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मात्र 3 हज़ार रुपये की लागत से शुरू करें अपना टेरेस गार्डन!

छत पर पेड़-पौधे उगाने के लिए आप पुरानी बाल्टी, डिब्बे या फिर बाज़ार से ग्रो बैग लाकर इस्तेमाल कर सकते हैं!

कुछ समय पहले हमें वाडला की एक स्कूल टीचर, सिस्टर मीना और उनके कुछ छात्रों का ईमेल मिला। वे अपने स्कूल की छत पर टेरेस गार्डन शुरू करना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें उचित मार्गदर्शन की ज़रूरत है।

हमने इस संदर्भ में, दिल्ली की जीरो बजट नैचुरल फार्मिंग फाउंडेशन के फाउंडर दीपक राघव और चेन्नई में एक्वा फार्म्स के फाउंडर, राहुल से बात की। दीपक और राहुल, दोनों ही इस क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं, दीपक रूफटॉप गार्डनिंग करते हैं और राहुल को हाइड्रोपोनिक्स में महारत हासिल है।

एक अच्छा टेरेस गार्डन कैसे उगाया जाए, इस बारे में उन्होंने हमारे साथ अपनी कुछ एक्सपर्ट सलाह साझा की। आज हम आपको वही बता रहे हैं।

जगह बहुत ज़रूरी है:

Space is everything

टेरेस गार्डनिंग का कॉन्सेप्ट जगह पर निर्भर करता है। इस बात का ध्यान रखें कि आपकी छत पर अच्छी धूप आती है। अगर छत पर कोई ऐसी जगह है जहां बहुत ही ज्यादा धूप पड़ती है तो वहां आपको एक शेड लगाना पड़ेगा या फिर आप वहां पेड़-पौधे न लगाएं।

छत पर पेड़-पौधे उगाने के लिए बाल्टी, डिब्बे, ग्रोबैग (जिसमें पौधे उगाते हैं) का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर आप मिट्टी डालकर लॉन भी तैयार कर सकते हैं। अगर आप एक किफ़ायती टेरेस गार्डन लगाना चाहते हैं, तब ग्रोबैग्स का इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रहे कि ये ग्रोबैग्स वाटरप्रूफ हों ताकि आपके घर को कोई नुकसान न हो।

छत पर आप आसानी से फलियाँ, बैंगन, टमाटर और मिर्च जैसी सब्ज़ियाँ उगा सकते हैं। अगर आपके पास ज्यादा जगह है तो आप बेल और जड़ वाली सब्ज़ियाँ जैसे आलू, गाजर आदि भी उगा सकते हैं। दीपक बताते हैं,

“यदि आपकी छत मजबूत है, तो आप कुछ फलों के पेड़ भी लगा सकते हैं। ध्यान रखें कि फलों के लिए देशी बीज ही इस्तेमाल करें क्योंकि देसी बीज किसी भी तरह के मौसम और जलवायु को सहन कर सकते हैं और आपको अच्छी उपज भी देते हैं। ये बीज आपको आसानी से बाज़ार में मिल भी जाएंगे।”

खुद तैयार करें मिट्टी:

Prepare the soil

टेरेस गार्डनिंग के लिए ज़रूरी है कि आप खुद मिट्टी तैयार करें। इस मिश्रण में सामान्य मिट्टी, कोको पीट और वर्मीकंपोस्ट बराबर की मात्रा में होनी चाहिए।

राहुल बताते हैं कि आप मिट्टी में जो पोषक तत्व मिलाते हैं, बारिश के मौसम में वो अक्सर बह जाते हैं। इसलिए हर हफ्ते आपको मिट्टी में ये सब मिलाना चाहिए। यहाँ तक कि आप अपने गार्डन के ही एग्रो-वेस्ट से खाद, पेस्टीसाइड और उर्वरक बना सकते हैं।

वह आगे कहते हैं कि पौधों को दिन में दो बार पानी अवश्य दें, खासकर कि गर्मियों के मौसम में।

संयम है सफलता की कुंजी:

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दोनों एक्सपर्ट कहते हैं कि संयम सफलता की कुंजी है। राहुल कहते हैं,

“जो लोग पहली बार गार्डनिंग कर रहे होते हैं, उनके लिए शुरुआत में धैर्य रखना बहुत मुश्किल होता है। बहुत बार होता है कि वे बीच में ही गार्डनिंग छोड़ देते हैं, लेकिन अपने घर में उगी सब्ज़ियाँ और फल खाने का आनंद कुछ और ही है।”

इसी में दीपक आगे कहते हैं कि गार्डनिंग करना किसी बच्चे को बड़ा करने के जैसा है। यदि आप उतनी ही कोशिश और प्रयास करते हैं तो आपको आपकी उम्मीद से ज्यादा अच्छे परिणाम मिलते हैं।

कम बजट के टेरेस गार्डन:

मिट्टी, बीज और खाद आदि किसी स्थानीय किसान से लेने से आपकी काफी बचत होती है। शुरुआती 3 हज़ार रुपये की लागत से आप अपना टेरेस गार्डन शुरू कर सकते हैं। ज़्यादातर ज़रूरी चीज़ें आपको बहुत ही किफ़ायती दाम पर नर्सरी और अन्य ऑर्गेनिक फार्म्स से मिल जाती हैं।

राहुल अंत में कहते हैं कि टेरेस गार्डनिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है। एक अच्छा टेरेस गार्डन इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसमें कितनी मेहनत करते हैं।

उम्मीद है कि इस लेख को पढ़कर आपको अपने कई सवालों के जवाब मिल गए होंगे और साथ ही, अपना टेरेस गार्डन शुरू करने की प्रेरणा भी!

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मूल लेख: सेरेन सारा ज़ुकेरिया

संपादन – अर्चना गुप्ता


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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