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500 गमले, 40 किस्में, 0 केमिकल: इस दंपति ने अपनी छत को बदला अर्बन फार्म में!

मात्र 6 महीने पहले शुरू हुए उनके यूट्यूब चैनल पर आज 77 हज़ार से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं!

हरों में बहुत से लोग आज गार्डनिंग, टेरेस गार्डन और किचन गार्डन की आदतें अपना रहे हैं। घर में जगह चाहे कम हो या ज्यादा, उसी के हिसाब से पेड़-पौधे लगाना, खास तौर पर कोशिश करना कि अपने घर के लिए सब्ज़ियाँ खुद ही उगा ली जाएं। इससे एक तो आपको और आपके परिवार को पौष्टिक खाना मिलता है और साथ ही, बाहर से जैविक चीजें खरीदने के लिए आपको ढेरों पैसे नहीं खर्च करने पड़ते।

द बेटर इंडिया पर हमने ऐसे कई लोगों की कहानियाँ आप तक पहुंचाई हैं, जो कि किसी न किसी तरह से अपने किचन की ज़रूरतें अपने घर में ही पेड़-पौधे लगाकर पूरा कर रहे हैं। उनके तरीके भले ही अलग हों लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है- अपने परिवार को स्वस्थ, स्वच्छ और जैविक सब्ज़ियाँ खिलाना।

ऐसी ही एक और कहानी है हैदराबाद के एक दंपति, श्रीनिवास और पद्मा पिन्नाका की।

Padma and Srinivas Pinnaka.

पद्मा को हमेशा से ही गार्डनिंग का शौक रहा। लेकिन साल 2014 तक उन्हें अपने घर की एक छोटी-सी बालकनी में चंद पेड़-पौधों के साथ ही इस शौक को पूरा करना पड़ता था। बहुत बार वह कोशिश करतीं कि और तरह-तरह की किस्म के पौधे लगायें, लेकिन कहाँ? यह सवाल उन्हें रोक देता।

श्रीनिवास (फ़िलहाल रिटायर) ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा, “हमने हमेशा से ही एक बड़ा-सा टेरेस गार्डन लगाने का प्लान किया था। लेकिन बालकनी में हम चंद गमले ही रख सकते थे। पद्मा को गार्डनिंग बहुत पसंद है और वह हमेशा से ही फूलों के अलावा और भी पेड़-पौधे लगाना चाहती थी। फिर 2014 में हम अपने नए घर में शिफ्ट हुए तो उसे अपने मन मुताबिक गार्डन लगाने का मौका मिला।”

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आज, इस दंपति के घर के टेरेस पर आपको फल, फूल और सब्ज़ियों की 40 तरह की किस्मों के लगभग 500 पौधे मिल जाएंगे। उनके इस गार्डन को हैदराबाद के सैकड़ों लोगों से इस कदर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है कि अब उन्हें अपने टिप्स शेयर करने के लिए अपना एक यूट्यूब चैनल शुरू करना पड़ गया है।

उनके चैनल, पतनम लो पल्लेतुरु बाय पिन्नाका पद्मा को शुरू हुए मात्र छह महीने हुए हैं और इतने से समय में उनके 77 हज़ार से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। साथ ही, उनकी हर एक वीडियो पर हजारों में व्यूज हैं।

 

 

पद्मा के गार्डन में भले ही 500 पौधे हैं लेकिन वह कम लागत और कम वेस्ट के सिद्धांत में भरोसा रखती हैं। जैसे कि उनके हर एक गमले के नीचे एक बर्तन रखा गया है ताकि जो भी एक्स्ट्रा पानी गमले से निकलता है वह इकट्ठा हो सके। गर्मियों में वह अपने पौधों में कैन भर-भर के पानी डालने की बजाय, उन पर दिन में तीन बार पानी से स्प्रे करती हैं। इससे पानी की काफी बचत होती है।

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पौधों के लिए दिन में सिर्फ 150 लीटर पानी ही काफी होता है और अपने गार्डन में पानी देने की ज़िम्मेदारी पद्मा की है। बाकी श्रीनिवास इस बात का ख्याल रखते हैं कि कोई कीड़े-मकौड़े उनके पेड़ों को खराब न करें। उन्होंने बताया कि वे अपने गार्डन के लिए ‘सर्किल ऑफ़ लाइफ’ का फलसफा इस्तेमाल करते हैं। जी हाँ, गार्डन से मिलने वाले फल व सब्ज़ियों के पत्ते या फिर पेड़ों के सूखे पत्तों से वे जैविक खाद तैयार करते हैं और इसे पौधों में डालते हैं।

पद्मा आगे बताती हैं कि उनका टेरेस इतना भी बड़ा नहीं है कि वे और भी ज्यादा पेड़ लगा सकें। इसलिए उन्होंने गमलों के अंदर गमले रखने की तकनीक भी अपनाई है। जिसमें वह बड़े गमलों में छोटे-छोटे दो-तीन गमले रखती हैं और फिर उन्हें सिर्फ सबसे ऊपर वाले गमले में पानी देना होता है। बाकी पेड़ों में इसी में से पानी चला जाता है।

(L) The pot-in-pot method and (R) clay and recycled plastic pots in the terrace garden.

“मैं सोशल मीडिया से नए तरीके सीखकर नए-नए एक्सपेरिमेंट करती हूँ। लेकिन ज़्यादातर पौधों में मैं खुद से बनाया जैविक खाद ही डालती हूँ,” 54 वर्षीया पद्मा ने कहा, जिनकी सिर्फ यही कोशिश है कि वह चाहे जो भी तरीका अपनाएं लेकिन उनका गार्डन बिल्कुल जैविक हो और रसायन-मुक्त हो।

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उनके गार्डन में आपको 5 किस्म के आम के पेड़, दो किस्म के अंगूर, एवोकैडो, नारियल, केला, पपीता, ड्रैगन फ्रूट, मलेसिया सेब, शिमला सेब, कटहल, कृष्णा फल, बेल, स्ट्रॉबेरी, इमली, अनार, मौसंबी, निम्बू व संतरे के पेड़ मिल जाएंगे। इसके अलावा, सब्ज़ियों में आपको टमाटर, बैंगन, हरी मिर्च, करेला, खीरा, ब्रोकली, तोरी, भिन्डी, फ्रेंच बीन्स, अदरक, हल्दी और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां मिल जाएंगी।

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पद्मा कहती हैं कि गार्डनिंग का सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि आपको पता है कि आपके खाने में क्या जा रहा है। दूसरा, इससे आपको नियमित तौर पर अच्छी एक्सरसाइज़ भी हो जाती है। और ये दोनों ही बातें आपके अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती हैं।

“एक पौधे से दूसरे पौधे पर जाना, उन्हें दिन में दो बार पानी देना और इन्हें बढ़ते हुए देखना, कई तरीकों से अच्छा है। साथ ही, यह भी न भूलें कि अपना एक जैविक गार्डन होना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है,” पद्मा ने कहा।

पद्मा और श्रीनिवास बताते हैं कि उनके बगीचे से उनकी हफ्ते में 4-5 दिन की खाने की ज़रूरतें पूरी हो जाती हैं। 

The lush garden at Pinnakas’.

जैसे-जैसे उनका गार्डन बढ़ने लगा तो उनके आस-पड़ोस के लोगों ने उनके यहाँ गार्डनिंग के बारे में जानने-समझने के लिए आना शुरू कर दिया। हैदराबाद में उनके गार्डन के बारे में पता चलने में देर नहीं लगी और फिर अजनबी लोग भी उनके दरवाजे पर अर्बन आर्गेनिक फार्मिंग के टिप्स जानने के लिए दस्तक देने लगे।

“मैं अर्बन फार्मिंग पर टिप्स देने के लिए, दिन में कोई 20-25 कॉल्स लेती थी। पर फिर मेरे बेटे के सुझाव पर मैंने युट्यूब चलाना सीखा और जून 2019 में अपना चैनल शुरू किया,” पद्मा ने बताया।

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“गर्मियों में भी मेरे पौधे हरे-भरे रहते हैं। गर्मियों में मल्चिंग, पूरे साल खाद देना और मल्टी-क्रॉपिंग जैसे तकनीकों से आप अपने अर्बन फार्म को हरा-भरा रख सकते हैं। मेरी यही कोशिश है कि जितने लोगों तक हो सके अपने इस ज्ञान को पहुंचाऊं,” उन्होंने आगे कहा और उनका मानना है कि यूट्यूब ऐसा करने के लिए एक अच्छा प्लेटफार्म है।

अपने 500 से भी ज्यादा पौधों के साथ, हैदराबाद का यह दम्पति हमें सीखा रहा है कि आप एक छोटी-सी छत को भी मिनी-फार्म में बदल सकते हैं। यदि आप तेलुगु भाषा में उनका यूट्यूब चैनल फॉलो करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें!

तस्वीरें व वीडियो: पद्मा पिन्नाका
मूल लेख: तन्वी पटेल 

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Srinivas and Padma Pinnaka, a couple from Hyderabad has turned their terrace into an urban farm. The couple grows over 500 plants of 40 varieties of fruits and vegetables in their independent house terrace. The organic terrace garden received an overwhelmingly positive response from hundreds of people in Hyderabad, so much so that it prompted the couple to start their YouTube channel to share tips.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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