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किसानों के लिए कम लागत की मशीनें बनाने वाला मैकेनिकल इंजीनियर!

“बड़े किसानों के लिए तो बाज़ार में उपलब्ध मशीनें खरीदना बहुत आसान है, लेकिन छोटे किसानों के लिए यह बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में अगर हम भी सिर्फ मुनाफे के बारे में सोचेंगे तो उनका क्या होगा?”

किसान पूरे साल मेहनत करते हैं और फिर भी उन्हें बाज़ार से उनकी लागत जितना मूल्य भी नहीं मिलता। ऐसे में, अपना रोष व्यक्त करने के लिए बहुत से किसान अपनी पूरी की पूरी उपज को कई बार फेंक देते हैं या फिर सड़कों पर बिखेर देते हैं। और जो अपना गुस्सा इस तरह ज़ाहिर नहीं कर पाते, वो अंदर ही अंदर घुटकर आत्महत्या जैसा भयानक कदम उठा लेते हैं।

“जब भी ऐसी कोई खबर आती, तो मैं अक्सर सोचता था कि आखिर हम कैसे किसानों की मदद कर सकते हैं। कैसे इन लोगों को मौत के मुंह में जाने से बचा सकते हैं। आखिर ऐसा क्या करें कि किसानों को अपनी साल भर की मेहनत सड़कों पर न फेंकनी पड़े?” यह कहना है 32 वर्षीय जपिंदर वधावन का।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और रिसर्च करने वाले जपिंदर पंजाब के मोहाली के रहने वाले हैं। बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर और मेन्टेनेन्स मेनेजर काम कर चुके जपिंदर के मन में हमेशा से ही किसानों की स्थिति सुधारने की भावना रही। उन्हें हमेशा यही लगता कि कैसे वह अपने काम के ज़रिये उनकी मदद कर सकते हैं।

एक नयी शुरुआत:

द बेटर इंडिया से बात करते हुए जपिंदर ने बताया कि 2017 में उन्हें एक बार पूसा संस्थान की एक कांफ्रेंस में जाने का मौका मिला। उस कांफ्रेंस में देश के बहुत से जैविक और अग्रणी किसान आये हुए थे। जपिंदर जब इन किसानों से मिले और उनके खेती करने के तरीकों और फिर उस उपज को प्रोसेस करके प्रोडक्ट्स बनाकर बेचने के बारे में जाना तो उन्हें समझ में आया कि खेती में बहुत उम्मीदें हैं। बस ज़रूरत है तो किसानों तक सही जानकारी और सही साधन पहुंचाने की।

“मैंने उन किसानों से पूछा कि एक इंजीनियर के तौर पर अगर मैं उनकी किसी तरह की मदद कर सकता हूँ तो मुझे ख़ुशी होगी। उनमें से एक किसान, हरपाल सिंह जी ने पूछा अगर मैं उनके खेत के हिसाब से एक रोटावेटर बना सकता हूँ उनके लिए तो अच्छा रहेगा। मैंने उन्हें तुरंत हाँ कर दी,” जपिंदर ने बताया।

Japinder Wadhawan

उन्होंने जपिंदर को अपनी सभी ज़रूरतें समझायीं और साथ ही, 40 हज़ार रुपये एडवांस में ही उन्हें दे दिए। जपिंदर आगे बताया कि उन्होंने सबसे पहले रोटावेटर का डिजाईन तैयार किया और फिर कुछ मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से बात की। लेकिन उन्होंने मना कर दिया कि वे इस तरह से मशीन नहीं बना सकते। ऐसे में, उन्होंने लोकल मैकेनिकल वर्कशॉप्स में बात की और उनके कारीगरों से रोटावेटर बनवाया।

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जपिंदर कहते हैं कि उन्होंने एक महीने में हरपाल जी के लिए उनकी ज़रूरत के हिसाब से 10 फुट रोटावेटर तैयार कर दिया, वह भी बाज़ार में मिलने वाले रोटावेटर से काफी कम कीमत पर। हालांकि, खेत में इस्तेमाल करने के बाद उन्हें मशीन की एक-दो कमियों के बारे में समझ में आया और उन्होंने फिर से इस पर काम किया।

“मेरा पहला प्रोजेक्ट जब सफल रहा और हरपाल जी भी संतुष्ट थे तो मुझे लगा कि शायदा यही काम है जिसमें मुझे अब आगे बढ़ना चाहिए। मैं अपनी इंजीनियरिंग की नॉलेज से किसानों के लिए इस्तेमाल करूं, इससे अच्छा और क्या हो सकता है,” उन्होंने आगे कहा।

किसानों के हित को बना लिया अपना लक्ष्य:

यहीं से जपिंदर का कम लागत में किसान की ज़रूरत के हिसाब से फार्म मशीनरी बनाने का काम शुरू हुआ। साथ ही, किसानों को जैविक खेती करने और उपज की प्रोसेसिंग कर प्रोडक्ट्स बनाकर बेचने के लिए भी प्रोत्साहित करना- उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। अपनी रिसर्च के दौरान वह खाली समय में आकर किसानों से मिलते और उनसे खेती की प्रक्रिया को समझने की कोशिश करते।

“मुझे दूसरा प्रोजेक्ट भी किस्मत से मिला। मैं बस में कहीं जा रहा था और उसी बस में सफ़र कर रहे एक किसान, तजिंदर सिंह से मेरी बात होने लगी। उन्होंने बताया कि उन्हें हल्दी की प्रोसेसिंग के लिए एक बॉयलर की ज़रूरत है। एक महीने के अंदर मैंने उन्हें उनके मुताबिक बॉयलर तैयार करके दे दिया।”

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इस बारे में मोहाली के किसान तजिंदर सिंह ने बताया, “मैंने अपनी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद खेती शुरू की थी। मैं जैविक हल्दी की खेती कर रहा था तो उसकी प्रोसेसिंग के लिए मुझे स्टीम बॉयलर चाहिए था। इत्तेफाक से मेरी मुलाक़ात जपिंदर से हुई और उनसे बात करके मुझे लगा कि अगर हमारे देश का कोई नौजवान किसानों के लिए कुछ करना चाहता है तो हमें उसे मौका देना चहिये। और बस फिर मैंने उनसे ही कहा कि वह बॉयलर बनाये और मुझसे जिस भी तरह की मदद चाहिए मैं कर दूंगा। इसके बाद उन्होंने बिल्कुल मेरी ज़रूरत के हिसाब से मुझे मशीन तैयार करके दी।”

Japinder made Turmeric boiler for the farmer

इसी तरह से जपिंदर के जब दो-तीन प्रोजेक्ट्स सफल रहे तो उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर लुधियाना में अपनी वर्कशॉप शुरू की और साथ ही, अपने स्टार्टअप, ‘रफ़्तार इंजीनियरिंग प्रोफेशनल कंपनी’ की नींव रखी। उनका लक्ष्य बहुत ही स्पष्ट था- फार्म मशीनरी को किसानों के लिए कम से कम लागत पर उपलब्ध कराना और वह भी उनके फार्म की ज़रूरत के हिसाब से।

जपिंदर ने अब तक 25 प्रोजेक्ट किये हैं, जिनमें से 22 एकदम सफल हैं तो बाकी 3 की कमियों को सुधारने का काम जारी है। ये सभी ऑर्डर्स उन्हें बिहार, पंजाब, हरियाणा, आंध्र-प्रदेश और असम जैसे राज्यों के किसानों से मिले हैं। उन्होंने रोटावेटर, गार्लिक अनियन पीलर, जैगरी प्रोसेसिंग फ्रेम, टरमरिक स्टीम बॉयलर, टरमरिक पुलवेराईज़र, टरमरिक पॉलिशर, पावर वीडर, पल्सेस मिल, पुलवेराईज़र, इरीगेशन शेड्यूलर जैसी मशीनें बनायीं हैं।

Promotion

मशीन बनाने के अलावा जपिंदर इंजीनियरिंग में पीएचडी करने वाले छात्रों के प्रोजेक्ट्स में भी मदद करते हैं और उन्हें आगे चल कर कृषि के क्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

With Students

चुनौतियाँ:

जपिंदर बताते हैं कि उनका यहाँ तक का सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। टीम को सम्भालना, काम के दौरान लोगों से मिलने वाले धोखे और फिर फंडिंग – शुरुआत में ये सब समस्याएं उनके सामने लगातार आती रहीं।

“स्टार्टअप शुरू होने के बाद एक टीम मेम्बर ने हमें बीच में ही छोड़ दिया और बाकी, जब आर्थिक समस्याएं ज्यादा बढ़ गयीं तो दूसरे साथी को मैंने खुद सलाह दी कि वह अपना घर चलाने के लिए कोई जॉब कर ले।”

इसके अलावा, बहुत बार ऐसा भी हुआ कि उन्हें उनकी लागत के हिसाब से बहुत ही कम पैसे किसानों से मिले। लेकिन उन्हें पता था कि उन्हें अपने इस स्टार्टअप को चलाए रखना है। ऐसे में अपने मिशन को फण्ड करने के लिए जपिंदर ने कुछ दूसरे प्रोजेक्ट्स, जैसे कि मोहाली में बन रहे स्टेडियम में फेब्रिकेशन का काम ले लिया। वहां से जो भी पैसा आता, उसे वह अपने स्टार्टअप के लिए लगाते।

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पर मुश्किलें कितनी भी क्यों न रही हों जपिंदर ने कभी भी ‘रफ़्तार इंजीनियरिंग कंपनी’ को बंद करने के बारे में नहीं सोचा। क्योंकि उनका कहना है, “बड़े किसानों के लिए तो फिर भी बहुत आसान है कि वे बाज़ारों में उपलब्ध मशीन खरीद लें। लेकिन छोटे किसानों के लिए यह बहुत ही मुश्किल है। ऐसे में अगर हम भी सिर्फ मुनाफे के बारे में सोचेंगे तो उनका क्या होगा? मेरी कोशिश सिर्फ इन छोटे, कम ज़मीन वाले किसानों को सेल्फ-सस्टेन बनाना है।”

Farm Machinery

फ़ूड-प्रोसेसिंग करें किसान

फार्म मशीनरी बनाने के साथ-साथ जपिंदर एक और अहम काम में अपना योगदान दे रहे हैं और वह है ज्यादा से ज्यादा किसानों को जैविक खेती की तरफ लाना। उनका मानना है कि आज हमने अपने स्वार्थ के चलते स्वास्थ्य और पोषण को कहीं किनारे कर दिया है।

किसानों को उनकी उपज का सही दाम न देकर, उन्हें मजबूर किया है कि वे रसायन इस्तेमाल करके खेती करें ताकि ज्यादा फसल हो और वे अपना घर चला पायें। यदि शुरू से ही किसानों को उनका सही हक दिया जाता तो उन्हें कोई पेस्टिसाइड या फिर केमिकल खेतों में डालने की ज़रूरत न पड़ती।

“पिछले दो सालों में मैंने कई कृषि संस्थानों और संगठनों के साथ मिलकर किसानों की जैविक खेती और फ़ूड प्रोसेसिंग पर ट्रेनिंग दी है। ट्रेनिंग के दौरान, मैं उन्हें जैविक खेती के फायदों के साथ-साथ यह भी बताता हूँ कि कैसे वे फ़ूड प्रोसेसिंग के ज़रिये अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। साथ ही, फ़ूड प्रोसेसिंग के लिए किस तरह से फार्म मशीनरी को इस्तेमाल किया जाता है, इस पर भी उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है,” जपिंदर ने बताया।

Training to Farmers

जपिंदर अभी तक 1000 से भी ज्यादा किसानों को इस विषय पर ट्रेनिंग दे चुके हैं। उनकी सिर्फ यही ख्वाहिश है कि ज्यादा से ज्यादा किसान केमिकल युक्त खेती को छोड़कर जैविक और प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ें। हालांकि, किसानों को इसके लिए राजी करना आसान नहीं है लेकिन जपिंदर अपने इस अभियान में लगे हुए हैं।

जपिंदर की कोशिश है कि वे अपनी कंपनी को बड़े स्तर पर लेकर जाये और देश के कोने-कोने तक हर एक ज़रूरतमंद किसान तक उनकी मशीनरी पहुंचे।

साथ ही, वह सिर्फ यही सन्देश देते हैं, “किसानों की इस दुर्दशा की ज़िम्मेदारी हम सभी की है। इसलिए अब ज़रूरत है कि केमिकल फार्मिंग करने या फिर पराली जलाने का दोष उन्हें देने ने की बजाय, हम समय पर उन्हें सही साधन दें ताकि एक बार फिर हम स्वस्थ और प्राकृतिक खेती की तरफ बढ़ सकें।”

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यदि कोई किसान या फिर किसानों का कोई समूह अपनी ज़रूरत के हिसाब से कोई फार्म मशीनरी चाहता है तो बेहिचक जपिंदर वधावन को 9478810324 पर सम्पर्क कर सकता है। इसके अलावा, आप उनकी मशीनरी के बारे में उनके फेसबुक पेज के ज़रिये भी जान सकते हैं!

संपादन – मानबी कटोच 

Summary: Japinder Wadhawan, a Mechanical Engineer, has launched Raftaar Engineering Professionals Company and now making farm machinery for farmers at low cost and as per their requirements. He also trains farmers to adopt organic methods for their crops and then process it for making value added products.


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Written by निशा डागर

बातें करने और लिखने की शौक़ीन निशा डागर हरियाणा से ताल्लुक रखती हैं. निशा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन और हैदराबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स की है. लेखन के अलावा निशा को 'डेवलपमेंट कम्युनिकेशन' और रिसर्च के क्षेत्र में दिलचस्पी है. निशा की कविताएँ आप https://kahakasha.blogspot.com/ पर पढ़ सकते हैं!

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