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अपने ही खेत में उगे जैविक उपज का वैल्यू एडिशन कर बना दिया अपना ब्रांड; आज लाखों में है कमाई!

8वीं तक पढ़े राजपाल सिंह 60 साल की उम्र में भी लगातार नया सीखने में जुटे हैं।

रियाणा के प्रगतिशील किसान राजपाल सिंह श्योराण आज खेती से लाखों की कमाई कर रहे हैं, पर राजपाल सिंह की स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं थी। हिसार जिले के कोथकलां गाँव में रहने वाले एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ। घर की नाज़ुक आर्थिक स्थिति की वजह से वे आठवीं से आगे नहीं पढ़ पाए और पारम्परिक खेती में ही जुट गए।

60 वर्षीय राजपाल सिंह 2014 तक भी दूसरे किसानों की तरह रसायनों के सहारे ही खेती करते थे। पर फिर एक दिन उन्होंने इंटरनेट पर एक वीडियो देखा, जिसमें रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया था।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए वे कहते हैं,“इस हरियाणवी का माथा उसी दिन घूम गया। मैंने जैविक खेती करने का मन बना लिया, यह जानते हुए भी की अगले 3 साल तक मामला अधर-झूल में ही रहने वाला है।”

राजपाल सिंह श्योराण

लगातार मेहनत करते हुए राजपाल ने जैविक खेती में सफलता तो पायी पर किसी भी आम किसान की तरह, वे भी अपनी उपज मंडियों में ले जाते। और उसे बेचने के लिए परेशान रहते। 4-4 दिन तक उनकी फसल पड़ी रहती थी। उनकी उपज के लिए बाजार में मेहनत के मुताबिक भाव नहीं मिलता था, ऊपर से बिचोलिये अलग परेशान करते थे।

इसलिए अब उन्होंने मन बना लिया कि अब वे अपनी उपज को मंडियों में ले जाकर नहीं बेचेंगे। उन्होंने यहां जो बुद्धिमानी दिखाई, उसी के बल पर आज वे सफलतम किसान के रूप में लोकप्रियता बटोर रहे हैं।

वे बताते हैं,“मैंने अपना नज़रिया बदला। खेती को उद्योग और व्यापार की तरह अपनाया, खुद को भी किसान की बजाय उद्योगपति या व्यापारी ही माना।”

 

राजपाल ने अब अपनी उपज को सीधे मंडियों में ले जाकर बेचने की बजाय खुद का वैल्यू ऐडिशन यूनिट लगाया। सबसे पहले उन्होंने मोटे अनाज के बिस्कुट बनाने से शुरुआत की। 

 

“यही कोई दो साल पहले मैंने अपने घर में ही जौ और बाजरा के बिस्कुट बनाने का काम शुरू किया। जौ, बाजरा, चना, आंवला पाउडर, सहजन पाउडर, देशी घी, गुड़, शहद और गाय का दूध मिलाकर मैंने इस तरह के पौष्टिक बिस्कुट तैयार किए जो पूरी तरह से जैविक अनाज से निर्मित हैं। अब इन बिस्किट्स की मांग तेजी से बढ़ने लगी है।”

हैरत की बात यह है कि उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए किसी तरह का कोई विज्ञापन नहीं करना पड़ा। फ़ेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप्स की मदद से उन्हें बहुत सारे नियमित ग्राहक मिल गए।

सीजन में राजपाल 25 से 30 किलो बिस्किट्स रोजाना तैयार करते हैं। फ़िलहाल वे दो तरह के बिस्किट्स बनाते हैं, जो 500 रुपये प्रति किलो की दर पर बिकते हैं।

बिस्कुट का प्रयोग सफल होने पर राजपाल ने अपने खेत में उग रहे बाकी उत्पादों का भी वैल्यू एडिशन करने की सोची। उन्होंने जैविक तरीके से गन्ना उगाकर गुड़ तैयार किया। आज उनके खेत का जैविक गुड़ बाज़ार में 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि आम गुड़ 50-60 रुपये किलो के बीच ही बिकता है।

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इन सब उत्पादों से थोड़ा मुनाफा हो जाने के बाद उन्होंने 85,000 रुपये में एक सेकंड हैंड स्लो प्रोसेसिंग मशीन खरीदी, जिससे उन्होंने जैविक सरसों से तेल निकालना शुरू किया। अब अपने खेत के जैविक सरसों से बने तेल को भी उन्होंने बाज़ार में उतारा है। जैविक सरसों के इस तेल की कीमत 210 रुपये प्रति लीटर है, जबकि सामान्य तेल 100 रुपये लीटर की दर से बिकता है। दोगुनी कीमत होने के बाद भी बेहतरीन क्वालिटी का होने के कारण उनका यह तेल एडवांस बुकिंग पर बिक रहा है।

“इस बार 2 क्विंटल तेल 175 से 210 रुपये लीटर के भाव से बिका है। यह तेल 5 लीटर की पैकिंग में  भी उपलब्ध है,” राजपाल ने बताया।

 

लगातार प्रयोगशील सोच रखने वाले इस किसान ने अपनी गाय और भैंसों से प्राप्त दूध से घी बनाकर भी अपनी कमाई बढ़ाई। उनका बनाया हुआ देसी गाय का शुद्ध घी 1200 रुपये से लेकर 2000 रुपए लीटर तक बिकता है। इन सभी उत्पादों को अब वे खुद का ब्रांड बनाकर अपने नाम ‛श्योराण’ से बेचते हैं।

पिछली सीजन में उन्होंने सारे खर्चे निकालकर 3 लाख रुपए कमाए, इस बार यह आंकड़ा 6 लाख तक जा पहुंचा है। अब वे उम्मीद जता रहे हैं कि आने वाले सीजन में वे 10 लाख तक का मुनाफ़ा कमा लेंगे।

राजपाल सिंह ने ‛नौगांवा जैविक खेती’ नाम से एक ग्रुप भी बनाया है, जिसमें लगभग 90 प्रगतिशील किसान शामिल हैं और ये सभी किसान जैविक खेती से जुड़े हैं। अपने उत्पादों की बिक्री के लिए उन्होंने ‛श्योराण जैविक फार्म’ का रजिस्ट्रेशन करवाया है। साथ ही ‛फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ का लाइसेंस भी लिया है। अब उनके पास जीएसटी और आईएसओ नम्बर भी है।

आगे की योजनाओं के बारे में बात करते हुए राजपाल कहते हैं, “मैं अब तेल, बिस्किट, गुड़ के साथ-साथ जैविक गेहू से तैयार आटे को भी बाजार में लाने की सोच रहा हूँ।”

8वीं तक पढ़े राजपाल सिंह 60 साल की उम्र में भी लगातार नया सीखने में जुटे हैं। वे आए दिन कृषि मेलों में शिरकत करते हैं। उन्हें हिसार के चौधरी चरणसिंह कृषि विश्वविद्यालय में प्रदेश के 10 प्रगतिशील किसानों के लिए शुरु किए एग्री स्टार्टअप कोर्स में भी शामिल किया गया है।

देश भर के किसानों के नाम संदेश देते हुए वे कहते हैं,“देश का हर किसान खेती करने की तकनीक जन्म से ही जानता है, जरूरत है तो बस प्रोफेशनल सोच को जोड़ने की। किसान अपने उत्पादों में अपनी मेहनत और खेत की कीमत शामिल नहीं करता, इसलिए उत्पादन से होने वाले नफ़े नुकसान का सही सेआंकलन नहीं कर पाता। अगर आपका उत्पाद शुद्धता की कसौटी पर खरा है तो उसे बाज़ार में अपनी जगह बनाने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी। किसानों को चाहिए कि वे अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को अपने द्वारा तय की गई क़ीमतों पर बेचें और क्षणिक फायदे के लिए मिलावट का सहारा लेने से बचें।”

राजपाल सिंह से संपर्क करने के लिए आप उन्हें 09992023006 पर संपर्क कर सकते हैं।

संपादन – मानबी कटोच 


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Written by मोईनुद्दीन चिश्ती

देशभर के 250 से ज्यादा प्रकाशनों में 6500 से ज्यादा लेख लिख चुके चिश्ती 22 सालों से पत्रकारिता में हैं। 2012 से वे कृषि, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर कलम चला रहे हैं। अब तक उनकी 10 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। पर्यावरण संरक्षण पर लिखी उनकी एक पुस्तक का लोकार्पण संसद भवन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों हो चुका है।

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