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जानिए कम जगह में जंगल उगाने की तकनीक!

इस जंगल को केवल 3 साल तक रख-रखाव की ज़रुरत होती है। फिर यह अपने आप फलता-फूलता रहेगा और आपको आजीवन ताज़ी हवा देता रहेगा।

जापानी बॉटनीस्ट, अकीरा मियावाकी ने कम समय में जंगल लगाने की ‘मियावाकी तकनीक’ को ईजाद किया। इस तकनीक में स्थानीय पेड़-पौधे एक जगह पर बहुत ही पास-पास लगाये जाते हैं ताकि पेड़ों पर सिर्फ ऊपर से सूरज की रौशनी पड़े और वे ऊपर की तरफ ही बढ़ें, न कि दायीं-बायीं दिशाओं में।

इसके लिए कम जगह (20 स्क्वायर फूट तक की) की ज़रूरत होती है और ये पौधे दस गुना तेजी से पनपते हैं। साथ ही,  इस जंगल को तीन साल के बाद किसी रख-रखाव की ज़रूरत नहीं होती।

इस प्रक्रिया के बारे में द बेटर इंडिया ने अफ्फोरेस्ट के फाउंडर और मियावाकी तकनीक के एक्सपर्ट, शुभेंदु शर्मा से बात की।

और आज हम आपको मियावाकी तकनीक के छह स्टेप्स के बारे में बता रहे हैं!

1. पेड़-पौधों की स्थानीय किस्मों को पहचानिए:

आप जहां रहते हैं, वहां पर आसानी से उगने वाले पेड़-पौधों की किस्मों की एक लिस्ट बनाएं और फिर पास की किसी नर्सरी से जाकर ले आयें। इन पौधों की लम्बाई 60 सेमी से 80 सेमी होनी चाहिए।

 

2. डिवीज़न/बांटना

मल्टी-लेयर प्रोसेस के लिए अलग-अलग किस्म के पेड़-पौधे जैसे झाड़ियों वाली लेयर (6 फीट), सब-ट्री लेयर (6-12 फीट), ट्री लेयर (20-40 फीट), कैनोपी लेयर (40 फीट से ऊपर) और एक जैसी किस्म के पौधे एक साथ न लगायें।

 

3. मिट्टी को तैयार करें

जल्दी और आसानी से जड़ों तक पानी पहुँच जाए, इसके लिए बायोमास का इस्तेमाल करें। क्योंकि यह स्पंजी और सूखा होता है, जैसे कि चावल या गेंहू का भूसा या फिर मूंगफली के छिलके।

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नमी बनाये रखने के लिए इसमें पानी डालें और कोकोपीट मिलाएं।

जैविक और बायोडिग्रेडेबल उत्पाद जैसे कि एग्रो-वेस्ट (खेती से बचने वाला वेस्ट) से मिट्टी की मल्चिंग करें। इस स्टेप से मिट्टी का बचाव होता है और सूरज की रौशनी सीधा पेड़ों पर नहीं पड़ती।

फिर, कुछ जैविक उर्वरक, जैसे कि खाद या फिर वर्मीकंपोस्ट डालें। साथ ही, पोषण के लिए और पेस्ट को दूर रखने के लिए कुछ माइक्रोब्स भी मिलाएं।

 

4. पौधारोपण

एक मीटर गहरा गड्ढा खोदें और स्थानीय किस्म के 3-4 पौधे प्रति स्क्वायर मीटर पर लगा दें। पौधे और पेड़ के तने के चारों तरफ मिट्टी के स्तर के बीच 60 सेमी का अन्तराल रखें।

 

5. स्टिक लगायें

शुरूआती समय में, पेड़-पौधे झुके ना, इसका ध्यान रखने के लिए, उनके पास मिट्टी में सपोर्ट के लिए एक स्टिक लगा दें।

फिर पौधों को इस स्टिक से जूट की रस्सी से बाँध दें।

 

6. देखभाल करें

दिन में एक बार इस जंगल में पानी दें और पहले दो साल इसमें कोई खरपतवार न लगने दें। महीने में एक-दो बार जंगल को चेक करते रहें कि कोई बदलाव तो नहीं हुआ।

अच्छे परिणाम के लिए एक भी पेड़ को काटे नहीं।

“मैंने बंजर से बंजर ज़मीन पर भी घना जंगल उगते हुए देखा है। आज के समय में जब पेड़ों का कटना आम-सा हो गया है तो मियावाकी तकनीक इस स्थिति को बदल सकती है,” यह कहना है शुभेंदु शर्मा का।

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GIF Credits: Afforestt

मूल लेख: गोपी करेलिया

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Invented by and named after Japanese botanist Akira Miyawaki, the ‘Miyawaki Method’ is a unique technique to grow forests. Under the approach, dozens of native species are planted in the same area, close to each other, which ensures that the plants receive sunlight only from the top, and grow upwards than sideways. It requires very little space (a minimum of 20 square feet), plants grow ten times faster, and the forest becomes maintenance-free in three years!


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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