार की लागत लगभग 20 से 22 हज़ार तक हो सकती है।”

इस तकनीक के ज़रिये आप फली, टमाटर, बैंगन आदि से लेकर पालक, धनिया और स्ट्रॉबेरी आदि तक की खेती कर सकते हैं और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात यह है कि आप जहाँ भी खेती कर रहे हैं, उस जगह पर बाज़ार की मांग के हिसाब से फसलें उगाएं, तभी आपको अपनी लागत का सही मुनाफा मिलेगा।

सी. वी. प्रकाश ने ट्रेनिंग और वर्कशॉप के अलावा, अब तक कई बड़े फार्म कंसल्टिंग प्रोजेक्ट्स भी किए हैं। उन्होंने साल 2014 में कोयंबटूर में 3, 500 स्क्वायर फीट में एक हाइड्रोपोनिक्स गार्डन बनाया था। कई शहरों में उन्होंने लोगों के लिए फ़ूड-पार्क्स भी बनाए हैं और बहुत से संस्थानों में लोगों को इस तकनीक की ट्रेनिंग दी है।

उन्होंने बंगलुरु के सत्या साईं सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कर्मचारियों को भी ट्रेनिंग दी है और वहां छत पर एक गार्डन बनाया है। प्रकाश को साल 2016 में उनके काम के लिए ‘जय जवान जय किसान’ सम्मान से भी नवाज़ा गया।

अंत में प्रकाश सिर्फ इतना कहते हैं, “हाइड्रोपोनिक्स से खेती करने के लिए आपको स्किल, पैशन और धैर्य की ज़रूरत होती है। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, कोई भी इसे सीख सकता है। बस आपको सही स्किल, सही जगह और मेहनत के साथ काम करना आना चाहिए।”

यदि आप प्रकाश से संपर्क करना चाहते हैं तो उनका फेसबुक पेज देख सकते हैं या फिर 9743219388 पर कॉल कर सकते हैं!

संपादन- अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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