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लद्दाखी खाने को विश्वभर में पहचान दिला रहीं हैं यह महिला!

निलज़ा वांगमो ने ‘अलची किचन’ शुरू करने के लिए लोन लिया था और आज तीन साल बाद, वे लद्दाख में इसकी तीन शाखाएं सफलता से चला रही हैं!

ब निलज़ा वांगमो ने तय किया कि वह एक ऐसा रेस्तरां शुरू करना चाहती हैं जहां सिर्फ लद्दाखी खाना मिलेगा तो उनके दोस्तों और रिश्तेदारों ने उन्हें मना किया। “उनका मानना था कि बाहर से आने वाले लोगों और टूरिस्ट को हमारा खाना बहुत ही फीका और बेस्वाद लगेगा। लेकिन मेरा मिशन था कि मैं दुनिया का परिचय अपने यहाँ के ऑथेंटिक लद्दाखी खाने से करवाऊं,” निलज़ा ने द बेटर इंडिया से बात करते हुए कहा।

लेह से लगभग 66 किमी दूर अलची की रहने वाली 40 वर्षीया निलज़ा ने अपने मिशन पर कायम रहते हुए साल 2016 में ‘अलची किचन’ की शुरुआत की!

हम सबको पता है कि लद्दाख देश की मशहूर टूरिस्ट जगहों में से एक है। पर फिर भी यहाँ के होटल, रेस्तरां आदि बहुत कम ही लद्दाख का पारम्परिक खाना ऑफर करते हैं। और जो रेस्तरां करते हैं, वो भी सिर्फ मोकमोक (मोमो) और कुछ बेसिक स्नैक्स ही देते हैं।

इस तरह से, ‘अलची किचन’ यहाँ पर पहला रेस्तरां है जहां आपको पारम्परिक लद्दाखी खाना खाने को मिलेगा और वह भी एक मॉडर्न ट्विस्ट के साथ। सैकड़ों टूरिस्ट यहाँ पर दूर-दूर से खाने का लुत्फ़ उठाने आते हैं। 100 से 150 लोग हर दिन यहाँ खाना खाने आते हैं।

Skyu, a comfort food for all Ladakhis

संघर्ष भरी ज़िन्दगी

निलज़ा को हमेशा से ही खाना पकाने का शौक था लेकिन उन्होंने कभी इसे अपने करियर की तरह नहीं लिया। अपने ननिहाल में पली-बढ़ी निलज़ा ने अपने पिता को जन्म से पहले ही खो दिया था। पर उनकी माँ उनकी प्रेरणा बनीं और आज ‘अलची किचन’ में भी वह उनकी मदद करती हैं।

उनकी माँ ने उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए भी बहुत मेहनत की, पर उनके घर की आर्थिक स्थिति इस कदर बिगड़ती गयी कि निलज़ा को अपना कॉलेज बीच में छोड़कर, अपने परिवार को सपोर्ट करने के लिए नौकरी करनी पड़ी।

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निलज़ा और उनकी माँ की स्थिति पहले ही खराब थी और फिर उनके पिता के परिवार ने उन्हें संपत्ति में हिस्सा देने से बिल्कुल मना कर दिया। ऐसे में, उन दोनों ने जैसे-तैसे अपनी ज़िन्दगी को संभाला। फिर निलज़ा के नाना ने ही उनके लिए घर बनवाने में मदद की और आज उसी घर में वह ‘अलची किचन’ चला रही हैं।

अलची किचन में है लद्दाखी स्वाद का खज़ाना

अपने कॉलेज के दिनों में निलज़ा पार्ट-टाइम टूरिस्ट गाइड की तरह भी काम करती थीं। इसलिए उनका पहला प्लान था कि वह अलची में एक होमस्टे शुरू करें, जहां पर 1000 साल पुराना अलची गोम्पा स्थित है।

लेकिन फिर उन्होंने अपनी कुकिंग स्किल्स को आजमाने की ठानी और एक एक्सक्लूसिव लद्दाखी रेस्तरां शुरू किया।

“कुकिंग हमेशा से मेरी पसंदीदा हॉबी रही है। इससे मुझे आगे बढ़ने का हौसला मिला,” उन्होंने कहा।

अपनी माँ और परिवार के साथ बैठकर उन्होंने मेन्यु के ऊपर काफी विचार-विमर्श किया। कुछ पुरानी- गुम हो चुकी रेसिपीस को ढूंढा तो कुछ रेसिपीस को एक मॉडर्न टच के साथ नया स्वाद दिया। उनकी सबसे ज्यादा बिकने वाली- ताशी ताग्ये चाय की रेसिपी को इन दोनों माँ-बेटी ने आठ सामग्रियों से बनाया है जो कि बौद्ध धर्म के आठ शुभ प्रतीकों को दर्शाते हैं।

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Paba – arguably the Ladakhi equivalent of Roti-Sabzi

“दूसरा बेस्टसेलिंग आइटम है खंबीर- एक फर्मेंटेड लद्दाखी ब्रेड। घर पर हम इस ब्रेड को किसी करी, सूप या फिर साल्टेड बटर टी के साथ खाते हैं लेकिन मैंने इसे आ ला कार्टे डिश की तरह तैयार किया,” उन्होंने बताया। उन्होंने ब्रेड में चिकन, मीट और अलग-अलग सब्ज़ियों की स्टफिंग की और इससे यह आम-सी डिश एक खास व्यंजन बन गयी।

हम सब जानते हैं कि पास्ता इटेलियन डिश है लकिन बहुत ही कम लोगों को इसके लद्दाखी कजिन चुतागी के बारे में पता होगा। और इस अनोखी डिश का स्वाद लेने के लिए अलची किचन बेहतरीन जगह है।

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टूरिस्ट यहाँ पर खुबानी, अखरोट या चॉकलेट मोकमोक (मोमो) प्लेटर ट्राय कर सकते हैं, जिसे ‘लिटिल बाईट्स फ्रॉम हेवन’ का लेबल दिया गया है। इसके अलावा, थके-हारे ट्रेवलर्स के लिए पोषण से भरपूर डिश भी हैं।

लद्दाखी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश

दिलचस्प बात यह है कि यहाँ पर खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता है और वह भी खुली जगह पर। यहाँ पर बनते स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबु किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर लेती है।

निलज़ा आगे बताती हैं कि उनके यहाँ ऑर्डर के लिए हर एक डिश फ्रेश बनती है। बाकी होटल जैसे सूप और ग्रेवी ज्यादा मात्रा में बनाकर रख लेते हैं, वे ऐसा नहीं करते। उनकी पूरी प्रक्रिया बिल्कुल ताज़ा होती है।

अलची किचन का सारा स्टाफ युवा लड़कियां हैं और उन्हें खुद निलज़ा ने कुकिंग, सर्विंग और मैनेजमेंट के लिए ट्रेन किया है। वे कभी-कभी उनके यहाँ आने वाले लोगों के लिए कुकिंग वर्कशॉप भी करती हैं और इस सबके साथ वे अपने दोनों बच्चों की परवरिश भी अच्छे से कर रही हैं।

Lamb Chutagi – a local pasta dish

अपनी शुरुआत के सिर्फ तीन सालों में ही अलची किचन ने क्षेत्र में एक अच्छा नाम बना लिया है। निलज़ा को उम्मीद है कि लद्दाखी युवा आने वाले समय में जंक फ़ूड के पीछे भागने की बजाय अपने पारम्परिक खाने को महत्व देंगे।

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“मैं अलची किचन को एक फ्रेंचाई में बदलना चाहती हूँ जिसकी लद्दाख के बाहर दूसरे शहरों में भी शाखाएं हों, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लद्दाखी खाने का लुत्फ़ उठा पायें। मैं लद्दाखी खाने को किसी भी रेस्तरां के मेन मेन्यु में देखना चाहती हूँ,” उन्होंने अंत में कहा।

मूल लेख: सायंतनी नाथ

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Nilza Wangmo, who hails from Alchi, a remote hamlet around 66 kilometers from Leh, started Alchi Kitchen in 2016. While Ladakh is incredibly popular as a tourist destination, most eateries curiously refrain from serving authentic Ladakhi dishes. Only a handful of restaurants do so, and even they choose to stick to the universally popular mokmok (momos) and basic snacks. Therefore, Alchi Kitchen is the first-ever eatery in the mountain territory which serves Ladakh’s traditional cuisine, along with a modern twist.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है.

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